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जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वेणीसंहार(संस्कृत नाटक) , भट्टनारायण की कृति

वेणीसंहार नाटक का परिचय : वेणीसंहार संस्कृत साहित्य का एक प्रसिद्ध नाटक है जिसके नाटककार भट्टनारायण है इस नाटक में सर्गों की संख्या 6है।इस नाटक का प्रमुख उद्देश्य दुर्योधन के रक्त से द्रौपदी की वेणी संवारना है।      नाटक का नायक- भीमसेन अथवा युधिष्ठिर में से ।इस नाटक का नायक कौन है?इस प्रश्न के जवाब में विद्वानो के मत में एकरूपता नही है।                                           भीमसेन को नाटक का नायक मानने वालो का तर्क है कि इस नाटक का उ्देश्य दुर्योधन का वध है ताकि द्रौपदी कि दुर्योधन के रक्त से द्रौपदी की वेणी (चोटी)बाँध सके।भीमसेन ने भी धूतसभा में द्रौपदी के अपमान का बदला लेने के लिए दुर्योधन का वध करने की प्रतिज्ञा की थी।              इन दोनो प्रतिज्ञाओ को भीमसेन ने पूर्ण किया अत:भीमसेन को इस नाटक का नायक मानना ही उपयुक्त है ।                        ...

महात्मा विदुर कीनीति, विदुरनीति (उद्योग पर्व)#vidurneeti

नमस्कार आप सभी का फिर से Welcome है संस्कृत के अनमोल साहित्य ,साहित्यकारो ,संस्कृत व्याकरण की जानकारी आप तक पहुचाने वाले " Sankrit jeeva " Blog पर                  />                                                                                                                                   आज हम महाभारत के महान चरित्र के रूप मे पहचाने जाने वाले नीति के वेत्ता ,धर्मनिष्ठ,सत्यभाषी महात्मा " विदुर " का चरित्र,  उनके द्वारा बताई गई " नीति " के बारे में जानेंगे                                          ...

काव्य के लक्षण क्या है? (Kavya)

  काव्य क्या है?   " काव्य  "कला का वह सर्वोत्कृष्ट रूप है जो जीवन को सौन्दर्य से भर देता है" काव्य " में शब्दो की रमणीयता और अर्थ की अनुकूलता  पायी जाती है अलंकार की शोभा, गुणो की विशिष्टता पायी जाती है।"  काव्य  "वह उत्तम औषधि है जो निरन्तर सेवन करने पर सभी शारीरिक और मानसिक रोगो को दूर करने में समर्थ है ।                                                           काव्यकारो ने अपने काव्य के प्रारम्भ में " काव्य के लक्षण" दिए है संस्कृत भाषा में अनेक काव्यशास्त्रीय ग्रंथ है जिसमें काव्य के लक्षण दिए गये है                                                                                  ...

कुमारसम्भव महाकाव्य की प्रसिद्ध सूक्तियाँ

महाकवि कालिदास ने अपने महाकाव्य कुमारसम्भव में बहुत ही सुन्दर सूक्तियो का प्रयोग किया है जो उनके महाकाव्य की शोभा को बढा़कर दुगुना करने में सफल रही है उनके द्वारा तपस्या करती पार्वती के मुख से जो कहलवाया गया है वह उनकी वाक्पटुता का साक्षी है, पार्वती की परीक्षा लेने आए ब्रह्मचारी रूप में शिव के माध्यम से जो कथन कहे गए है वह महाकवि कालिदास की विदत्ता के पर्याय है।                                              यह भी पढ़े    संस्कृत नाट्य साहित्य में कालीदास का स्थान**                                                                                                                   ...

सांख्यदर्शन में मोक्ष, जीवन्मुक्त और विदेहमुक्त क्या है

सांख्य के अनुसार कैवल्य/अपवर्ग या मोक्ष             सांसारिक जीवन केआध्यात्मिक,आधिभौतिक,आधिदैविक त्रिविध दु:खो की आत्यान्तिक निवृत्ति ही मोक्ष,अपवर्ग,कैवल्य है।                                                                                                              मोक्ष में पुरुष अपने नित्य शुद्ध चैतन्य स्वरूप में प्रकाशित रहता है। पुरुष त्रिगुणातीत,बन्धन रहित और परिणामातीत है बन्धन इस जीव का होता है शुद्ध पुरुष का नही ।पुरुष को अपने स्वरूप का ज्ञान स्वयं को अचेतन प्रकृति से भिन्न मान लेने पर होता है यह विवेक ज्ञान ही सांख्यदर्शन में मोक्ष /अपवर्ग या कैवल्य है।                                ...

उपनिषद (Upnishad) -परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्त्वपूर्ण प्रश्न

/> Happy  New  Year  To  All                                                                                                                                                                                                  SANSKRIT JEEVA   yah blog  maine 2018 me kuChh hi mahine pahle start kiya tha.  ab hum sabhi 2019 ka welcom kar rahe hai . hum sabhi ki god se yahi pray hai ki sabhi ke liye yah varsh  shubh ho,sabhi apne  life ke goal ko achieve kate,  ...