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गुरु कौन है?/गुरु का जीवन में महत्त्व/गुरु पूर्णिमा विशेष

 जहाँ से आपको ज्ञान मिले, जो आपको अपने सपनो के करीब ले जाये,जो आपको अपने आप से रुबरू करवाये,आपके जीवन में छाये अँधकार को छाँटकर जीवन में एक नई रोशनी भर दे........उसी का नाम है गुरु जरुरी नही जिसने आपको कुछ किताबें पढा़कर स्कूल,काँलेज में आपको अच्छे अंक लाने में मदद की हो,या फिर जिसने गुरु मंत्र दिया हो जिसे आप सुबह शाम मनके से जाप करते हो उसे ही गुरु कहा जाये.. सृष्टि में व्याप्त चेतन-अचेतन कुछ भी जो आपके ह्रदय में उससे मिली किसी प्रेरणा के प्रति आस्थावान बना दे, उसके प्रति सच्चे सम्मान के भाव जाग्रत करे , भटके जीवन को एक राह दिखाये जिसकी तलाश में आप न जाने कब से थे, आपके अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर जानने में आपकी मदद करे......सच्चे अर्थो में वही गुरु है......यदि इन अर्थों में देखा जाये तो गुरु को किसी सीमा में नही बाँधा जा सकता है। जिस प्रकार ज्ञान असीमित है उसी प्रकार गुरु की परिभाषा असीमित है ज्ञान अनन्त है उसी प्रकार गुरु की महिमा भी अनन्त है........ ये सिर्फ और सिर्फ आपकी आस्था पर निर्भर है कि आप किसे गुरु की श्रेणी में रखते है....एक शिशुसे लेकर वृद्ध तक, चेतन से लेकर अचेतन तक ग...

Monday motivation#Today motivation

 1)किसी भी हाल में हालात आपके मनोबल से बडे़ नही है। किसी को हक नही जो आपके मनोबल को गिराये न ही आपको हक है कि आप किसी के मनोबल को गिराये 2)जो चाहता बाँटना मुस्कुराहटे जमाने को उसका मुस्कुराहट रूपी तिजोरी कभी खाली नही होती 3)कभी कोई आपके लिए खुदा तो  कभी आप किसी के लिए खुदा होते हो  क्यूकि आसपास है खुदा 4)कोई स्वार्थ के तराजू में आपके प्रेम को तौलने की     कोशिशकरे इससे पहले उससे बाहर निकल जाना ही बेहतर है। कविता =फरिश्तें विशेष=आप सभी को योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ..✍️🙏🙏 धन्यवाद🙏

कविता =फरिश्तें....

दुनिया की इस भीड़ में कौन किसे पहचानता है। जो रखता है काबिलियत दिलो को जीतने की  जमानाउसे ही जानता है।  इस दुनिया में जाने कितनी तरह के लोग बसते है कोई लगा हुआ है अपनी तिजोरियाँ भरने,  तो कोई दोनो हाथो से खुशियाँ लुटा रहा है। किसी का दिल पत्थर है, तो किसी का दिल  इंसानियत के लिए धड़क रहा है। इंसानों की इस बस्ती में सच्चा इंसान मिलना भी कठिन सा है.... अगर फरिश्ता मिल जाये तो क्या कहना... यह भी पढे़......👇👇 माँ गागर में सागर Golden words     धन्यवाद......✍️🙏

कुछ नही किया आज#खालीपन#अपने लिए समय निकालना भी जरूरी

  #कुछ हिन्दी कविता नही किया आज#खालीपन चाहे पुरा दिन किसी काम में बिजी रहे लेकिन जब तक हम अपनी आत्मसंतुष्टि का कोई भी काम या कहे हाँबी के लिए समय नही देते तब एक खालीपन का भाव रहता है। सब की चाँइसेज अलग है कोई जब तक योगा नही करे उसे लग सकता है आज का दिन तो बेकार ही गया, लेकिन हो सकता किसी को यह खुशी गिटार बजाने में मिले, कोई नृत्य के द्वारा और कोई लेखन के माध्यम से आत्मसंतुष्टि प्राप्त करे,कोई पक्षियों को दाना डालकर, तो कोई कुछ समय दोस्तो से बतियाकर,कोई एकांत में समय गुजार कर अपने दिन को उद्देश्यपूर्ण और अच्छा बनाना चाहता है ताकि दिन के खत्म होने पर रात्रि मे सुकून से सो जाये यह मलाल नही रहे यार आज का दिन अच्छा नही था आज कुछ नही किया मैने पूरा दिन ऐसे ही निकल गया।  जब तक हम कुछ समय अपने लिए नही निकाले लगता है कुछ नही किया आज इस पश्चाताप से अच्छा है जितना भी समय हम निकाल  पाये अपने लिए निकाले जिन्दगी की भागदौड़ तो चलती रहेगी। धन्यवाद🙏 इस सम्बन्ध में मेरे विचारों को पढ़ने के लिए बहुत बहुत आभार   हिन्दी कविता

संस्कृत व्याकरणात्मक टिप्पणियाँ

 वसुधैव=वसुधा+एव = वृद्धि संधि यत्रैकता=यत्र +एकता =वृद्धि संधि देशः=दिश् धातु+घञ् प्रत्यय देवता= देव+तल्+टाप् बलवान=बल+मतुप प्रत्यय रक्षितुं=रक्ष् धातु+तुमुन प्रत्यय प्रभवति=प्र उपसर्ग+भू धातु+लट् लकार प्रथमपुरुष,एकवचन एकता=एक+तल् प्रत्यय+टाप् प्रत्यय जायन्ते=जन् धातु , ( आत्मनेपदी )लट्लकार प्रथम पुरूष,बहुवचन भवेयुः=भू धातु, विधिलिड्ग लकार,प्रथम पुरुष,बहुवचन गीतम्=गा धातु+क्त प्रत्यय ऋग्वेदेऽपि=ऋग्वेद+अपि =पूर्वरूपसंधि तेषां=तत् शब्द षष्ठी विभक्ति,बहुवचन विचारा: वि उपसर्ग+चर् धातु +घञ् प्रत्यय=विचार: विचारः शब्द से प्र.विभक्ति का बहुवचन युक्ता=युज् धातु+क्त प्रत्यय, प्रथमा वि का बहुवचन शान्तिश्च =शान्तिः+च (विसर्ग संधि) देशाग्रणी =देश+अग्रणी (वृद्धि संधि)  महिमा =महत् शब्द से इमनिच प्रत्यय करने पर, यह पुल्लिंग शब्द है। भावनया=भावना शब्द से,तृतीया वि.का एकवचन,स्त्रीलिंग उन्नति= उद उपसर्ग +नम् धातु +क्त्तिन प्रत्यय जिघ्रेत=घ्रा धातु, लट् लकार,प्रथम पुरुष,एकवचन अस्मरन्= स्मृ धातु, लड़ लकार,प्रथम पुरुष,बहुवचन

"माँ"❤❤ गागर में सागर" #mothers day special

दोस्तों, मेरी द्वारा स्वरचित यह कविता दुनिया की प्रत्येक❤माँ❤के चरणों में समर्पित है।आप सबका आशीर्वाद हमारे जीवन को और महकाये । आप सभी को कोटि कोटि वन्दन✍️🙏🙏🙏🙏    कविता=माँ गागर में सागर                 ❤🎁 "माँ गागर में सागर"🌹🎁 " माँ " एक छोटा सा  शब्द है लेकिन  जिसमे सभी महाकाव्य समाने का सामर्थ्य है.... माँ  का प्यार पाने को भगवान भी बालरूप बनाते है..... तीन लोको के स्वामी होकर भी उसकी ममता का मोल कहाँ चुका पाते है....... माँ की अनमोल ममता पाने को भगवान भी तरस जाते है.... दुनिया को अपने इशारो पर नचाते होंगे ..... लेकिन खुद  माँ की प्यार भरीडाँट खाते है..... माँ " एक छोटा सा  शब्द है लेकिन इसमे छिपा महान अर्थ है..... माँ क्या है उसे कैसे बयाँ करु मै फिर भी भावना की कलम से माँ के लिए कुछ शब्द भेंट करती हूँ...... मां संस्कारों की बगिया है माँ रिश्तो को पिरोने वाली सुंदर माला है..... मां श्रद्धा की रंगोली है।माँ आशीषो से भरी झोली है.... माँ ईश्वर की प्रतिनिधि है।माँ सौभाग्य और सिद्धि है.... मा...

Golden words#motivational

  दोस्तों, आप सब के लिए कुछ बेहतरीन लाइने प्रस्तुत कर रही हूँ जो मेरे विचार है और आप कहीं  न कहींआप सबसे भी मिलते जुलते है। ये लाइने अवश्य ही आप  सबको पसंद आएँगीं क्योकि इनमें  सच्चाई और अनुभव  दोनो है। यदि आपके दिल को छूए तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना नही भूले   1.अगर कोई आप आपके लिए दुआएँ करे तो समझिये आप कुछ तो अच्छा कर रहे है। लेकिन जब आप के दिल से किसी और के लिए दुआएँ निकले तो समझिए आप बहुत बेहतर इंसान बन रहे है। 2.दोस्तों को अपनी दुनिया मानने वाले लोग बहुत कम होते है। लेकिन उन कम लोगों में ही मेरी गिनती है। 3.अक्सर उन लोगो के लिए दिल से दुआ निकलती है जिनकी सीरत खु़द खुदा से मिलती है। 4.वे ही लोग फरिश्ते होते है।जो विना किसी रिश्ते के भी निस्वार्थ आपकी मदद करने जाने कहीं से आ जाते है। 5.आपका व्यवहार ही तो है, जो आपको किसी की नजरों में हीरो बना  देता है।या जीरों 6.हमारे दुःखी होने की सबसे बडी़ वजह यह है कि हम खुशी के पलो को यूहीं जाने देते है और दुःखी करने वाले पलों की बहुत संभाल कर रखते है। 7.वो जिद, जो हमारे लिए नुकसानदेय उसे छोडकर देखिए ...

भाषाविज्ञान के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#भाषाविज्ञान किसे कहते है।

 1. भाषा का मूलतम संघटक है? ✍️ध्वनि 2भाषाविज्ञान क्या है? ✍️जिस शास्त्र में भाषाओं की उत्पत्ति,संरचना,विकासक्रम,उनके हास का का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन किया जाता है। उसे भाषा विज्ञान कहते है। 3भाषाविज्ञानस्य अर्थोऽस्ति भाषायाः विज्ञानं ,विज्ञानञ्च विशिष्टं ज्ञानम्, इत्थं भाषाया:विशिष्टं ज्ञानं"भाषाविज्ञानम्''इत्युचते यह परिभाषा किस भाषाविद् की है? ✍️देवेन्द्रनाथ शर्मा 5"जिस शास्त्र में भाषाओं की उत्पत्ति,संरचना,विकासक्रम,उनके हास का का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन किया जाता है। उसे भाषा विज्ञान कहते है।"यह परिभाषा किसने दी है? ✍️श्यामसुन्दरदास 6"ध्वन्यात्मकैः शब्दैः विचार-विचारप्रकटीकरणमेव भाषाऽस्ति?"इस परिभाषा का सम्बन्ध है? ✍️हेनरी स्वीट महोदय से। 7उच्चारणावयवेभ्यः निसृतः ध्वन्यात्मक विचारःएवभाषाऽस्ति? ✍️प्लेटो 8'व्यक्ता वाचि वर्णा येषां त इमे व्यक्त वाच:"उक्त परिभाषा है? ✍️महाभाष्यकार पतञ्जलि की 9"भाषा तु यादृच्छिकवाचिकध्वनिसंकेतस्य सा पद्धतिः अस्ति,यया मानवः पारस्परिकविचाराणां विनिमयं करोतीति"उक्त परिभाषा है? ✍️बी.ब्लाँक और ट्रेगर महोदय...

मेरा मकसद बस इतना है कविता#मोटिवेशनल#life purpose quotation

  धन्यवाद दोस्तों✍️🙏

भाषाविज्ञान के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#भाषाविज्ञान की उत्पत्ति के सिद्धान्त#Net#set#jRF sanskrit exam

  1.किस यंत्र में कृत्रिम तालु का प्रयोग किया जाता है? ✍️पैलेटोग्राफ 2सहस्त्रभाषात्मक परिवार है? ✍️अमरीकी परिवार 3आस्ट्रेलियाई भाषा परिवार में कितनी भाषाएँ आती है? ✍️100 4पापुई भाषा परिवार में कितनी भाषाएँ आती है ✍️132 5पापुई भाषा परिवार किस खंड के अन्तर्गत आता है? ✍️प्रशान्तमहासागरीय 6प्रशान्त महासागरीय खंड के अन्तर्गत आने वाले भाषा परिवार मलय पोलिनेशियाई परिवार पापुई परिवार आस्ट्रेलियन परिवार द.पूर्वी एशियाई परिवार भाषाओं के पारिवारिक वर्गीकरण के अंतर्गत 18 भाषा परिवार माने जाते है जिन्हें चार खंडों में बांटा गया है  1यूरेशिया खंड 2अफ्रीकी खंड 3प्रशांत महासागरीय खंड  4अमरीकी खंड  7भारोपीय भाषा परिवार किस खंड के अंतर्गत आता है?  ✍️यूरेशिया खंड यूरेशिया खंड के अन्तर्गत आन वाली भाषाएँ 1.भारोपीय भाषा परिवार 2.द्रविड भाषा परिवार 3.बरूशस्की भाषा परिवार 4.काकेशी भाषा परिवार 5.यूराल अल्टाई भाषा परिवार 6.चीनी भाषा परिवार 7.जापानी कोरियाई भाषा परिवार 8.अत्युत्तरी भाषा परिवार 9.बास्क भाषा परिवार 10.सामी हामी भाषा परिवार 8.बान्टू भाषा परिवार मे कितनी भाषाएँ आती है? ✍️150 ...

नारी का सच्चा स्वरूप#अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

 नमस्कार, दोस्तो आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मेरी यह कविता नारी शक्ति  को समर्पित है जिसमें नारी के सच्चे स्वरूप की व्याख्या की गई है मैं जानती हूँ कि मेरे क्या किसी के भी शब्द कम है नारी के विराट व्यक्तित्व को समझने और समझाने के लिए     कविता = नारी का सच्चा स्वरूप तू रूद्र रूप है, करुणा रूप, वात्सल्य रूप है तू ही।  तेरे पावन हृदय में भावों की सरिता बहती है। अपनों के सुखों के खातिर तू इतने  कष्टों को सहती है।  तू सृष्टि की निर्मात्री है मानव की  जन्म दात्री है।  तू ममता है कमजोर नहीं  तू समता है कमजोर नहीं  तेरे इस रूप को बारंबार प्रणाम है।  तेरी इस महिमा को गाता धर्म पुराण है।  तूने ही इस धरा को संवारा है। तूने ही निर्मल सौंदर्य तराशा है।  तू सुख ऐश्वर्य की विभूति है।  परम कल्याणमयी प्रतिमूर्ति है।  तू लक्ष्मी है, माँ विद्यादायिनी है।  काली है, कात्यायनी है।  तू दुर्गा है, माँ गौरा है।   ये तेरे ही अभिन्न स्वरूपा है।  हे चंडमुंड संहारिणी  हे महिषासुर वधकारिणी  तुझे इ...

मनुस्मृति के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#manusmriti#sanskrit exam #net/set#collage

 1.धर्म के दस लक्षण किसने बताये है? ✍️मनु ने 2. स्मृति के अनुसार चूड़ाकर्म संस्कार किस वर्ष में होता है?  ✍️तृतीय वर्ष में   3.ब्राह्मण का उपनयन संस्कार किस वर्ष में किया जाना चाहिए? ✍️8वे वर्ष में नोट:क्षत्रिय का 11वे वर्षमें, वैश्य का 12वे वर्ष में 4.मनुस्मृति के अनुसार अभिवादनशील व्यक्ति क्या प्राप्त करता है ✍️आयु,विद्या,यश,बल 5.गुरु की निन्दा से ब्रह्मचारी कौनसी योनि प्राप्त करता है? ✍️कुत्ता की 6व्रात्य किसे कहते है? ✍️निर्धारित समय पर उपनयन संस्कार नही कराने वाले को 7.पूर्वाभिमुख होकर भोजन करने वाले क्या प्राप्त करते है? ✍️आयु 8.किस युग में दान की प्रधानता है? ✍️कलियुग मे 9.विप्र ब्रह्मचारी की मेखला कैसी होनी चाहिए? ✍️मौञ्जी की  10.मनुस्मृति के अनुसार पाक यज्ञ कितने है? ✍️चार 11.मनुस्मृति के अनुसार कुल व्यसन है? ✍️18  मनुस्मृति के अनुसार राजा के अधिकार और कर्तव्य#काम और क्रोध से उत्पन्न व्यसन 12.  काम से उत्पन्न व्यसनो की संख्या कितनी है? ✍️10 13.लोभ से उत्पन्न व्यसनों की संख्या कितनी है? ✍️8  14.मनुस्मृति के अनुसार कौनसा दुर्ग उत्तम है? ✍️ग...

कविता-उडान#poem#motivational

  अगर खुले आसमां में उडने को है बेकरार फिर उडने को कर हौसलो के पंखो को तैयार रंग बिरंगे खगो की उडान को निहार तू समाज की जंजीरो से मुक्त होकर भर दिल से गहरी (ऊँची)उडान तू जीवन को बना ले एक खुला आसमान  इंद्रधनुषी होगी देख फिर तेरी देख शान उडान हे कृष्ण.....मुझे अर्जुन बना दीजिए सुविचार-शब्दों की ताकत#प्रेरणास्पद दोस्ती#dosti#friendship

संस्कृत साहित्य के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर(rpsc collage lecturer#net#set

 1.विश्वनाथ के मत में काव्य की सिद्धि किस से होती है? -रस से विश्वनाथ के अनुसार "वाक्यं रसात्मकं काव्यम्" अर्थात रसात्मक वाक्य ही काव्य है। 2.विश्वनाथ ने किन किन के काव्य लक्षणों का खंडन किया? -मम्मट,कुन्तक,भोज,आनन्दवर्धन,वामन 3.काव्यलक्षणो का खंडण करते हुए आचार्य विश्वनाथ "स्ववचनविरोधाद् अपास्तम्" यह किसके संबंध में कहते है? --आनन्दवर्धन  4आनन्दवर्धन ने काव्य का महत्त्वपूर्ण तत्त्व किसे  माना है? -ध्वनि को 5.योग्यताकांक्षासत्तियुक्तः पदोच्चय क्या कहलाता है? -वाक्य योग्यता, आकांक्षा और आसक्ति से युक्त पद ही वाक्य है।  6. साहित्य दर्पण में काव्य प्रयोजन बताया गया है? -चतुर्वर्गफलप्राप्ति 7.अद्भुत रस मे कौनसा स्थायी भाव है? -विस्मय 8."अवस्थानुकृतिर्नाट्यम्" नाटय का यह लक्षण किसने दिया है? - धनञ्जय ने धनञ्जय ने अपने काव्यशास्त्रीय ग्रंथ"दशरूपक"में नाटक का लक्षण इस प्रकार किया है " अवस्थानुकृतिर्नाट्यम् रूपं दृश्यतयोच्यते। रूपकं तत्समारोपात् दशधैव रसाश्रयम्।। 9.नमस्तस्मै गणेशाय यत्कण्ठःपुष्करायते। यदाभोगघन ध्वनो नीलकण्ठस्य ताण्डवे।। यह मंगलाचारण...

तर्कभाषा#षड्विध सन्निकर्ष#न्याय दर्शन

प्रश्न१ प्रत्यक्ष प्रमाण किसे कहते है? "तत्र प्रत्यक्षज्ञानकरणं प्रत्यक्षम्" प्रत्यक्ष ज्ञान या प्रमा का जो असाधारण कारण है वह ही प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रश्न२ अब प्रश्न उठता है कि प्रत्यक्ष प्रमा क्या है? "इन्द्रियार्थ सन्निकर्षजन्यं ज्ञानं प्रत्यक्षम्" अपने विषय के साथ इन्द्रियों का सामीप्य संबंध होने पर उससे जो ज्ञान उत्पन्न होता है।वह प्रत्यक्ष कहलाता है। प्रत्यक्ष प्रमा के दो भेद है- निर्विकल्पक ज्ञान सविकल्पक ज्ञान प्रत्यक्ष ज्ञान(प्रमा) का कारण इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष( इन्द्रियो का अपने विषयो से संयोग अर्थात समीपता) है। प्रश्न३  इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष कितने प्रकार का है? इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष के छः भेद है 1.संयोग सन्निकर्ष = जब इन्द्रिय का किसी वस्तु से संयोग होता है तो उसे संयोग सन्निकर्ष होता है।जैसे आँख द्वारा घडे़ को देखना 2.संयुक्त समवाय= जब आँख द्वारा घडे़ का ज्ञान होता है उसके पश्चात उसमे शुक्ल,रक्त,पीत जैसे रंग का भी ज्ञान होता है तो वहाँ संयुक्त समवाय होता है। संयुक्त समवाय में वस्तु के गुणो का प्रत्यक्ष होता है। 3.संयुक्त समवेत समवाय- जब वस्तु  से स...

तर्कभाषा#केशवमिश्र की तर्कभाषा#न्याय दर्शन#अनुभव के भेद

  अनुभव = स्मृति से भिन्न ज्ञान अनुभव कहलाता है।  स्मृति भावना पर आधारित होती है जबकि अनुभव नामक ज्ञान स्मरण से भिन्न होता है किसी वस्तु को देखकर होने वाला मानसिक व्यापार बुद्धि का विषय होने पर अनुभव कहलाता है । अनुभव के दो भेद है  यथार्थ अनुभव और  अयथार्थ अनुभव यथार्थानुभव = जो वस्तु जैसी है उसका वैसा ही ज्ञान प्राप्त होना "यथार्थ अनुभव" कहलाता है। जैसेचांदी को देखकर चांदी का ज्ञान प्राप्त होना।   यथार्थ अनुभव के चार उपभेद है।   1.प्रत्यक्ष, 2.अनुमिति 3.उपमिति 4.शाब्द  इन चारों के आधार पर प्रमाण भी चार माने गए हैं 1.प्रत्यक्ष प्रमाण 2अनुमान प्रमाण3. उपमान प्रमाण 4. शब्द प्रमाण  आइए हम यथार्थ अनुभव के चारों उपभेदों के बारे में जान लेते हैं  प्रत्यक्ष यथार्थ अनुभव = प्रत्येक इंद्रिय का उसके विषय से साक्षात् संबंध होने पर जो ज्ञान प्राप्त होता है वह यथार्थ अनुभव प्रत्यक्ष कहलाता है जैसे घड़े को आंख से देखने पर यह घड़ा है इस प्रकार का ज्ञान होना प्रत्यक्ष यथार्थ अनुभव है।  अनुमति यथार्थ अनुभव = अनु अर्थात बाद में अर्थातप्रत्यक्ष ज्ञान के प...

तर्कभाषाTarkbhasha केशवमिश्र#न्यायदर्शन

1. सांख्यतत्वकौमदी कस्य रचनाऽस्ति? -वाचस्पति मिश्रस्य 2.तर्ककौमुद्या रचनाकार:? -लौगाक्षिभास्करः 3.न्यायसूत्रषु कस्य खण्डनं क्रियते? -शून्यवादस्य 4.न्यायः ईश्वरं कथितवान? -परमात्मा 5.गौतमस्य अपरनामः? -अक्षपादः 6.तर्कभाषाया:रचयिता कः? -केशवमिश्रः 7.ज्ञातविषयं ज्ञानं.....? -स्मृतिः 8.संस्कारमात्रजन्यं ज्ञानं काः? -स्मृतिः 9.स्मृतिव्यतिरिक्तं ज्ञानं किम्? -अनुभवः  10.किम् अनुमानं? -लिड्गपरामर्शोऽनुमानम् 11अनुमानं कतिविधम्? -द्विविधम(स्वार्थानुमानं,परार्थानुमानं) 12.अनुमानस्याधारोऽस्ति? -व्याप्तिसम्बन्धः 13.व्याप्तिरस्ति? -विशिष्टसम्बधः 14.न्यायदर्शने पदार्थानां सड्ख्यास्ति? षोडश: 15.कतिद्रव्यानि? नव 16.पृथिवी कतिधा? -द्विधा(नित्या,अनित्या) 17.नित्या पृथिवी का? -परमाणुरूपा 18.अनित्या पृथिवी का? -कार्यंरूपा 19.का पृथिवी? -गन्धवती 20रूपरहितस्पर्शवान् कः? -वायुः 21वायुः कतिविधः? -द्विविधः 22शब्दगुणकम् किम्? आकाशम् 23 सामान्यं कतिविधम्? -द्विविधम्(परम्,अपरम्)  24.कति विशेषः? -अनन्तः 25.समवायः कतिविधः -1 26.अभावः कतिविधः -पञ्चविधः 27भावभिन्नत्वं..........? -अभावः 28.प्राचीन न्याय परम्पर...

हे कृष्ण....मुझे अर्जुन बना दीजिए#कविता

 हे कृष्ण.... मुझे अर्जुन बना दीजिए भूलबैठा हुआ कर्तव्यो को अपने...  उचित अनुचित  का ज्ञान करा दीजिए हे कृष्ण.... मुझे अर्जुन बना दीजिए मोह के धागो में मै क्यो इस तरह लिपट चुका हूँ काटना चाहता हूँ .....पर नही काट रहा हूँ हे कृष्ण..... मुझे अब तो स्वतंत्र कीजिए  हे कृष्ण..... मुझेअर्जुन बना दीजिए। अब तक बहुत युद्ध लडे़ पर इस युद्ध से क्यों भाग रहा हूँ अपने ही अस्त्र-शस्त्र क्यो पटक दिए है मैने हे कृष्ण..... कुछ तो बता दीजिए हे कृष्ण..... मुझे अर्जुन बना दीजिए। लक्ष्य ओझल हो रहा है निशाना कैसै लगाऊँ पहले जैसी एकाग्र दृष्टि कैसे मैं पाऊँ हे कृष्ण...मछली की आँख मुझे दिखा दीजिए हे कृष्ण...मुझे अर्जुन बना दीजिए।  अपनी शक्ति को भलीभाँति जानता हूँ फिर भी  विचारो-के चक्रव्यूह से कैस निकल नही पा रहा हूँ  मेरे सखा ...मेरा साथ दीजिए हे कृष्ण.....फिर से खुद को सारथी बना लीजिए  हे कृष्ण....मुझे अर्जुन बना दीजिए    यह भी पढे़ Motivational lines जिंदगी#zindagi धन्यवाद

संस्कृत साहित्य के महत्त्वपूर्ण 50 प्रश्न#संस्कृत जाँच प्रश्न पत्र#sanskrit test paper

 1.  हर्षचरिते  हर्षवर्धनस्य भगिनी का  अस्ति ?  राज्यश्री: 2.सम्राज्ञी विलासवती कस्य माता आस्ति? चन्द्रापीडस्य 3.मेघदूते अंड्गीरस:भवति? विप्रलम्भ श्रृंगार 4.पुण्डरीकस्य अनन्य मित्रम् अस्ति? कपिञ्जलः बाणभट्ट#हर्षचरित#कादम्बरी 5.स्वप्नवासवदत्तस्य विदूषक: कः? वसन्तक: 6.स्वप्नवासवदत्तायां मन्त्री कः? यौगन्धरायण 7.पण्डितराजजगन्नाथमते काव्यस्य कति भेदा: स्वीकृता:? चत्वार: उत्तमोत्तम उत्तम मध्यम अधम् 8.स्वप्नवासवदत्तस्य नाटकस्य स्वप्नांक कः? पञ्चमः 9.दुःखं न्यासस्य रक्षणम् इति सूक्तियुक्तं नाटकमस्ति? स्वप्नवासवदत्तम् 10.शकारताडितां वसन्तसेनां मृत्युमुखात् कः मोचयति? संवाहक: 11.आर्जव हि कुटिलेषु नीति: इति सूक्तियुक्तं नाटकमस्ति? नैषधीयचरितम् 12.स्त्री स्वभावस्तु कातरःइति सूक्तियुक्तं नाटकमस्ति? स्वप्नवासवदत्तम् 13.कामी स्वतां पश्यति इति सूक्तियुक्तं नाटकमस्ति? अभिज्ञानशाकुन्तलम् 14.सर्वत्रार्जवं शोभते इति सूक्तियुक्तं नाटकमस्ति? मृच्छकटिकम् 15.ध्वन्यालोकः कस्य कृतिरस्ति? आनन्दवर्धनस्य 16.काव्यप्रकाशे कति परिच्छेदाः विद्यन्ते? 10 17.उत्तररामचरिते मैत्रावरूणि:पदं कस्य कृत...