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कविता-उडान#poem#motivational

  अगर खुले आसमां में उडने को है बेकरार फिर उडने को कर हौसलो के पंखो को तैयार रंग बिरंगे खगो की उडान को निहार तू समाज की जंजीरो से मुक्त होकर भर दिल से गहरी (ऊँची)उडान तू जीवन को बना ले एक खुला आसमान  इंद्रधनुषी होगी देख फिर तेरी देख शान उडान हे कृष्ण.....मुझे अर्जुन बना दीजिए सुविचार-शब्दों की ताकत#प्रेरणास्पद दोस्ती#dosti#friendship

संस्कृत साहित्य के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर(rpsc collage lecturer#net#set

 1.विश्वनाथ के मत में काव्य की सिद्धि किस से होती है? -रस से विश्वनाथ के अनुसार "वाक्यं रसात्मकं काव्यम्" अर्थात रसात्मक वाक्य ही काव्य है। 2.विश्वनाथ ने किन किन के काव्य लक्षणों का खंडन किया? -मम्मट,कुन्तक,भोज,आनन्दवर्धन,वामन 3.काव्यलक्षणो का खंडण करते हुए आचार्य विश्वनाथ "स्ववचनविरोधाद् अपास्तम्" यह किसके संबंध में कहते है? --आनन्दवर्धन  4आनन्दवर्धन ने काव्य का महत्त्वपूर्ण तत्त्व किसे  माना है? -ध्वनि को 5.योग्यताकांक्षासत्तियुक्तः पदोच्चय क्या कहलाता है? -वाक्य योग्यता, आकांक्षा और आसक्ति से युक्त पद ही वाक्य है।  6. साहित्य दर्पण में काव्य प्रयोजन बताया गया है? -चतुर्वर्गफलप्राप्ति 7.अद्भुत रस मे कौनसा स्थायी भाव है? -विस्मय 8."अवस्थानुकृतिर्नाट्यम्" नाटय का यह लक्षण किसने दिया है? - धनञ्जय ने धनञ्जय ने अपने काव्यशास्त्रीय ग्रंथ"दशरूपक"में नाटक का लक्षण इस प्रकार किया है " अवस्थानुकृतिर्नाट्यम् रूपं दृश्यतयोच्यते। रूपकं तत्समारोपात् दशधैव रसाश्रयम्।। 9.नमस्तस्मै गणेशाय यत्कण्ठःपुष्करायते। यदाभोगघन ध्वनो नीलकण्ठस्य ताण्डवे।। यह मंगलाचारण...

तर्कभाषा#षड्विध सन्निकर्ष#न्याय दर्शन

प्रश्न१ प्रत्यक्ष प्रमाण किसे कहते है? "तत्र प्रत्यक्षज्ञानकरणं प्रत्यक्षम्" प्रत्यक्ष ज्ञान या प्रमा का जो असाधारण कारण है वह ही प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रश्न२ अब प्रश्न उठता है कि प्रत्यक्ष प्रमा क्या है? "इन्द्रियार्थ सन्निकर्षजन्यं ज्ञानं प्रत्यक्षम्" अपने विषय के साथ इन्द्रियों का सामीप्य संबंध होने पर उससे जो ज्ञान उत्पन्न होता है।वह प्रत्यक्ष कहलाता है। प्रत्यक्ष प्रमा के दो भेद है- निर्विकल्पक ज्ञान सविकल्पक ज्ञान प्रत्यक्ष ज्ञान(प्रमा) का कारण इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष( इन्द्रियो का अपने विषयो से संयोग अर्थात समीपता) है। प्रश्न३  इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष कितने प्रकार का है? इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष के छः भेद है 1.संयोग सन्निकर्ष = जब इन्द्रिय का किसी वस्तु से संयोग होता है तो उसे संयोग सन्निकर्ष होता है।जैसे आँख द्वारा घडे़ को देखना 2.संयुक्त समवाय= जब आँख द्वारा घडे़ का ज्ञान होता है उसके पश्चात उसमे शुक्ल,रक्त,पीत जैसे रंग का भी ज्ञान होता है तो वहाँ संयुक्त समवाय होता है। संयुक्त समवाय में वस्तु के गुणो का प्रत्यक्ष होता है। 3.संयुक्त समवेत समवाय- जब वस्तु  से स...