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संस्कृत व्याकरणात्मक टिप्पणियाँ

 वसुधैव=वसुधा+एव = वृद्धि संधि

यत्रैकता=यत्र +एकता =वृद्धि संधि

देशः=दिश् धातु+घञ् प्रत्यय

देवता= देव+तल्+टाप्

बलवान=बल+मतुप प्रत्यय

रक्षितुं=रक्ष् धातु+तुमुन प्रत्यय

प्रभवति=प्र उपसर्ग+भू धातु+लट् लकार प्रथमपुरुष,एकवचन

एकता=एक+तल् प्रत्यय+टाप् प्रत्यय

जायन्ते=जन् धातु ,

( आत्मनेपदी )लट्लकार प्रथम पुरूष,बहुवचन

भवेयुः=भू धातु, विधिलिड्ग लकार,प्रथम पुरुष,बहुवचन

गीतम्=गा धातु+क्त प्रत्यय

ऋग्वेदेऽपि=ऋग्वेद+अपि

=पूर्वरूपसंधि

तेषां=तत् शब्द षष्ठी विभक्ति,बहुवचन

विचारा: वि उपसर्ग+चर् धातु +घञ् प्रत्यय=विचार:

विचारः शब्द से प्र.विभक्ति का बहुवचन

युक्ता=युज् धातु+क्त प्रत्यय, प्रथमा वि का बहुवचन

शान्तिश्च =शान्तिः+च (विसर्ग संधि)

देशाग्रणी =देश+अग्रणी (वृद्धि संधि)

 महिमा =महत् शब्द से इमनिच प्रत्यय करने पर, यह पुल्लिंग शब्द है।

भावनया=भावना शब्द से,तृतीया वि.का एकवचन,स्त्रीलिंग

उन्नति= उद उपसर्ग +नम् धातु +क्त्तिन प्रत्यय

जिघ्रेत=घ्रा धातु, लट् लकार,प्रथम पुरुष,एकवचन

अस्मरन्= स्मृ धातु, लड़ लकार,प्रथम पुरुष,बहुवचन







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