प्रकृति की सता#poem on lockdown इस महामारी ने अहम से आसमान मे उडने वालो को भी जमीन पर ला दिया। जो भूल गये थे घर का रास्ता उसे घर का आंगन याद दिला दिया जो आज तक नियम कानूनो को अपने हाथ की कटपुतली समझते रहे। आज कुदरत की मार ने उन्हे जंजीरो मे लिपटा दिया। प्रकृति पर अत्याचार कर प्रभुत्व समझने वाले दानवो को नही पता कि खुद उसका अस्तित्व कितना है। प्रकृति से अपने को ऊँचा समझा... तो बेशक उसका अस्तित्व मिटना है।
Shobha Srishti यह" संस्कृत विषय एवं प्रेरणासम्बंधित ब्लॉग है, Motivational and Education Category blog