शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

बाणभट्ट#हर्षचरित#कादम्बरी

Sanskrit sahitya important questions


हर्षचरित गद्यकाव्य की किस मे है आख्यायिका /
कथा ?  
आख्यायिका की श्रेणी में
 note आख्यायिका की कथावस्तु ऐतिहासिक होती है जबकि कथा की कथावस्तु कविकल्पित होती है 

बाणभट्ट द्वारा रचित कादंबरी और हर्षचरित में से कौन सी रचना पूर्व की मानी गई है? 
हर्ष चरित  
 Note क्योंकि कादंबरी कथा की शैली हर्षचरित से प्रौढा़ है 

बाणभट्ट की रीति किस प्रकार की है? 
पांचाली रीति 
वैदर्भी, पांचाली और गौडी तीन प्रकार की रीति मानी जाती है। 

बाणभट्ट का समय है? 
सातवी शताब्दी का पूर्वार्ध 

 प्रथम ऐतिहासिक गद्य काव्य लिखने वाले गद्यकार है?  
 बाणभट्ट
 जबकि सुबंधु प्रथम गद्यकार माने जाते हैं यदि प्रथम ऐतिहासिक गद्य काव्य पूछा जाता है तो उसके के रचनाकार बाणभट्ट है  

कादंबरी कथा में राजा शूद्रक, शुक  की कितने जन्मों की कथा कहीं गई है? 
 तीन जन्मो की  

"कादंबरी" की कथा में शूद्रक कहां के राजा थे  विदिशा के 

शूद्रक अपने पूर्व जन्म चंद्रापीड़ के रूप में कहां के राजा थे
 उज्जैनी के   

चंद्रपीड़ अपने पूर्व जन्म में किस रूप में थे 
चंद्रमा के रूप में   
 कादंबरी संस्कृत गद्य साहित्य
कादंबरी संस्कृत गद्य साहित्य

वैशम्पायन को शुक(तोता) बनने का बनने का श्राप किसने दिया था 
महाश्वेता ने ।

 महाश्वेता किस से प्रेम करती थी
Note पुंडरीक से 
यह पुंडरीक ही अगले जन्मों में क्रमशः वैशंपायन और शुक बना  

 पुंडरीक के पिता का नाम क्या था  
श्वेतकेतु    

पुण्डरीक के घनिष्ठ मित्र का नाम 
कपिञ्जल 

 चंद्रपीड़ के घोड़े का नाम क्या था?
 इंद्रायु
Note यह पूर्व जन्म में कपिञ्जल था  

बाणभट्ट द्वारा रचित हर्षचरित का प्रधान रस है ? वीररस  

हर्षवर्धन के पिता का नाम?
 प्रभाकर वर्धन  

चंद्रपीड की सेविका कौन थी? 
span style="font-size: x-large;">पत्रलेखा

पत्रलेखा  कादंबरी की सहचरी कौन थी
  मदलेखा 

महाश्वेता की सेविका का नाम? 
तरलिका।                                                    
नीचे दिए गए आर्टिकल्स पर क्लिक कर आप उसे पढ़ सकते हैं "शुकनासोपदेश "यह भी कादंबरी का एक महत्वपूर्ण अंश जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतर पूछा जाता है

 "शुकनासोपदेश" कादंबरी का महत्वपूर्ण अंश 

धन्यवाद 

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

Motivation#golden word#success

Motivation

अगर बार बार किसी के रोकने पर भी आप वह करना चाहते है जो आपकोSelf satisfication से भर देता है जोआपकी खुशियो का राज हैतो रूकना मत क्योकि वह ईश्वर से मिलाअनमोल ताज है उस ताज को खोना नही क्योकि उसकी कीमत केवल आप जानते है उस ताज से आप अपनी नजरो मे एक शहंशाह से कम नही है।

अगर आपका विश्वास पक्का है तो, आज नही कल सही  मंजिल आपका स्वागत बडे सुन्दर ढंग से करेगी 
Success#motivation#golden word about success
Success#motivation
                 

 हमेशा रिजल्ट का मुहँ ताकते रहोगे या success की परवाह किये विना भी कुछ करोगे।
success की defination  क्या वही जिसे 90% से ज्यादा लोग मानते है वह नही जिसे 10%  लोग अपने कामसे proov कर चुके है आप भी success ki defination मे कुछ add करके देखो पहले से दुगुनी सफलता और खुशी चार गुनी होगी 
 
 Thank for visiting  sanskrit jeeva   

शूद्रक विरचित मृच्छकटिकम्#mrichchhakatikam#sanskrit sahitya  (Read also)

बुधवार, 18 सितंबर 2019

संस्कृत महाकाव्यो में से पूछे जाने वाले परीक्षोपयोगी प्रश्न# शिशुपाल वध महाकाव्य#महाकवि माघ की रचना कौन सी है?

 शिशुपालवध महाकाव्य के नायक ?
श्री कृष्ण

 शिशुपालवध महाकाव्य के प्रति नायक?
शिशुपाल

 शिशुपालमाघ का प्रिय छंद है ?
मालिनी

 शिशुपाल वध महाकाव्य का उपजीव्य काव्य है?
महाभारत का सभापर्व

महाभारत के सभापर्व के कितने अध्यायों मे शिशुपाल वध की कथा का वर्णन है?
अध्याय 33 से 45 तक

शिशुपाल वध के किस सर्ग में  श्री कृष्ण द्वारा इंद्रप्रस्थ प्रस्थान का वर्णन है?
 तृतीय (3) सर्ग मे

"शिशुपाल वध "महाकाव्य के किस सर्ग में रैवतक पर्वत का वर्णन है?
चौथे सर्ग में

"शिशुपाल वध "महाकाव्य के किस सर्ग में  षड ऋतुओ का वर्णन महाकवि माघ ने किया है?
छठे सर्ग में ।                                                               

"शिशुपाल वध" महाकाव्य के ग्यारहवे (11) सर्ग में क्या वर्णित है?
प्रभात वर्णन

कृष्ण का युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में पहुंचना तथा भीष्म द्वारा श्री कृष्ण स्तुति का वर्णन किस सर्ग में हुआ है ?

चौदहवे सर्ग में

 शिशुपाल द्वारा भेजे गए दूत के प्रश्नों का उत्तर कौन देता है
सात्यकि

 महाकवि माघ ने चित्रालंकारो का प्रयोग किस सर्ग मे किया है?
19वे सर्ग मे ।                                                           

 महाकवि माघ ने" शिशुपाल वध" महाकाव्य में प्रत्येक सर्ग के प्रारंभ और अंत में किस शब्द का प्रयोग किया है
श्री

"कृष्ण-  बलराम- उदव" संवाद महाकाव्य के किस सर्ग में है? द्वितीय(2) सर्ग मे

कुमारसंभव महाकाव्य की महत्वपूर्ण सूक्तियां #kumarsambhav mahakavya👈

उत्तररामचरितम् की प्रमुख सूक्तियां #भवभूति                   

श्री कृष्ण ने  युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में जाने के लिए किसकी सलाह मानी थी
उद्धव की।                                                                 

 सर्व: स्वार्थम् समीहते  (सभी अपना स्वार्थ देखते हैं ) यह कथन शिशुपाल वध के किस सर्ग में है
दूसरे सर्ग में

मल्लीनाथ ने शिशुपाल वध महाकाव्य पर कौन सी टीका लिखी?
सर्वड्कषा टीका

शिशुपाल वध महाकाव्य की रीति है?
 गौडी रीति ।                                 

 शिशुपाल वध का अंगीरस (प्रधानरस) कौनसा है?
वीररस । 

यमुना नदी का वर्णन किस सर्ग मे है?
12 वे सर्ग मे

शिशुपाल वध की कथा के अनुसार शिशुपाल प्रथम व द्वितीय जन्म में कौन था ?
 शिशुपाल प्रथम जन्म में हिरण्यकशिपु और द्वितीय जन्म में रावण था

शिशुपाल के अत्याचारों से त्रस्त देवताओं ने किसे दूत के रूप में श्री कृष्ण के पास भेजा था ?
नारद को।                                                                     
 "श्री कृष्ण नारद" संवाद किस सर्ग में है
प्रथम सर्ग में

शिशुपाल वध महाकाव्य के  प्रथम सर्ग में कौन सा छंद है ?वंशस्थ छंद 

माघ का समय है ?
675 ई (7वी शताब्दी का उतरार्द्ध)

 महाकवि माघ का निवास स्थान माना गया है?
जालौर जनपद का भीनमाल प्रदेश(राजस्थान)

महाकवि  मांघ किसके पूजक थे?
सूर्य के

 महाकवि माघ के पिता का नाम क्या था ?
दत्तक।               

महाकवि माघ की पितामह का नाम क्या था?
सुप्रभदेव।       

शिशुपाल वध महाकाव्य पर वल्लभदेव ने कौन सी टीका लिखी ? सन्देहविषौषधि टीका

शिशुपाल वध महाकाव्य पर भरत मलिक ने कौन सी टीका लिखी?
सुबोधा टीका

सोमवार, 9 सितंबर 2019

शूद्रक विरचित मृच्छकटिकम् #mrichchhakatikam#sanskrit sahitya

Mrichchhkatikam important points                            

 Mrichchhkatikam संस्कृत साहित्य में रूपको के अन्तर्गत प्रकरण विधा है।जिसके रचयिता शूद्रक है।इसके 10अंक है। जिसमे दरिद्र चारुदत्त और वसन्तसेना की प्रणय कथा वर्णित है।इस प्रकरण मे तत्कालीन सामाजिक,आर्थिक परिस्थितियो का वर्णन बहुत स्वाभाविक रूप मे हुआ है।  

                                           

Mrichchhkatikam से संबधित महत्त्वपूर्ण तथ्यों का वर्णन नीचे किया जा रहा है आप इनका अध्ययन अवश्य करे ताकि  संस्कृत की किसी भी प्रतियोगी परीक्षा मे पूछे जाने वाले प्रश्नो के सही उत्तर आसानी से दे सके।                                                                    

मृच्छकटिकम्  रुपको के 10 प्रकारों में प्रकरण माना जाता है।                                                    

 मृच्छकटिकम् का नायक चारुदत्त एक दरिद्र ब्राह्मण है और गणिका वसन्तसेना नायिका है।                                                                        दोनो का निवासस्थान उज्ज़यिनी है।                                                                                    चारुदत्त का मित्र और प्रकरण का विदूषक मैत्रय है और चारुदत्त की सेविका का नाम रदनिका है।                                                                    प्रतिनायक शकार है जो राजा पालक का साला है।  वह वसन्तसेना को पाना चाहता है जबकि वसन्तसेना उसे पसन्द नही करती है।                                                                                 चारुदत्त की पत्नी धूता है जो इस प्रकरण की कुलजा नायिका है।                                              वसन्तसेना प्रथम अंक मे अपने आभूषणो को चारुदत्त के घर मे छिपाती है

तीसरे अंक मे शर्विलक नामक चौर आभूषणो को चुरा लेता है न्यास के रूप मे रखे आभूषणो के चोरी होने से दुःखी चारुदत्त को देखकर धूता पत्नी अपने रत्नावली आभूषण को वसन्तसेना के लिए देती है जिसे वसन्तसेना अस्वीकार करती है।रोहसेन चारुदत्त का पुत्र है जो स्वर्ण से बनी शकिटा (गाडी)  के लिए जिद करता है तो वसन्तसेना उसे अपने आभूषण गाडी बनाने के लिए देती है।                                                                                                                                                 मृच्छकटिकम्(Mrichchhkatikam)प्रकरण#शूद्रक                                                                                      कुमारसंभव महाकाव्य#कालिदास का कुमारसंभव                                                             

 मदनिका शर्विलक की प्रमिका हैऔर वसन्तसेना की सेविका है जिसे दासत्व से मुक्त करने के लिए शर्विलक चारुदत के यहाँ चोरी करता है।                                                                                 धूतकर  संवाहक  चारुदत्त का पुराना सेवक है जो चारुदत्त के निर्धन होने पर जुआरी बन जाता है   जुए में हारने पर वसंतसेना अपने आभूषणों को देकर उसे ऋण से मुक्त कराती है।                                       यह संवाहक बाद में बौद्ध भिक्षु बन जाता है जो   शकार द्वारा गला धोटकर मूर्छित वसन्तसेना के प्राणों की रक्षा करता है।शकार  वसंतसेना को मरी हुई समझकर उसकी मृत्यु का आरोप चारुदत्त पर लगाता है।

 शर्विलक के मित्र का नाम आर्यक है। जिसेेेे राजा पालक बंदी बनाता है। लेकिन वह कैद से छूट जाता है    राजा पालक को हराकर स्वयं राजा बनता है ।

 चारुदत्त  को वसंतसेना की  मृत्यु के अपराध में मृत्युदंड  की सजा सुनाई जाती है तब संवाहक वसंतसेना को लेकर उसी स्थान पर पहुंचता है जहां चारुदत्त्त को फांसी दी जा रही थी अंत में चारुदत्त  निर्दोष साबित होता है और शकार को दोषी  माना जाता है राजा आर्यक शकार को दंड देते हैं। लेकिन चारुदत्त उसे क्षमा कर देता है।   प्रकरण का सखद अंत होता है चारुदत्त और वसंतसेना का मिलन होता है  वसंतसेना को वधू शब्द से सुशोभित किया जाता है 

याद रखे 
  मृच्छकटिकम् का अंगी प्रधान रस -श्रॄंगार रस ।                            
 श्लोको की संख्या -380 ।                                 
प्राकृत भाषा के सात प्रकारों का प्रयोग हुआ है।    

 संस्कृत बोलने वाले पात्रों की कुल संख्या-6

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

Happy Teachers Day

 Happy Teachers Day 
कुछ लाइने अपने शिक्षको के लिए

मैं जहां में जिस मुकाम पर रहूँ एक बात
 हर पल दिलोजान से कहूँ.....                                                                                                                                   अगर नही होता आशीष तुम्हारा मेरे जीवन में।                          जीवन की धूुप छां बहुत सताती मुझे,                                     कैसे चल पाती मैं कांटो भरे वीरान पे
  धहक जाते मेरे सपने दुनिया की मतलबी आग में।                     बहक जाती मैं बेवजह की भागमभाग में

मै जहां मे जिस मुकाम पर रहूँ एक बात पूरे ईमान से कहू।

 तेरी हर सीख मेरे लिए दुआ बन गई।
   असल मे तेरे दिए हौसलो से अपनी कमियो से लड़ गई।
 तेरे ही शब्दों की ताकत मुझ में झलक गई।
   मेरे लिए तू शालीनता ,सहनशीलता और स्वाभिमान की
 जीती जागती बेमिसाल मूरत बन गई।
   मैं जहां में जिस मुकाम पर हूं 
तेरी खुशियों की प्रार्थना मेरे भगवान से करू।                                                                                                                                                                                                                                                
सभी शिक्षकों को मेरा सादर नमन👏👏👏👏                     



सोमवार, 2 सितंबर 2019

Golden quotes#सुविचार

नमस्कार आप सभी का स्वागत करती हूँ Sanskrit jeeva  पर जहाँ आपको संस्कृत विषय के साथ साथ कुछ Motivational dose भी मिलती है जो आपको Positivity se fulfil कर देगी मेरा  Motive आपकी Help करना है।                                                                                                              
आज की पोस्ट मे भी कुछ golden Words है जो  जिंदगी मे अभाव,  सपने,  हौसले आदि से संबंधित है                                                                                                                                                 
  मत डरिए जनाब अपनी जिंदगी के अभावो से क्यूकि कल जिनकी जिंदगी में अभाव बहुत थे आज जमाने मेउनका प्रभाव बहुत है।                             
golden quotes #सुविचार# अभाव
                                                    
   
सीख लीजिए है हुनर जिंदगी में रंग भरने का वरना कल भी गाते थे आज गा रहे और शायद कल भी गायेंगे मेरा जीवन कोरा कागज कोरा ही रह गया है।                 
golden quotes#सुविचार # Dream image
                   
 एक जगह रूक कर ठहर जाऊ मैं
 या सफर में चलता जाऊ मैं 
 जिंदगी नही मिलती बार बार । 
इसलिए जिदगी में बहुत कुछ कर गुजरना चाहूँ मैं।                                                                                                                                                 
धन्यवाद  फिर मिलेंगे कुछ अच्छे विचारो के साथ । जो हम सभी की Life Better कर सकने में मददगार हो ।                                                                          click here 
👉 Motivational words about future#success.                                              👉  Motivationallines  👉समय#motivational thoughts


शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

Golden quote#motivational words#Success#future

 Golden quotes#motivational words#Success#future                                       सुविचार                                                            
Golden quotes#सुविचार
Golden quotes

                                                              

😃  हर एक शब्द का मूल्य है आपके शब्द किसी में आस जगाते है तो बहुमूल्य बन जाते है आपके शब्द किसी को निराशा के सागर में डुबाने पर मूल्यहीन हो जाते है। स्वयं आप ही अपने शब्दो की कीमत तय करते है।                                                                                                                                               

😃 बहुत से ऐसे लोग है जिन्होने अपने प्रभावी शब्दो से शताब्दी बदल दी है जिनके शब्द कही गीता का गान बन गये है या महापुराण बन गये है अथवा कही विदुर नीति  या चाणक्य नीति का सार बन गए है।                                                                                                                       

😃 अनुभवो की पाठशाला में फीस बहुत महंगी होती है इसमें मजबूत इरादो का धनी बनकर ही प्रवेश ले ।                                                                                                                        

यदि आप सोचते है कि ईश्वर ने आप की किस्मत मे कुछ कम रख दी है फिर भी चिंतित होने की जरूरत नही है। हर इन्सान में ईश्वर ने ऐसी Quality दी है जिसकी बदौलत वह खुद किस्मत की कमियो को दूर कर उसे बेहतर कर सकता है अगर आप किस्मत और कर्म दोनो को मानते है तो निराश होने की कोई बात ही नही।                                                     

Golden quotes#motivational words#success#future
Future
                                                                             

  😃 जिंदगी के हर पल को जीना आदत बना लो वर्तमान अच्छा है तो भविष्य को बेहतर होने से कौन रोक सकता है।               
Golden quotes#motivational words
                                      Future                             
Read also👇

Motivational lines     

Thank for visiting  SANSKRIT JEEVA        

शनिवार, 17 अगस्त 2019

struggle #motivatonal thought on struggle

struggle motivational thought

 struggle  


struggle is a reality.       
                                                                                    यहाँ  नही मिलती facility.                                                                                                                            Life की नही  कोई validity.                                                                                                                     But every one has a speciality.                                                                                                      Every one wants Only security.                                                                                                     No one wants purity.                                                                                                                           

               
👉 Motivational lines✍️                            

सोमवार, 12 अगस्त 2019

Motivational lines

1.अपने आप से किया वादा और नेक इरादा हर हाल मे आपको जीत दिलाते है।                                                                                                                                                                                                                                                            2.आप के अन्दर जल रही कुछ करने की आग जमाने की हर बुराई को जलाकर राख कर देती है।                                                                                                                                                                         3 अपनी इच्छाओ को कब तक मारते रहोगे। मारना है तो मारिये अपने अन्दर पनप रहे खौफ को।।                                                                                                                                                                                           4.माना रास्ता लम्बा होतो ,थकान होती है।                                                                                                                                                                    लेकिन रास्तो से ही तो ,जीवन की पहचान होती है                                                                                                                                                                                                                                                   समझा गया था, फण्डा जिन्दगी का ।                                                                                                                                                                          तभी तो ,आज मुझे सामने खडा देख मंजिल भी हैरान होती है।
/>
Motivational#inspirational quotes
Motivational quote
                                                                     5.शुरुआत करने में झिझकते हो समय निकल जाये तो सिसकते हो।                                                               
Motivational quote
                                                                           दोस्तो मै उम्मीद करती हूँ  कि आप सभी को इन लाइनो मे    कुछ सच्चाई नजर आई होगी आप भी इन बातों से कहीं ना कहीं सहमत होंगे तो दोस्तों इसी तरह मोटिवेशनल थॉट्स के लिए हमारे इस blog पर आना नही भूले और मोटिवेशनल थॉट्स पढ़ते रहे।                                                                                                                                                                                                         यहाँsanskrit jeeva   पर" संस्कृत विषय" से संबंधित  परीक्षोपयोगी पोस्टे भी आपको पढ़ने को मिलेंगी                                                                                                    

गुरुवार, 8 अगस्त 2019

समय (Thoughts)

समय पर  Thoughts.#motivational                                                                                                                                                                                                                               
 1. परिणाम की चिंता तब होती है   ।                                                                                             
 जब चिंतन मे कमी होती है।                                                                                                                                                                                 

ना भूत का भय है न ही भविष्य तय है।                                                                                        

जीना है तो, जी लो इस पल क्योंकि वर्तमान की जय है।                                                                               
  2 समय गुजरता रहा पर मै चुनौतियो से आँख मिलाती रही ।                                                                                                                                                                       
समय पर  Thoughts With image #motivational
                                       समय                                                                                                         .
अब लगता है शायद वे ही शरमा कर पलट गई। 

मंगलवार, 6 अगस्त 2019

मनुस्मृति# सप्तम अध्याय#all sanskrit exam # मनुस्मृति के अनुसार राजव्यवस्था

  मनुस्मृति-- सप्तम अध्याय                                       
मनुस्मृति #सप्तम अध्याय
मनुस्मति का सप्तम अध्याय
                                            
                                                                                                                 मनुस्मृति के सप्तम अध्याय में राजा के कर्तव्यों का वर्णन करते हुए मनु कहते हैं कि राजा को हमेशा विनयशील रहना चाहिए।  विनय रहित होने के कारण अनेक राजा धन संपत्ति तथा कुटुंब सहित नष्ट हो गए थे तथा जंगलों में रहने वालों ने भी  विनयशील होने के कारण राज्यों को प्राप्त किया                                                                                          इस संबंध में उदाहरण देते हुए कहते हैं राजा वेन नहुष सुदास,निमि आदि  विनय शील नहीं होने के कारण नष्ट हो गए जबकि पृथु तथा मनु ने विनय के कारण राज्य को प्राप्त किया धनपति कुबेर ने विनय से धन ऐश्वर्य को तथा विश्वामित्र ने ब्राह्मणत्व को प्राप्त किया।                                                                                                                           राजा को जितेंद्रिय होना चाहिए मनु कहते है।कि राजा के लिए सभी विकारो से दूर रहना अनिवार्य है                                                                                                            काम और क्रोध से उत्पन्न व्यसनो के त्याग के संबंध में चर्चा करते हुए मनु कहते हैं कि कुल 18 व्यसन होते है।जिनमे से काम से उत्पन्न 10 व्यसन तथा क्रोध से उत्पन्न  8 व्यसन परिणाम में बहुत दुखदाई होते हैं अतः राजा को उन्हें प्रयत्नपूर्वक  त्याग देना चाहिए ।                                                                                                         काम से उत्पन्न 10 व्यसन कौनसे है ।                                                                                                     शिकार करना, जुआ खेलना ,दिन में सोना ,दूसरे की निंदा करना स्त्रियो मे आसक्ति,नशा करना, नाचना ,गाना ,बजाना ,व्यर्थ घूमना                                                                                                                                 क्रोध से उत्पन्न आठ व्यसन कौनसे है।                                                                                                     दूसरों की चुगली करना, दुस्साहस करना, द्रोह करना, ईर्ष्या करना,  दूसरों के गुणों में दोष निकालना दूसरे के धन का अपहरण करना, वाणी में कठोरता लाना, निरपराधी को मारना                                                                                                                                                    काम और क्रोध से उत्पन्न व्यसनों का मूल कारण लोभ को माना गया है इसलिए राजा  लोभ को जीते ।                                                                                                          व्यसन को मृत्यु से भी अधिक भयंकर बताया गया है क्योकि व्यसनी व्यक्ति मरकर नरक मे जाता है जबकि अव्यसनी मरने के पश्चात स्वर्ग मे जाता है।

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"> b>Read also  मनुस्मृति#सप्तम अध्याय#all sanskrit exam .                                                                                                                                               वैदिक साहित्य*अग्नि सूक्त *ऋग्वेद 1.1                                                                                                       इस प्रकार मनुस्मृति की दोनों पोस्टों में आपने  राजा के अधिकार और कर्तव्य के बारे में पढ़ा जिससे की राजव्यवस्था  सुव्यवस्थित हो।  राजा के अधिकार और कर्तव्यो का वर्णन ही मनुमृति के सप्तम अध्याय का मूल विषय है।

बुधवार, 31 जुलाई 2019

मनुस्मृति#सप्तम अध्याय #all sanskrit exam

    मनुस्मृति- सप्तम अध्याय।                                                                                                                मनु  ने  मनुस्मृति के सप्तम अध्याय में राजा के प्रभुत्व और उसकी राज व्यवस्था में दंड नीति की महत्ता ,काम,  क्रोध से उत्पन्न दोषो की चर्चा तथा राज्यव्यवथा  मे मंत्रियो  गुप्तचरो और दूतो की भूमिका का वर्णन किया है                                                                                                                                                                  मनुस्मृति के सप्तम अध्याय के अनुसार  राजा पृथ्वी पर ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। राजा मे 8 देवताओं का अंश माना गया है जिनमें यम कुबेर सूर्य अग्नि चंद्रमा कुबेर  इन्द्र,वरुण शामिल है।                                                                                                                                                                               इसमे बताया गया है कि  राजा के बालक होने पर भी उसका अपमान नहीं करना चाहिए क्योंकि वह पृथ्वी पर मनुष्य रूप में देवता होता है ।                                                                                                                   मनुस्मृति के अनुसार राजा के साथ अज्ञानता के कारण ईर्ष्याभाव नहीं रखना चाहिए।   क्योंकि जिसके प्रति वह कुपित होता है उसके विनाश का शीघ्र मन राजा बना लेता है है।                                                                                          मनुस्मृति में राजा की तुलना अग्नि से करते हुए कहा गया है कि जिस प्रकार लापरवाही करने पर अग्नि घर को नष्ट कर देती है उसी प्रकार राजा अपने विरोधियों का पशु,धनधान्य सहित सर्वनाश कर देता है                                                                                                                         जिस राजा की प्रसन्नता में कमलवासिनीलक्ष्मी का वास होताा है पराक्रम में विजय तथा क्रोध में मृत्यु का वास होताा है  वही राजा सभी प्रकार से तेजस्वी होता है।    दंड के संबंध में कहा गया है कि राजा के निमित्त तथा  सभी प्राणियों की  रक्षा करने वाले करने के लिए तेजमय तथा पुत्रतुल्य दंड को ईश्वर ने रचा है।                                                                                                                                      मनुस्मृति में दंड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा गया है कि दंड ही चारों आश्रमोंं के धर्म का प्रतिनिधि है ।दंड के कारण ही सभी प्राणी अपने अपने धर्म के अनुसार आचरण करते हैं दंड ही राजा है ,परम पुरुष है ,प्रजा पर शासन करनेे वाला है  राजा का कर्त्तव्य है कि है वह देश काल के अनुसार पूरी तरह विचार करते हुए अन्याय करने वालेे को उचित दंड दे                                                                                                              आगे दंड नीति की प्रयोग के परिणाम पर प्रकाश डालते हुए कहा गया है कि जो राजा दंड का प्रयोग नियम से सही ढंग से करता है वह धर्म धन तथा काम से वृद्धि पाता है  परंतु धर्म से पलायित राजा अपने कुटुंब सहित इससे नष्ट हो जाते है  तत्पश्चात  किला राष्ट्र तथा चराचर समस्त लोक का नाश कर डालता है तथा अन्तरिक्ष वासी मुनि और देवताओं को भी पीड़ित करता है दुःख पहुंचाता है।                                                                                                                इसलिए राजा को न्याय पूर्वक व्यवहार करना चाहिए जो राजा न्याय का पोषक होता है ।उस राजा की यश पताका  इस लोक में जल मेंं तेल  के बिंदुु की  भाँति फैलती है।                                                                                                         जो राजा न्याय का पोषण नही करता है तथा अपने हृदय के अधीन नहीं रहता है    उसका यश संसार मे जल मे गिरी हुई तेल की बूँदो की तरह  सिकुड जाता है।                                                                                                      शेष विषयो के बारे अगली पोस्ट में चर्चा करेंगे ।                                                                                                                      please like share and comments                                                                                                                                                                    धन्यवाद आप सभी का ।  

शनिवार, 20 जुलाई 2019

शिक्षा पर विचार (Quotes)

Shiksha kya hai 
Quotes on education (shiksha)
Shiksha kya hai
                                                                     
Quotes on education
quotes on education