कविता का शीर्षक-"नही छोडेंगे इस रणको बीच मेंअधूरा नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच मे अधूरा सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा। यहाँ न किसी धर्म,जाति,संप्रदाय, अमीर,गरीबी का कवच काम नहीं आएगा यह रण तो हमारी एकता की मिसाल बन जाएगा । नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा। यहां काम नहीं आएगी कोई राजनीतिक घृणा यह रण तो राजनीति के दलदल से दूर ले जाएगा। नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा । यहां काम नहीं आएगी आरोप-प्रत्यारोपो की झड़ी यह रण तो भाईचारे और परोपकार से जीता जाएगा। नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा न हीं चलेगी यहां तलवारे,न ही धनुष बाण चलेंगे न ही गिरने देंगे लहू की एक बूंद इस धरा पर यह रण तो इंसानियत की कसौटी पर लड़ा जाएगा। नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा । न हीं कर पाएगा अपनों को अपनों से दूर यह रण तो...
Shobha Srishti यह" संस्कृत विषय एवं प्रेरणासम्बंधित ब्लॉग है, Motivational and Education Category blog