बुधवार, 11 अक्टूबर 2023

एक स्त्री होना सहज नही

शीर्षक = एक स्त्री होना सहज नही

एक स्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई।
किसी के अंगना पली बढ़ी किसी के और के लिए हुई विदाई।

एक स्त्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई।
खुश हूँ खुश हूँ कहते हुए न जाने कल आँखों में दिखी ललाई।

एक स्त्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई ।
कहने को दो परिवार मेरे फिर क्यों महसूस होने लगी पराई।

एक स्त्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई।
 कुछ भी तो नया नही है पगली यह रीत जगत की चली आई।


एक स्त्री होना सहज नही आज पहले से बेहतर जान पाई।
कब तक तू मापती रहेगी अपनी दूसरे की नजरों में गहराई।
 
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