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नवंबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संस्कृत साहित्य प्रश्नोत्तरी

परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण प्रश्न संस्कृत साहित्य प्रश्नोत्तरी ----------                           प्रतिमानाटक का कथानक लिया गयाहै?                              रामायण से                                                                                                                                                       "मितं च सारं च वचो हि वाग्मिता" यह पंक्ति उद्धृत है?              नैषधीयचरित महाकाव्य से    ...

"अभिज्ञान-शाकुन्तलम्" नाटक के" पंचम सर्ग" की कथावस्तु-------महाकवि कालिदास

b> " अभिज्ञान-शाकुन्तलम्" नाटक के" पंचम सर्ग" की कथावस्तु--- ----------शार्ड्गरव,शारद्वत और गौतमी शकुंतला को लेकर हस्तिनापुर राजा दुष्यन्त के पास पहुंचते हैं।राजा के आदेशानुसार वे महल में प्रवेश करते हैं।राजा दुष्यंत उनका अभिनंदन करते हैं उसके पश्चात शार्ड़्गरव ने निवेदन किया कि आप ने कण्व द्वारा पालित उनकी पुत्री शकुन्तला के साथ गांधर्व विवाह किया था उसे ऋषि कण्व ने स्वीकार कर लिया है। इस समय शकुंतला गर्भवती हैं इसलिए  कणव ने इसे आप के पास भेजा है इस संदर्भ में शार्ड़्गरव विवाहित स्त्री के संबंध में लोक व्यवहार का वर्णन करते हुए कहता है विवाहित स्त्री भले ही वह श्रेष्ठ चरित्र वाली क्यों न हो किन्तु वह सदैव अपने पिता के घर में रहती है तो उसके संबंध में लोग अनेक प्रकार की आशंका करने लगते हैं अतः बधू के बंधुजन विवाहित स्त्री को उसके पति के पास ही रखना चाहते हैं अतः आप इसे स्वीकार कीजिये ।लेकिन राजा दुष्यंत दुर्वासा के साथ के प्रभाव के कारण पूर्व में  शकुंतला के साथ विवाह की घटना को पूर्ण रूप से भूला चुके थे इस कारण वह शकुन्तला को अपनी पत्नी मानने से इनकार कर देते ...

"शुकनासोपदेश" कादम्बरी का महत्त्वपूर्ण अंश (पार्ट -1)

"शुकनासोपदेश कादम्बरी का महत्त्वपूर्ण अंश":- शुकनासोपदेश कादम्बरी कथा का एक अत्यंत भव्य अंश  है, जो  बाणभट्ट की उद्दात कल्पना ,उनकी वर्णन शक्ति और राजसभाओ के जीवन के उनके अनुभव काप्रत्यक्ष प्रमाण है।                                                                                    बाणभट्ट द्वारा रचित कादम्बरी की कथा में उज्जयिनी के राजा  तारापीड़  के मंत्री  शुकनास द्वारा  तारापीड़ के पुत्र चन्द्रापीड़ को   युवराज बनने के अवसर पर युवावस्था, राजलक्ष्मी अादि से उत्पन्न दोषो से दूर रहने का जो सारगर्भित उपदेश दिया गया, वही शुकनासोपदेश है  जो बहुत ही शिक्षाप्रद है।                                                    ...

"किरातार्जुनीयम् महाकाव्य" के "प्रथम सर्ग" के प्रश्नोत्तर

"किरातार्जुनीयम् महाकाव्य" का" प्रथम सर्ग"------भारवि द्वारा रचित"   किरातार्जुनीयम्" महाकाव्य में कुल** 18**            सर्ग है  जिसमें प्रथम सर्ग का अपना विशिष्ट महत्त्व है। इस सर्ग में एक किरात या वनेचर का उल्लेख प्राप्त होता है जिसे धर्मराज युधिष्ठिर अपना गुप्तचर बनाकर दुर्योधन की शासन व्यवस्था का ज्ञान प्राप्त करने के लिए दुर्योधन के समीप हस्तिनापुर भेजते है,  वह एक ब्रह्मचारी का वेष बनाकर जाता है,ताकि कोई उसे पहचान न ले ।वह दुर्योधन कि शासन व्यवस्था के संबंध में जानकर द्वैतवन में वापस लौटता है ,जहाँ युधिष्ठिर अपने सभी भाईयो तथा अपनी पत्नी द्रौपदी सहित वनवास का समय व्यतीत कर रहे थे वह वहाँ आकर दुर्योधन के शासन संचालन की प्रशंसा करता है वह विना किसी भय के वास्तविक सूचना युधिष्ठिर को देना अपना कर्तव्य मानता है  जिससे प्रभावित होकर  युधिष्ठिर उसे पारितोषिक प्रदान करता है  यह  घटना प्रथम सर्ग में वर्णित है।                              ...

"भारवे: अर्थगौरवम्" किरातार्जुनीयम् का प्रथम सर्ग

भारवे: अर्थगौरवम्---"भारवेरर्थगौरवम्" यह उक्ति संस्कृत साहित्य रूपी जगत में महाकवि भारवि की काव्य शैली को वैशिष्टय प्रदान करती है।जिसका अर्थ है स्वल्प शब्दों द्वारा गंभीर भावों की अभिव्यक्ति                          भारवि से पूर्ववर्ती कवियों में भावपक्ष अथवा  रसनिरुपण के प्रतिअधिक रुचि थी लेकिन भारवि के युग में कविता में कला पक्ष के प्रति अभिरुचि बढ़ने लगी ।इस प्रकार स्पष्ट रूप से भारवि कला पक्ष के कवि माने जाते है वे अलंकृत काल के प्रवर्तक महाकवि  है उनका सर्वाधिक ध्यान अर्थगाम्भीर्य पर रहा है यही कारण है कि उनके सम्बन्ध में "भारवेरर्थगौरवम्"इस उक्ति को प्रसिद्धि प्राप्त हुई है।                                               मल्लिनाथ नेभारवि के वचन को" नारिकेलफलसम्मित"  तथा" रसगर्भनिर्भरसार" बताया है  जिसका तात्पर्य है कि वे बाहर से नारियल के समान कठोर और अन्दर से   मुलायम एवम्...

बाणभट्ट की कादम्बरी

बाणभट्ट कृत" कादम्बरी "--*कादम्बरी* बाण भट्ट का ही नहीं अपितु संपूर्ण संस्कृत साहित्य का सर्वोत्कृष्ट गद्य काव्य है।इसकी कथा काल्पनिक है इसके दो भाग हैं पूर्व भाग और उत्तर भाग। पूर्व भाग की रचना स्वयं बाणभट्ट ने की थी। उत्तर भाग की रचना उनकी मृत्यु के पश्चात  उनके पुत्र पुलिंद भट्ट अथवा भूषण भट्ट द्वारा की हुई मानी जाती है।                                           कादम्बरी  के संबंध में   महत्त्वपूर्ण प्रश्न इस प्रकार है   कादम्बरी के महत्त्वपूर्ण प्रश्न        1   संस्कृत गद्य काव्य कासर्वश्रेष्ठ काव्य कौन सा है ---कादम्बरी                                                           2.कादम्बरी किस श्रेणी का काव्य हैं ?--------कथा  श्रेणी का       ...

अग्नि सूक्त, विष्णु सूक्त ,इन्द्र सूक्त के महत्वपूर्ण प्रश्न

महत्त्वपूर्ण प्रश्न----------------------------------------------    (1).अग्नि सूक्त का छंद है?-------गायत्री छंद     (2)इंद्र सूक्त का छंद है?----त्रिष्टुप छंद    (3)विष्णु सूक्त का छंद है?------त्रिष्टुप छंद    (4)विष्णु शब्द का अर्थ है?---तीनो लोको को प्रकाशित करने वाला अथवा व्यापक   (5)'त्रिविक्रम 'शब्द प्रयुक्त है--विष्णु देव के लिए   (6)उरुक्रम और उरुगाय विशेषण किस देवता के लिए प्रयुक्त हुआ है ----- विष्णु के लिए    (7)परम पद के अधिष्ठाता के रूप में माने जाने वाले देवता है  ----विष्णु    (8)पुराणों के अनुसार किसके लोक को गोलोक कहते है?----विष्णु लोक को    (9)तीन प्रकार से अथवा तीन पग में ब्रह्मांड को नापने वाले देव हैं?----विष्णु        (10)प्रथम मण्डल के 154 वे सूक्त में किसकी स्तुति है?---विष्णु देवता की      (11)प्रथम मंडल के154वे सूक्त में कितने मंत्रों में विष्णु देवता की स्तुति की गई है?-----6मंत्रों में...

संस्कृत साहित्य के महत्वपूर्ण प्रश्न ,प्रतियोगी परीक्षाओ में आने वाले प्रश्न

संस्कृत साहित्य के महत्वपूर्ण प्रश्न-------------                                                                         "ईशवास्योपनिषद्" किस वेद का उपनिषद है?              शुक्लयजुर्वेद                                                                                                                                       वेद में सबसे अधिक सूक्तों  में किस देवता की स्तुति की गई है  ?            ...

गीता का द्वितीय अध्याय,महत्त्वपूर्ण प्रश्न

1गीता के द्वितीय अध्याय में कुल श्लोक कितने हैं ----72 श्लोक    2.गीता की द्वितीय अध्याय में वर्णित विषय है?-- --सांख्य योग   गीता का द्वितीय अध्याय,महत्त्वपूर्ण प्रश्न  3.गीता में देही शब्द का अर्थ है?--आत्मा    4.गीता के अनुसार सुख दुःख की अनुभूति होती है ?-- शरीर को    5.गीता के अनुसार किस का अभाव नहीं होता है ?--सत का    6."नायं हन्ति न हन्यते"यह किसके लिए कहा गया है---आत्मा के लिए  7."अजो नित्य शाश्वतो अयं पुराणो"यह विशेषण गीता में किसके लिए आया है?----आत्मा के लिए     8.आत्मा को "स्थाणु" बताया गया है क्योंकि?----क्योंकि आत्मा अविकारी है।    9.पंच भूतात्मक शरीर जन्म से पूर्व किस रुप में रहता है?----अव्यक्त रूप में                 10.अच्छेद्य,अदाह्य,अक्लेद्य,अशोष्य ये  सभी विशेषण इसके लिए प्रयुक्त हुए हैं ?----आत्मा के लिए                 11. गीता में धर्म यु...