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मार्च, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कोरोना रूपी राक्षस से रण #कोरोना पर कविता #corona#lockdown

कविता का शीर्षक-"नही छोडेंगे इस रणको बीच मेंअधूरा   नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच मे अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।  यहाँ न किसी धर्म,जाति,संप्रदाय,  अमीर,गरीबी का कवच काम नहीं आएगा  यह रण तो हमारी एकता की मिसाल बन जाएगा । नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।   यहां काम नहीं आएगी कोई राजनीतिक घृणा  यह रण तो राजनीति के दलदल से दूर ले जाएगा। नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।   यहां काम नहीं आएगी आरोप-प्रत्यारोपो की झड़ी   यह रण तो भाईचारे और परोपकार से जीता जाएगा।  नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा   सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा   न हीं चलेगी यहां तलवारे,न ही धनुष बाण चलेंगे   न ही गिरने देंगे लहू की एक बूंद इस धरा पर  यह रण तो इंसानियत की कसौटी पर लड़ा जाएगा।  नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा   सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।  न हीं कर पाएगा अपनों को अपनों से दूर  यह रण तो...

सुविचार#शब्दो की ताकत#golden lines in hindi#motivation

दोस्तों में कोई दार्शनिक नहीं हूँ न ही कोई कवि और न ही महान लेखक हूं बस अपने दिल में उठ रही भावनाओं को कलम के माध्यम से कागज पर कभी कभार उतार देती हूं मुझे अपने अनुभवों को साझा करने में संतुष्टि का अहसास होता है यही मेरे लिए बहुत है। १. अगर भावो की गहराई समझ मे आ रही हो तो शब्दो कोष का गहरा होना  आवश्यक नही २. आपका एक एक अक्षर दिव्य हो जाता है यदि वह किसी के अंदर छाए तिमिर की परतो को खोलकर उसके सच्चे स्वभाव को सामने लाने में मदद करता है।  ३आपके शब्दों को किसी के लिए वेदना नही, प्रेरणा बनाइए  ४आपकी शब्दों में छुपे हुए भावनाओं की की कीमत ही है कि किसी के शब्द दवा बन जाते हैं क्यों किसी के शब्द केवल हवा बन जाते हैं।  दोस्तों यदि आपको ये विचार अच्छे लगे हो तो लाइक करें और अपने दोस्तों को शेयर करें। धन्यवाद

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लोकायत दर्शन#चार्वाक दर्शन#बार्हस्पति  दर्शन से सम्बन्धित तथ्य चार्वाक दर्शन के संस्थापक बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए इसे बार्हस्पति दर्शन भी कहते है। इसी का प्राचीन नाम लोकायत दर्शन है। चार्वाक दर्शन सुख को ही जीवन का परम उद्देश्य मानता है।  यह भौतिकता वादी दर्शन है जो वेदों की निंदा करता है। यह अग्निहोत्र और श्राद्ध का निषेध करता है चार्वाक दर्शन की दृष्टि में प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है। चार्वाक दर्शन  ईश्वर और आत्मा का निषेध मानता है। चार्वाक दर्शन काम को ही एकमात्र पुरुषार्थ मानता है  चार्वाक दर्शन की दृष्टि में मृत्यु ही मोक्ष है। चार्वाक दर्शन चार तत्वों को मानता है।👉 पृथ्वी जल तेज वायु यह आकाश को तत्व नहीं मानता है। चार्वाक दर्शन के सिद्धान्त   प्रत्यक्ष प्रमाणवाद - चार्वाक दर्शन प्रत्यक्ष दिखाई देने वाली वस्तुओं को ही अंतिम सत्य मानता है यह अनुमान शब्द आदि प्रमाणो को नहीं मानता है।   भौतिकतावा द    - यह सांसारिक वस्तुओं को अत्यधिक महत्व देता है भूत चैतन्य वाद  - पृथ्वी जल तेज...

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sanskrit exam 1⃣मनुस्मृति के अनुसार क्रोध से उत्पन्न होने वाले  दोषो  की संख्या कितनी है?  ✔️ 8 ✏️दूसरों की चुगली करना, दुस्साहस करना, द्रोह करना, ईर्ष्या करना,  दूसरों के गुणों में दोष निकालना दूसरे के धन का अपहरण करना, वाणी में कठोरता लाना, निरपराधी को मारना      2⃣ मनुस्मृति के अनुसार काम से उत्पन्न होने वाले दोषों की संख्या कितनी है? ✔️ 10 ✏️शिकार करना, जुआ खेलना ,दिन में सोना ,दूसरे की निंदा करना स्त्रियो मे आसक्ति,नशा करना, नाचना ,गाना ,बजाना ,व्यर्थ घूमना       3⃣ काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले दोषों का मूल कारण क्या है?  ✔️ लोभ 4⃣संकेत ग्रह के कितने साधन बताए गए हैं ✔️8 5⃣शूद्रक द्वारा रचित मृच्छकटिकम् प्रकरण मे संस्कृत बोलने वाले  पात्रों की संख्या है ? ✔️ ६ 6⃣स्वल्पोछिष्टस्तु तद्हेतु़....... विस्तार्यनेकधा: । रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए?   ✔️बीजं ✏️ दशरूपककार धनञ्जय ने अपनी रचना दशरूपक मे  पाँच अर्थप्रकतियाँ बताई है    बीजं,   बिंदु, पताका, प्रकरी और का...

मृच्छकटिकम् (प्रकरण) # संस्कृत साहित्य में शूद्रक की रचना#mrichchhakatikam

मच्छकटिकम् प्रकरण के सम्बन्ध में सामान्य तथ्य  रचयिता---शूद्रक,  अंक-10,  रस-श्रृंगार, नायक-चारुदत्त(एक निर्धन ब्राह्मण)  , नायिका --वसन्तसेना (एक गणिका)  चारुदत्त की पत्नी-धूता,  चारुदत्त का पुत्र- रोहसेन,  प्रतिनायक--शकार ,प्रकरण के नामकरण का आधार----** षष्ठ अंक **********                                              प्रकरण के प्रत्येक अंक का शीर्षक इस प्रकार है---------- प्रथम अंक--अलंकार न्यास, द्वितीय अंक---धूतकर -संवाहक , तृतीय अंक----सन्धिच्छेद, चतुर्थ अंक---मदनिका-शर्विलक     पंचम अंक----दुर्दिन,  षष्ठ अंक---प्रवहण-विपर्यय,   सप्तम अंक--- आर्यकापहरण   अष्टम अंक---वसन्तसेना मोचन ,नवम अंक---व्यवहार, दशम अंक---संहार(उपसंहार)  मच्छकटिकम् (mrichchhakatikam) से संबंधित अन्य पोस्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें    मृच्छकटिकम् प्रकरण#mrichchhkatikam# संस्क...