सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Rpsc#reet exam#sanskrit shikshan vidhiyansanskrit teaching methods part 3

 संस्कृत शिक्षण की प्राचीन विधियाँ

व्याकरणअनुवाद विधि/भंडारकर विधि शिक्षा 

 
1835 में लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति के साथ ही इस इस विधि का प्रारंभ हुआ.
.इस कारण पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव इस विधि पर दिखाई देता है।

.  संस्कृत की प्राचीन शिक्षण विधियों में से इस विधि के जनक श्री रामकृष्ण भंडारकर महोदय माने जाते हैं उन्हीं के नाम पर इस विधि का नाम भंडारकर का विधि पड़ा है ।

इस विधि के चार सोपान है--


 1सर्वप्रथम व्याकरण पाठ की उदाहरण सहित व्याख्या की जाती है नियमों का अभ्यास कराया जाता है नवीन शब्दों से अभ्यास कराया जाता है 

2संस्कॄत वाक्यों का अंग्रेजी में अनुवाद कराया जाता है।

3 पुनः वाक्यो का अंग्रजी भाषा से संस्कृत भाषा में अनुवाद कराया जाता है।

4 अनुवादो के अभ्यास हेतु शब्दकोष से नये नये शब्दो का बोध कराया जाता है।

  व्याकरण अनुवाद विधि या भंडारकर विधि के गुण

. इस विधि में व्याकरण पाठ का पर्याप्त अभ्यास कराया जाता है रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर अभ्यास पर अधिक बल दिया जाता है जिससे यह एक मनोवैज्ञानिक विधि कही जा सकती है। 

.इसमेंं स्थूल से सूक्ष्म,ज्ञात से अज्ञात,सरल से कठिन शिक्षण सूत्रो का अनुसरण होता है।

.इसमें छात्रो मे स्वाध्याय की आदत विकसित होती है। 

.इस विधि के द्वारा एक बड़े समूह को सरलता सेेेे पढ़ाया जा सकता है। अतः इससे समय,शक्ति और धन की बचत होती है।

.भाषाओं के शब्दकोष का ज्ञान होता है।

. यह विधि सामान्य बालक के लिए भी उपयोगी है।

दोष 

. अंग्रेजी भाषा पर भी ध्यान देने से यह पाश्चात्य शिक्षा से प्रभावित है। 

.इस विधि में उच्चारण अभ्यास का अभाव, साहित्य का अभाव देखने को मिलता है।

 .यह विधि नीरस और एकांगी है  क्योंकि  इसमें केवल व्याकरण एवम्अनुवाद पर बल दिया जाता है। 

विशेष

संस्कृत भाषा शिक्षण की प्राचीन विधियों के बारे में आप सभी ने समझ लिया है ।मैं आशा करती हूँँ कि संस्कृत भाषा शिक्षण की विधियों पर लिखी जा रही posts आपके ज्ञानार्जन में सहायक होगी। 

प्रोत्साहन के लिए आप सभी का बहुत-बहुत आभार

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मनुस्मृति के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#manusmriti#sanskrit exam #net/set#collage

 1.धर्म के दस लक्षण किसने बताये है? ✍️मनु ने 2. स्मृति के अनुसार चूड़ाकर्म संस्कार किस वर्ष में होता है?  ✍️तृतीय वर्ष में   3.ब्राह्मण का उपनयन संस्कार किस वर्ष में किया जाना चाहिए? ✍️8वे वर्ष में नोट:क्षत्रिय का 11वे वर्षमें, वैश्य का 12वे वर्ष में 4.मनुस्मृति के अनुसार अभिवादनशील व्यक्ति क्या प्राप्त करता है ✍️आयु,विद्या,यश,बल 5.गुरु की निन्दा से ब्रह्मचारी कौनसी योनि प्राप्त करता है? ✍️कुत्ता की 6व्रात्य किसे कहते है? ✍️निर्धारित समय पर उपनयन संस्कार नही कराने वाले को 7.पूर्वाभिमुख होकर भोजन करने वाले क्या प्राप्त करते है? ✍️आयु 8.किस युग में दान की प्रधानता है? ✍️कलियुग मे 9.विप्र ब्रह्मचारी की मेखला कैसी होनी चाहिए? ✍️मौञ्जी की  10.मनुस्मृति के अनुसार पाक यज्ञ कितने है? ✍️चार 11.मनुस्मृति के अनुसार कुल व्यसन है? ✍️18  मनुस्मृति के अनुसार राजा के अधिकार और कर्तव्य#काम और क्रोध से उत्पन्न व्यसन 12.  काम से उत्पन्न व्यसनो की संख्या कितनी है? ✍️10 13.लोभ से उत्पन्न व्यसनों की संख्या कितनी है? ✍️8  14.मनुस्मृति के अनुसार कौनसा दुर्ग उत्तम है? ✍️ग...

नाट्यशास्त्र के अनुसार नायक के प्रकार

  " नायक के भेद"  संस्कृत साहित्य में दस रूपक माने गये है धनञ्जय ने अपने दशरूपकम्   में रूपक के दस भेद माने है  नाटक,प्रकरण,भाण,व्यायोग समवकार,डिम ईहामृगअंक, वीथी,प्रहसन  ये रूपक के दस भेद है।                          रूपक के 10 प्रकारो में प्रत्येक की अपनी विशिष्टता है। जिसका करण   कथानक (वस्तु), नायक (नेता), रस में भिन्नता है नाट्यशास्त्रीय दृष्टि से ये तीनों रूपकों के महत्त्वपूर्ण तत्व है।                                                इस Post में हम नाट्यशास्त्र के महत्त्वपूर्ण तत्व नेता अथवा नायक की कोटि (प्रकार) के बारे में जानेंगे।   नेता अथवा नायक  किसे कहते है                       सभी रूपकों का एक नायक होता है जिसे अंत में धर्म, अर्थ,कामरूपी फलों में से कोई न कोई फल अवश्य मिलता है। फल ...

संस्कृत महाकाव्यो में से पूछे जाने वाले परीक्षोपयोगी प्रश्न# शिशुपाल वध महाकाव्य#महाकवि माघ की रचना कौन सी है?

 शिशुपालवध महाकाव्य के नायक ? श्री कृष्ण  शिशुपालवध महाकाव्य के प्रति नायक? शिशुपाल  शिशुपालमाघ का प्रिय छंद है ? मालिनी  शिशुपाल वध महाकाव्य का उपजीव्य काव्य है? महाभारत का सभापर्व महाभारत के सभापर्व के कितने अध्यायों मे शिशुपाल वध की कथा का वर्णन है? अध्याय 33 से 45 तक शिशुपाल वध के किस सर्ग में  श्री कृष्ण द्वारा इंद्रप्रस्थ प्रस्थान का वर्णन है?  तृतीय (3) सर्ग मे "शिशुपाल वध "महाकाव्य के किस सर्ग में रैवतक पर्वत का वर्णन है? चौथे सर्ग में "शिशुपाल वध "महाकाव्य के किस सर्ग में  षड ऋतुओ का वर्णन महाकवि माघ ने किया है? छठे सर्ग में ।                                                                "शिशुपाल वध" महाकाव्य के ग्यारहवे (11) सर्ग में क्या वर्णित है? प्रभात वर्णन कृष्ण का युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में पहुंचना तथा भीष्म द्वारा श्री कृष्ण स्तुति का वर्णन किस...