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  मूकता की जंजींरें तोड़ जो कुछ समय पूर्व मै  मुखरता की सीढ़ी चढ़ने लगा। बुनने लगा स्वप्न सजीले जो बंद थे ह्रदय के किसी कोने में  इन सपनों की तस्वीर लिए सजाने कोई नया आशियाना  अपनी ही मस्ती में चलता रहा नयी उमंग लिए।  माना कि मेरे सामने मंजिल का हसीन मंजर था  लेकिन सफर में अभी जगह-जगह बहुत बंजर था  चेहर पर थी मुस्कान अमिट लेकिन चुनौतियों का खंजर था                                                      इकतरफा बढ़ने लगा लगाव अपनी ख्वाहिशों का  लेकिन सशक्त हुआ प्रभाव समय की साजिशो का    प्रतिकूलता की रस्साकशी मुझे खींचने लगी अपनी ओर  छूटने लगी मेरी बंद मुट्ठी से मेरे सजीले सपनों की डोर  घर करने लगा डर अब ह्रदय के उस कोने में  जहाँ से निकाली थी मैने सपनों की तस्वीर   लेकर चला था उसे मनचाहे रंगों से भरने  अपनी मूकता को जो मैने अभी मुखर किया था  क्या समय की विमुखता में बँध जायेंगे म...
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एक स्त्री होना सहज नही

शीर्षक = एक स्त्री होना सहज नही एक स्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई। किसी के अंगना पली बढ़ी किसी के और के लिए हुई विदाई। एक स्त्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई। खुश हूँ खुश हूँ कहते हुए न जाने कल आँखों में दिखी ललाई। एक स्त्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई । कहने को दो परिवार मेरे फिर क्यों महसूस होने लगी पराई। एक स्त्री होना सहज नही आजपहले से बेहतर जान पाई।  कुछ भी तो नया नही है पगली यह रीत जगत की चली आई। एक स्त्री होना सहज नही आज पहले से बेहतर जान पाई। कब तक तू मापती रहेगी अपनी दूसरे की नजरों में गहराई।   ×××××××××××××××××××××××××××××××××××××××

आज के परिपेक्ष मे जीवन

  आज के परिपेक्ष मे जीवन  आज के समय में जीवन जीना बहुत ही कठिन सा हो गया है सभी की कोई ना कोई अपनी ही समस्या है। कोई समस्या का हल निकाल लेता है, कोई इस ऊहापोह में रहता है की ठीक है जो होगा देखा जाएगा। लेकिन सच में आज के इस समय में समस्या का हल निकलपाना  बहुत ही कठिन सा कार्य हो गया है। पुरानी कहावत है ना  कोई तन दुखी तो कोई मन दुखी  किसी को शिक्षा नहीं , शिक्षा है तो रोज़गार नहीं रोज़गार है तो पारिवारिक परिस्थिति अनुकूल नहीं सब सही तो कार्यक्षेत्र में कुछ परेशानी है लेकिन सच यही है......... संघर्ष करते रहना ही जीवन है, बिना संघर्ष के जीवन जीना आसान नहीं है. ✍️शोभा शर्मा

बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ/बसंत पंचमी विशेष✍️📗📗📒📒📚

 मेरे हर शब्द में तू समाहित माँ  तेरी कृपा बिन न मैं कलम उठा पाती  न ही दो शब्द भी लिख पाती। तेरी इस असीमकृपा को मेरा अनन्त वंदन है। तूने मुझे बना दिया माटी से चंदन है।  तेरी कृपा से ही यह सृष्टि मानो जीवंत है। तेरे प्रेम से ही हर जीवन में छाया वसंत है। आज खिली फूलों की हर डाली तेरे स्वागत में झूम रही है। बहती मंद मंद बयार तेरे पावन चरणों को चूम रही है। तेरी ही अपार महिमा से एक अनोखी धुन सृष्टि का हर कण गा रहा है। माँ तेरी दिव्य ज्योति से ही यह जहां शोभायमान हो रहा है। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ....✍️ 🙏💐💐

हूँ कुदरत का अभिन्न रूप मैं

 कभी सूर्य सा तेज बन तमस को हर लेता हूँ। कभी चंचल मेघ बन बंजर धरा पर बरस लेता हूँ। कभी शीतल पवन बन फिजाओं को महका देता हूँ। कभी अविरल सलिल बन रास्ता बना लेता हूँ। कभी बन आकाश सा अनंत गंभीर मैं हर शब्द में सुनाई देता हूँ। हूँ कुदरत का अभिन्न रूप मैं, करिश्में सा दिखाई देता हूँ। कविता= हूँ कुदरत का अभिन्न रूप मैं https://notionpress.com/read/shobha-srisht

गुरु कौन है?/गुरु का जीवन में महत्त्व/गुरु पूर्णिमा विशेष

 जहाँ से आपको ज्ञान मिले, जो आपको अपने सपनो के करीब ले जाये,जो आपको अपने आप से रुबरू करवाये,आपके जीवन में छाये अँधकार को छाँटकर जीवन में एक नई रोशनी भर दे........उसी का नाम है गुरु जरुरी नही जिसने आपको कुछ किताबें पढा़कर स्कूल,काँलेज में आपको अच्छे अंक लाने में मदद की हो,या फिर जिसने गुरु मंत्र दिया हो जिसे आप सुबह शाम मनके से जाप करते हो उसे ही गुरु कहा जाये.. सृष्टि में व्याप्त चेतन-अचेतन कुछ भी जो आपके ह्रदय में उससे मिली किसी प्रेरणा के प्रति आस्थावान बना दे, उसके प्रति सच्चे सम्मान के भाव जाग्रत करे , भटके जीवन को एक राह दिखाये जिसकी तलाश में आप न जाने कब से थे, आपके अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर जानने में आपकी मदद करे......सच्चे अर्थो में वही गुरु है......यदि इन अर्थों में देखा जाये तो गुरु को किसी सीमा में नही बाँधा जा सकता है। जिस प्रकार ज्ञान असीमित है उसी प्रकार गुरु की परिभाषा असीमित है ज्ञान अनन्त है उसी प्रकार गुरु की महिमा भी अनन्त है........ ये सिर्फ और सिर्फ आपकी आस्था पर निर्भर है कि आप किसे गुरु की श्रेणी में रखते है....एक शिशुसे लेकर वृद्ध तक, चेतन से लेकर अचेतन तक ग...

Monday motivation#Today motivation

 1)किसी भी हाल में हालात आपके मनोबल से बडे़ नही है। किसी को हक नही जो आपके मनोबल को गिराये न ही आपको हक है कि आप किसी के मनोबल को गिराये 2)जो चाहता बाँटना मुस्कुराहटे जमाने को उसका मुस्कुराहट रूपी तिजोरी कभी खाली नही होती 3)कभी कोई आपके लिए खुदा तो  कभी आप किसी के लिए खुदा होते हो  क्यूकि आसपास है खुदा 4)कोई स्वार्थ के तराजू में आपके प्रेम को तौलने की     कोशिशकरे इससे पहले उससे बाहर निकल जाना ही बेहतर है। कविता =फरिश्तें विशेष=आप सभी को योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ..✍️🙏🙏 धन्यवाद🙏