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Dosti#poem#दोस्ती

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दोस्ती ईश्वर का कितना अनमोल तोहफा है।  इसकी कीमत आपका दिल जानता है। Dosti#दोस्ती

आज का विचार#Today thought#motivational thought#zindagi

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Motivational poem#zindagi#quotes

  जिंदगी में बहुत कुछ सीखा है लेकिन अभी और सीखना बाकी है।  बहुत तप  चुके अन्दर से हम अब शायद निखरना बाकी है।  परिस्थितियां तो  हमें नहीं हरा पायी शायद अब उनका हारना बाकी है। सपने तो बहुत देख चुके शायद अब सच होना बाकी है।  थक कर बैठ नहीं सकते शायद अभी कुछ दूरी और चलना बाकी है। हर पल  मुस्कुराना सीख चुके अब दुनिया मे छा जाना बाकी है। विशेष =  दोस्तों, मैने कुछ समय पहले ही अपनी पुस्तक शोभा सृष्टि कविता संग्रह प्रकाशित करवायी है।जिसमे जीवन सेजुडी़ बातें जैसे माँ ,दोस्त,सपने,ख्वाहिशे, समय, मुस्कुराहट, जुनून,शिक्षक, कोरोना की भयावहता साथ ही अपनो की एकता आदि बिषयो को कवितारूप में स्थान दिया है।  यह पुस्तक Amazon,Flipcart,notion press.com पर उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिएनीचेदिये जा रहे  लिंक पर क्लिक करे✍️👇और  अपने दोस्तों के साथ भी  शेयर करें🙏🙏 https://notionpress.com/read/shobha-srishti मुझे उम्मीद है कि मेरा यह छोटा सा प्रयास  सार्थक होगा आप सभी मेरा उत्साहवर्धन करेंगे  धन्यवाद✍️🙏

संस्कृत शिक्षण की विधियाँ(sanskrit teaching methods) संस्कृत शिक्षण की नवीन विधियाँ # विश्लेषणात्मक विधि#हरबर्टीय पंचपदी विधि#मूल्यांकन विधि#

  संस्कृत शिक्षण की विभिन्न विधियाँ  " विश्लेषणात्मक विधि " यह विधि पूर्ण से अंश के प्रति  शिक्षण सूत्र परआधारित है । जैसा कि नाम से स्पष्ट होता है इस विधि में शिक्षक पहले तो पाठ के संपूर्ण अंशो को वर्गीकृत करता है फिर एक- एक अंश को ग्रहण कर उसका विश्लेषण करता है।  संस्कृत शिक्षण में  यह विधि विशेष रूप से व्याकरण शिक्षण और कथा शिक्षण में प्रयुक्त होती है। उदाहरण के तौर पर समझ सकते है कि "संधि प्रकरण" का ज्ञान छात्रों को देना है  तो शिक्षक सर्वप्रथम संधि के सभी प्रकारों के बारे में बताता है। तत्पश्चात सभी प्रकारो के अंतर्गत आने वाली सभी संधियों को एक-एक करके समझाता है।  इसी प्रकार संस्कृत में कक्षा शिक्षण कराते समय शिक्षक इस विधि के माध्यम से सर्वप्रथम संपूर्ण कथा का सार संक्षेप में सुनाता है  उसके पश्चात वह कथा मे आने वाली घटनाओ को क्रमबद्धरूप में प्रस्तुत  करता है । सभी पात्रों का एक-एक कर के वर्णन करता है। जिससे कथावस्तु छात्रों को अच्छी प्रकार से समझ में आती है। विश्लेषणात्मक विधि के गुण  इस विधि के माध्यम से शिक्षण कराने पर कठिन अंश...

Rpsc #reet exam#sanskrit teaching methods#sanskrit shikshan vidhiyan part 4

  संस्कृत शिक्षण की नवीन विधियाँ   लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति के पश्चात से प्रारम्भ जाने वाली विधियां जो संस्कृत शिक्षण में सहायक है वे सभी संस्कृत शिक्षण की नवीन विधियों के अंतर्गत आती है ।  संस्कृत शिक्षण की नवीन विधियाँ निम्नलिखित है    पाठ्यपुस्तक विधि   यह संस्कृत शिक्षण की लोकप्रिय विधि है  इसमें संस्कृत का शिक्षण कक्षा के स्तर के अनुसार बनाई गई पाठ्य पुस्तक पर आधारित होता है। इस विधि के प्रवर्तक  वेस्ट महोदय है।  इस विधि के अंतर्गत किया जाने वाला शिक्षण का केंद्र बिंदु पाठ्य पुस्तक होती है।   गद्य,पद्य, व्याकरण पाठ का शिक्षण पाठ्य पुस्तक के अनुसार होता है।  पुस्तकों का मुख्य उद्देश्य यह है कि इन पुस्तकों का अध्ययन करके विद्यार्थी शिक्षक की सहायता के बिना भी स्वतंत्र रूप से संस्कृत का ज्ञान प्राप्त कर सकते है।  छात्र शिक्षक  की अनुपस्थिति में भी अध्ययन कर सकते हैं अभ्यास कर सकते हैं जिससे छात्रों में स्वावलंबन की भावना का विकास होता है। इसमे मातृभाषा के द्वारा नवीन शब्दो का अर्थ बतलाया जाता है।   पाठ्यपु...

Rpsc#reet exam#sanskrit shikshan vidhiyansanskrit teaching methods part 3

  संस्कृत शिक्षण की प्राचीन विधियाँ व्याकरणअनुवाद विधि/भंडारकर विधि शिक्षा     1835 में लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति के साथ ही इस इस विधि का प्रारंभ हुआ . .इस कारण पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव इस विधि पर दिखाई देता है। .  संस्कृत की प्राचीन शिक्षण विधियों में से इस विधि के जनक श्री रामकृष्ण भंडारकर महोदय माने जाते हैं उन्हीं के नाम पर इस विधि का नाम भंडारकर का विधि पड़ा है । इस विधि के चार सोपान है--  1सर्वप्रथम व्याकरण पाठ की उदाहरण सहित व्याख्या की जाती है नियमों का अभ्यास कराया जाता है नवीन शब्दों से अभ्यास कराया जाता है  2संस्कॄत वाक्यों का अंग्रेजी में अनुवाद कराया जाता है। 3 पुनः वाक्यो का अंग्रजी भाषा से संस्कृत भाषा में अनुवाद कराया जाता है। 4 अनुवादो के अभ्यास हेतु शब्दकोष से नये नये शब्दो का बोध कराया जाता है।   व्याकरण  अनुवाद विधि या भंडारकर विधि के गुण . इस विधि में व्याकरण पाठ का पर्याप्त अभ्यास कराया जाता है रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर अभ्यास पर अधिक बल दिया जाता है जिससे यह एक मनोवैज्ञानिक विधि कही जा सकती है।  .इसमेंं स्थू...

Rpsc#reet exam#sanskrit teaching method#संस्कृत भाषा शिक्षण part 2

  संस्कृत भाषा शिक्षण की विधियां नमस्कार दोस्तों, पिछली पोस्ट में हमने जाना कि संस्कृत भाषा शिक्षण की तीन विधियाँ है- प्राचीन विधि, नवीन विधि और नवीनतम विधि    संस्कृत शिक्षण की प्राचीन विधियों में कुछ विधियाँ जैसे मौखिक एवं व्यक्तिगत शिक्षण विधि, पारायण विधि, वाद विवाद विधि, प्रश्नोत्तर विधि और सूत्र विधि,व्याकरण विधि,व्याख्या विधि, भाषण विधि,कक्षानायक विधि,कथा कथन विधि ये सभी सम्मिलितरूप से पाठशाला विधि कहलाती है।पिछली पोस्ट में हमने प्राचीन विधियों के अन्तर्गत आने वाली कुछ शिक्षण विधियों का अध्ययन कर लिया था।  शेष विधियों का अध्ययन इस पोस्ट में करने जा रहे है। पिछला postपढने के लिए नीचे दी जा रही लिंक पर क्लिक कीजिए संस्कृत शिक्षण की विधियाँ पार्ट1 संस्कृत भाषा शिक्षण प्राचीन विधियाँ व्याकरण विधि   * व्याकरण *भाषा का प्राण तत्व है इसलिए किसी भाषा को पढ़ाने के लिए व्याकरण का ज्ञान दिया जाना आवश्यक है। प्राचीन समय में वेद अध्ययन के लिए व्याकरण का पठन-पाठन विशेष रूप से किया जाता था पतंजलि ने अपने महाभाष्य में लिखा है "रक्षार्थ वेदानाम् अध्येययम् व्या...

Rpsc#reet exam#sanskrit teaching methods#संस्कृत भाषा क शिक्षण विधियाँ part1

Rpsc#reet exam#sanskrit teaching methods#संस्कृत भाषा शिक्षण की विधियाँ  भूमिका -संस्कृत भाषा शिक्षण की कितनी विधियाँ है?कौनसी विधि किस पर अधिक बल देती है?उनके गुण दोष कौनसे है? इन सभी से संबंधित संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर संस्कृत भाषा शिक्षण मे पूछे जाते है,इसलिए परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तो है ही ,इनका ज्ञान होने से संस्कृत भाषा शिक्षण को सहज और रुचिकर बनाया जा सकता है।  संस्कत शिक्षण की विधियाँ-तीन भागो में बाँटा ज सकता है। 1प्राचीन विधियाँ 2 नवीन विधियाँ 3.नवीनतम विधियाँ 1 प्राचीन विधि ○ वैदिक काल में प्रयोग लाई जाने वाली तथा पाश्चात्य शिक्षा पद्धति से पूर्व संस्कृत शिक्षा के लिए प्रयुक्त की जाने वाली विधियों को प्राचीन विधि के अंतर्गत रखा जाता है।  जिसका अध्ययन हम संक्षेप में कर रहे हैं । पाठशाला विधि जैसा कि नाम से विदित है यह पद्धति पाठशाला ,गुरुकुल ,आश्रमो,मठो तथा विद्यापीठो में संस्कृत शिक्षा के अध्ययन हेतु प्रयोग में ली जाती रही ।इसे पंडित प्रणाली या परंपरागत प्रणाली या विधि के नाम से जानते हैं । ○1835 तक यूरोपीय विद्वानों में इसी विधि से संस्कृत...

Today thouths#आज का सुविचार#motivational

Quotes on life   Read more articles https://strugglealwaysshine.blogspot.com/2020/06/blog-post25.html?m=1 https://strugglealwaysshine.blogspot.com/2020/05/poem-on-conditions-in-lockdown.html?m=1 https://strugglealwaysshine.blogspot.com/2020/01/blog-post.html?m=1    मेरे ब्लॉग पर समय देने के लिए आप सभी का  बहुत-बहुत आभार

कविता -बारिश कीबूँदे या अनमोल मोतियो का हार

  ये आसमां आज इतना उदार लग रहा है इससे बरसती अनगिनत बूँदे बूँदे नही ,अनमोल मोतियो का हार लग रहा है यह असीम आसमां आज इन अनमोल मोतियो को  क्यो डुलका रहा है। लगता है किसी खुशी मे इन मोतियो को लुटा रहा है। कही ये मोती पेडो के पत्तो पर है,कही किसी की पलको पर कही किसी की मुट्ठी मे है, कही किसी के अलको पर सच मे ये मोती मानो सभी को धनवान कर रहे है क्यूँकि दिल का पूरा हर अरमान कर रहे है। आज आसमां से बरस रहे इन मोतियो ने  इस धरा का दुलहन सा श्रॄंगार किया है। जैसे मन ही मन कोई बडा आभार किया है। मस्तक पर  चिन्ता की लकीरे जो गहरी हो रही थी  वो देखो सिमटसी गई है । वर्तमान हालातो से बेरंग हुई आज जिन्दगी  इन्द्रधनुष सी बन गई है। धन्यवाद यह भी पढे़ कविता  लाँकडाउन और मजदूरजन कविता -कोरोनारूपी राक्षस से रण

Lockdown#कविता का शीर्षक:"वर्तमान परिस्थितियों में मजदूरो की व्यथा

कविता का शीर्षक :" वर्तमान परिस्थितियों में  मजदूरो की व्यथा अरे, मेरे मजदूर भाईयो की व्यथा आज बढ़ गई है।  कोरोना की भयावहता उनके ही घर कर गई है। जिनके हाथों में काम करते करते पड़ जाते थे छाले । आज  उन हाथों में न छाले रहे न ही काम रहा ।। छालों ने भी कभी नहीं दिया इतना दर्द जितना  आज बिन छालो के पा रहे हैं ।  देखो, आज उनकी आंखों में बिन छालों के भी  असहनीय दर्द के आंसू आ रहे हैं।  आज वह रोटी के लिए दूसरों के मुंह ताक रहे हैं  और बिन खाये पीये ही दिन काट रहे है।। सोते जागते वर्तमान की चिन्ता सता रही है। देखो, एक श्रमदाता की गर्भवती पत्नी प्रसव पीडा़ से  कराह रही है । हम तुम जैसै लोग आने वाले बच्चे के भविष्य के  सपनो से सने है।  जबकि उस धरती पुत्र का यही सपना है  कि उसका आने वाला लाल काल का ग्रास न बने ।। दूसरो के रहने के लिए ठिकाना बनाते है  पर आज अपना ठिकाना ढूंढ रहे है। जो आए थे गांव से शहरों की और बेहतर  जिंदगी का सपना सजाने के लिए।   वह लौट रहे हैं आज शहरों से गांव की ओर  अपनी जिंदगी...

संस्कृत में कारक प्रकरण #संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर#karak in sanskrit

  संस्कृत में कारक प्रकरण  #संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर #karak in sanskrit ○ मोक्षाय हरिं भजति ○मुक्तये हरिं भजति ○काव्यं यशसे भवति  उपरोक्त वाक्यों में कौन सी विभक्ति है? ○ चतुर्थी विभक्ति ○अगर किसी उद्देश्य, प्रयोजन से कोई कार्य किया जाता है  तो उसमें चतुर्थी विभक्ति होती है  " तादर्थ्ये चतुर्थी वाच्या" सूत्र के अनुसार   भक्ति ज्ञानाय कल्पते, सम्पद्यते वा   इस वाक्य में चतुर्थी  विभक्ति किस सूत्र से है?   क्लृपि सम्पद्यमाने च सूत्रानुसार   समर्थ अर्थ वाली धातुओं के प्रयोग  में चतुर्थी विभक्ति होती है।   वाताय कपिला विद्युत्।( पीली बिजली  आंधी की सूचक है।) तापाय अतिलोहिनी। (लाल बिजली अत्यंत धूप  कीसूचक है)  इन वाक्यों में चतुर्थी विभक्ति किस सूत्र से हुई है?   उत्पातेन ज्ञापिते वा सूत्रानुसार शुभ अशुभ को बताने में,  पृथ्वी आदि के उत्पादों को सूचित करने में  चतुर्थी विभक्ति होती है। दैत्येभ्यो हरि अलम्। इस वाक्य  में चतुर्थी विभक्ति  किस शब्द के का...

संस्कृत में कारक प्रकरण# संस्कृत व्याकरण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

संस्कृत में कारक प्रकरण# संस्कृत व्याकरण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर /> ○भुव प्रभव:इस सूत्र से कौनसी विभक्ति होती है? ○ पंचमी विभक्ति ○"प्रकृत्यादिभ्य उपसंख्यानम्" इस वार्तिक से कौनसी विभक्तिका विधानहै? ○ तृतीया विभक्ति ○वारणार्थानामीप्सित: सूत्र से किस विभक्ति का विधान है ○ पंचमी विभक्ति ○ माता गुरुतरा .........(भूमि) रिक्त स्थान मे सही विभक्ति है? ○ भूमेः ,पंचमी वि. ○..............सुरेश: श्रेष्ठतर:(रमेश) रिक्त स्थान मे सही विभक्ति है? रमेशात् ,पंचमी वि. ○ कारण ---तरप्, ईयसुन प्रत्ययान्त  शब्दो से दो वस्तुओ व्यक्तियो की तुलना होती है। जिससे श्रेष्ठता बताई जाती है उसमें पंचमी विभक्ति लगती इसलिए रमेश में पंचमी विभक्ति लगी है ○ समुद्रातपुरी क्रोशे क्रोशम् अस्ति ○वनात् ग्रामो योजनं योजने वा अस्ति ○ इन दोनो विभक्तियो मे मार्गवाची,और दूरी वाले शब्दो में प्रथमा और सप्तमी वि.किस सूत्र से हुई है? ○ तद्युक्ताध्वनः प्रथमासप्तम्यौ सूत्र से ○ वृक्षात् पत्राणि प्रभवन्ति (वृक्षो से पत्ते निकलते है) यहाँ पंचमी वि. किस सूत्र से है? ○ भुव प्रभवः सूत्र से ○ ...

#poem on conditions in lockdown#मजदूरो की स्थिति

  कविता- लाँकडाउन और मजदूर जन देखो, मेरे देश की इक तस्वीर जरा.. एक तरफ कोरोना की बडी जंग तो... दूसरी तरफ मजदूर भाईयो की बेबसी ,बदहाली है। जो गए थे शहरो की तरफ पैसा कमाने। आज उनके पैरो मे पड़ गए छाले  लेकिन हाथो मे न कमाई है।। बनाते है जो बडी बडी महलो सी इमारते  दूसरो के रहने को..  वो किराये के घर में रहने की भीजद्दोजहद कर रहे है  ऐसी किस्मत क्यो उन्होने लिखाई है।।    कविता- लाँकडाउन और मजदूर जन चल पडे है अपने  गाँवो की और अपने पैरो के भरोसे न ज्यादा शिकवा शिकायत किसी से  लडते अपने आप आत्मसम्मान की अथक लडा़ई है।। नही फिक्र अपने पथ के शूलो से,  शूलो को भी फूल समझ कर चल पडे है। इनके भीतर छिपे हिम्मत के जज्बे ने  सच्चे कर्मवीर की परिभाषा हमे समझाई  है।। विशेष  इस छोटी सी अपनी रचना के माध्यम से  हिन्दुस्तान के सभी कर्मवीर मजदूरो को,उनके हौसलो को सलाम करती हूँ आप ही हमारे हिन्दुस्तान की मजबूत नींव है।

Aaj ki quotes#प्रकृति की सता#poem on lockdown

प्रकृति की सता#poem on lockdown इस महामारी ने अहम से आसमान मे  उडने वालो को भी जमीन पर ला दिया। जो भूल गये थे घर का रास्ता  उसे घर का आंगन याद दिला दिया जो आज तक नियम कानूनो को  अपने हाथ की कटपुतली समझते रहे। आज कुदरत की मार ने उन्हे जंजीरो मे लिपटा दिया।  प्रकृति पर अत्याचार कर प्रभुत्व समझने वाले  दानवो को नही पता कि खुद उसका अस्तित्व कितना है। प्रकृति से अपने को ऊँचा समझा...  तो बेशक उसका अस्तित्व मिटना है।

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष#lockdown

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालू...
लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालूम...

कोरोना रूपी राक्षस से रण #कोरोना पर कविता #corona#lockdown

कविता का शीर्षक-"नही छोडेंगे इस रणको बीच मेंअधूरा   नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच मे अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।  यहाँ न किसी धर्म,जाति,संप्रदाय,  अमीर,गरीबी का कवच काम नहीं आएगा  यह रण तो हमारी एकता की मिसाल बन जाएगा । नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।   यहां काम नहीं आएगी कोई राजनीतिक घृणा  यह रण तो राजनीति के दलदल से दूर ले जाएगा। नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।   यहां काम नहीं आएगी आरोप-प्रत्यारोपो की झड़ी   यह रण तो भाईचारे और परोपकार से जीता जाएगा।  नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा   सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा   न हीं चलेगी यहां तलवारे,न ही धनुष बाण चलेंगे   न ही गिरने देंगे लहू की एक बूंद इस धरा पर  यह रण तो इंसानियत की कसौटी पर लड़ा जाएगा।  नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा   सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।  न हीं कर पाएगा अपनों को अपनों से दूर  यह रण तो...

सुविचार#शब्दो की ताकत#golden lines in hindi#motivation

दोस्तों में कोई दार्शनिक नहीं हूँ न ही कोई कवि और न ही महान लेखक हूं बस अपने दिल में उठ रही भावनाओं को कलम के माध्यम से कागज पर कभी कभार उतार देती हूं मुझे अपने अनुभवों को साझा करने में संतुष्टि का अहसास होता है यही मेरे लिए बहुत है। १. अगर भावो की गहराई समझ मे आ रही हो तो शब्दो कोष का गहरा होना  आवश्यक नही २. आपका एक एक अक्षर दिव्य हो जाता है यदि वह किसी के अंदर छाए तिमिर की परतो को खोलकर उसके सच्चे स्वभाव को सामने लाने में मदद करता है।  ३आपके शब्दों को किसी के लिए वेदना नही, प्रेरणा बनाइए  ४आपकी शब्दों में छुपे हुए भावनाओं की की कीमत ही है कि किसी के शब्द दवा बन जाते हैं क्यों किसी के शब्द केवल हवा बन जाते हैं।  दोस्तों यदि आपको ये विचार अच्छे लगे हो तो लाइक करें और अपने दोस्तों को शेयर करें। धन्यवाद

Net#set#jrf sanskrit exam#charvak darshan#चार्वाक दर्शन

लोकायत दर्शन#चार्वाक दर्शन#बार्हस्पति  दर्शन से सम्बन्धित तथ्य चार्वाक दर्शन के संस्थापक बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए इसे बार्हस्पति दर्शन भी कहते है। इसी का प्राचीन नाम लोकायत दर्शन है। चार्वाक दर्शन सुख को ही जीवन का परम उद्देश्य मानता है।  यह भौतिकता वादी दर्शन है जो वेदों की निंदा करता है। यह अग्निहोत्र और श्राद्ध का निषेध करता है चार्वाक दर्शन की दृष्टि में प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है। चार्वाक दर्शन  ईश्वर और आत्मा का निषेध मानता है। चार्वाक दर्शन काम को ही एकमात्र पुरुषार्थ मानता है  चार्वाक दर्शन की दृष्टि में मृत्यु ही मोक्ष है। चार्वाक दर्शन चार तत्वों को मानता है।👉 पृथ्वी जल तेज वायु यह आकाश को तत्व नहीं मानता है। चार्वाक दर्शन के सिद्धान्त   प्रत्यक्ष प्रमाणवाद - चार्वाक दर्शन प्रत्यक्ष दिखाई देने वाली वस्तुओं को ही अंतिम सत्य मानता है यह अनुमान शब्द आदि प्रमाणो को नहीं मानता है।   भौतिकतावा द    - यह सांसारिक वस्तुओं को अत्यधिक महत्व देता है भूत चैतन्य वाद  - पृथ्वी जल तेज...

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sanskrit exam 1⃣मनुस्मृति के अनुसार क्रोध से उत्पन्न होने वाले  दोषो  की संख्या कितनी है?  ✔️ 8 ✏️दूसरों की चुगली करना, दुस्साहस करना, द्रोह करना, ईर्ष्या करना,  दूसरों के गुणों में दोष निकालना दूसरे के धन का अपहरण करना, वाणी में कठोरता लाना, निरपराधी को मारना      2⃣ मनुस्मृति के अनुसार काम से उत्पन्न होने वाले दोषों की संख्या कितनी है? ✔️ 10 ✏️शिकार करना, जुआ खेलना ,दिन में सोना ,दूसरे की निंदा करना स्त्रियो मे आसक्ति,नशा करना, नाचना ,गाना ,बजाना ,व्यर्थ घूमना       3⃣ काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले दोषों का मूल कारण क्या है?  ✔️ लोभ 4⃣संकेत ग्रह के कितने साधन बताए गए हैं ✔️8 5⃣शूद्रक द्वारा रचित मृच्छकटिकम् प्रकरण मे संस्कृत बोलने वाले  पात्रों की संख्या है ? ✔️ ६ 6⃣स्वल्पोछिष्टस्तु तद्हेतु़....... विस्तार्यनेकधा: । रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए?   ✔️बीजं ✏️ दशरूपककार धनञ्जय ने अपनी रचना दशरूपक मे  पाँच अर्थप्रकतियाँ बताई है    बीजं,   बिंदु, पताका, प्रकरी और का...

मृच्छकटिकम् (प्रकरण) # संस्कृत साहित्य में शूद्रक की रचना#mrichchhakatikam

मच्छकटिकम् प्रकरण के सम्बन्ध में सामान्य तथ्य  रचयिता---शूद्रक,  अंक-10,  रस-श्रृंगार, नायक-चारुदत्त(एक निर्धन ब्राह्मण)  , नायिका --वसन्तसेना (एक गणिका)  चारुदत्त की पत्नी-धूता,  चारुदत्त का पुत्र- रोहसेन,  प्रतिनायक--शकार ,प्रकरण के नामकरण का आधार----** षष्ठ अंक **********                                              प्रकरण के प्रत्येक अंक का शीर्षक इस प्रकार है---------- प्रथम अंक--अलंकार न्यास, द्वितीय अंक---धूतकर -संवाहक , तृतीय अंक----सन्धिच्छेद, चतुर्थ अंक---मदनिका-शर्विलक     पंचम अंक----दुर्दिन,  षष्ठ अंक---प्रवहण-विपर्यय,   सप्तम अंक--- आर्यकापहरण   अष्टम अंक---वसन्तसेना मोचन ,नवम अंक---व्यवहार, दशम अंक---संहार(उपसंहार)  मच्छकटिकम् (mrichchhakatikam) से संबंधित अन्य पोस्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें    मृच्छकटिकम् प्रकरण#mrichchhkatikam# संस्क...