गुरुवार, 25 जून 2020

कविता -बारिश कीबूँदे या अनमोल मोतियो का हार

 


ये आसमां आज इतना उदार लग रहा है इससे बरसती अनगिनत बूँदे
बूँदे नही ,अनमोल मोतियो का हार लग रहा है
यह असीम आसमां आज इन अनमोल मोतियो को
 क्यो डुलका रहा है।
लगता है किसी खुशी मे इन मोतियो को लुटा रहा है।
कही ये मोती पेडो के पत्तो पर है,कही किसी की पलको
पर कही किसी की मुट्ठी मे है, कही किसी के अलको पर
सच मे ये मोती मानो सभी को धनवान कर रहे है
क्यूँकि दिल का पूरा हर अरमान कर रहे है।
आज आसमां से बरस रहे इन मोतियो ने 
इस धरा का दुलहन सा श्रॄंगार किया है।
जैसे मन ही मन कोई बडा आभार किया है।
मस्तक पर  चिन्ता की लकीरे जो गहरी हो रही थी
 वो देखो सिमटसी गई है ।
वर्तमान हालातो से बेरंग हुई आज जिन्दगी 
इन्द्रधनुष सी बन गई है।

धन्यवाद
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कविता लाँकडाउन और मजदूरजन
कविता -कोरोनारूपी राक्षस से रण

शुक्रवार, 12 जून 2020

Lockdown#कविता का शीर्षक:"वर्तमान परिस्थितियों में मजदूरो की व्यथा

कविता का शीर्षक:"वर्तमान परिस्थितियों में
 मजदूरो की व्यथा


अरे, मेरे मजदूर भाईयो की व्यथा आज बढ़ गई है।
 कोरोना की भयावहता उनके ही घर कर गई है।
जिनके हाथों में काम करते करते पड़ जाते थे छाले ।
आज  उन हाथों में न छाले रहे न ही काम रहा ।।
छालों ने भी कभी नहीं दिया इतना दर्द जितना
 आज बिन छालो के पा रहे हैं ।
 देखो, आज उनकी आंखों में बिन छालों के भी 
असहनीय दर्द के आंसू आ रहे हैं।
 आज वह रोटी के लिए दूसरों के मुंह ताक रहे हैं 
और बिन खाये पीये ही दिन काट रहे है।।
सोते जागते वर्तमान की चिन्ता सता रही है।
देखो, एक श्रमदाता की गर्भवती पत्नी प्रसव पीडा़ से
 कराह रही है ।
हम तुम जैसै लोग आने वाले बच्चे के भविष्य के
 सपनो से सने है।
 जबकि उस धरती पुत्र का यही सपना है 
कि उसका आने वाला लाल काल का ग्रास न बने ।।
दूसरो के रहने के लिए ठिकाना बनाते है
 पर आज अपना ठिकाना ढूंढ रहे है।
जो आए थे गांव से शहरों की और बेहतर
 जिंदगी का सपना सजाने के लिए।
  वह लौट रहे हैं आज शहरों से गांव की ओर
 अपनी जिंदगी  बचाने के लिए
  अपने परिजनों के संग हाथों में अपने बचे कुचे सामान का बीड़ा लिए और दिल में समुद्र सी अथाह पीड़ा लिए।।         
कुछ तो अपने घर पहुंच गए ,कुछ ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
देखकर उनकी कुर्बानी मेरे अंतर्मन ने मुझे झकझोर दिया।।

हे ईश्वर ,मेरे भारत के कर्मवीर सपूतों पर दया का हमेशा हाथरखना
 जब छूटने लगे साथ सभी का, फिर भी अपने साथ रखना।  उनकी दो वक्त की रोटी कभी ना छिने यह ध्यान रखना।
 जोड़ने पड़े न कभी हाथ अमीरों की दहलीजो पर उन्हे
उनके अमूल्य आत्मसम्मान का मान रखना।

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धन्यवाद
👏

मंगलवार, 9 जून 2020

संस्कृत में कारक प्रकरण #संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर#karak in sanskrit

 संस्कृत में कारक प्रकरण
 #संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
#karak in sanskrit

मोक्षाय हरिं भजति
○मुक्तये हरिं भजति
○काव्यं यशसे भवति
 उपरोक्त वाक्यों में कौन सी विभक्ति है?
चतुर्थी विभक्ति
○अगर किसी उद्देश्य, प्रयोजन से कोई कार्य किया जाता है 
तो उसमें चतुर्थी विभक्ति होती है
 "तादर्थ्ये चतुर्थी वाच्या" सूत्र के अनुसार

 भक्ति ज्ञानाय कल्पते, सम्पद्यते वा
  इस वाक्य में चतुर्थी  विभक्ति किस सूत्र से है?
  क्लृपि सम्पद्यमाने च सूत्रानुसार
 समर्थ अर्थ वाली धातुओं के प्रयोग  में चतुर्थी विभक्ति होती है।

 वाताय कपिला विद्युत्।( पीली बिजली 
आंधी की सूचक है।)
तापाय अतिलोहिनी। (लाल बिजली अत्यंत धूप
 कीसूचक है)
 इन वाक्यों में चतुर्थी विभक्ति किस सूत्र से हुई है?
 उत्पातेन ज्ञापिते वा सूत्रानुसार शुभ अशुभ को बताने में, 
पृथ्वी आदि के उत्पादों को सूचित करने में
 चतुर्थी विभक्ति होती है।

दैत्येभ्यो हरि अलम्। इस वाक्य  में चतुर्थी विभक्ति
 किस शब्द के कारण हुई है?
अलम्
 यहां अलम् शब्द का अर्थ निषेध न होकर पर्याप्त है क्योंकि निषेध अर्थ में अलम् का प्रयोग होने पर
 चतुर्थी के स्थान पर तृतीया विभक्ति आएगी

 सज्जना: दुष्टेभ्य: क्रुध्यति
हरये असूयति ईर्ष्यति वा 
उपर्युक्त वाक्यो में  किसकी सम्प्रदान संज्ञा हुई है?
 सज्जन और हरि की 
जिसकी सम्प्रदान संज्ञा होती है उसमे चतुर्थी वि. लगती है।

सः.........अभिक्रुध्यति(हरि:)
सः.............क्रुध्यति(हरि)
रिक्त वाक्यो की पूर्ति कीजिए
सः हरिम् अभिक्रुध्यति (क्रुधद्रुहोरूपसृष्टयोः कर्म सूत्र से)
सः हरये क्रुध्यति( क्रुधद्रुहेर्ष्यासूयार्थानां यं प्रति कोपः)

ध्यान रखने योग्य बात यह है कि क्रुध,द्रुह,ईष्य,असूय आदि धातुओ में  उपसर्ग लगने पर चतुर्थी विभक्ति के स्थान पर द्वितीय विभक्ति आएगी 

गोपी स्मरात् कृष्णाय हनुते, शलाघते, तिष्ठते, शपते 
इस वाक्य मे चतुर्थी वि.किस सूत्र से है?
श्लाघहनुड्.स्थाशपां ज्ञीप्समान सूत्र से

विप्राय गां प्रतिश्रॄणोति, आश्रॄणोति प्रति या आ उपसर्गपूर्वक 
श्रु  धातु के योग में जिससे प्रतिज्ञा की जाती है
 उसमें संप्रदान कारक  किस सूत्र से होता है?

प्रत्याड्. भ्यां श्रुवः पूर्वस्य कर्ता सूत्र से

 दोस्तों से पूर्व में भी संस्कृत कारक प्रकरण  से संबंधित पोस्टस लिखी जा चुकी है अधिक जानकारी और अभ्यास हेतु आप नीचे दी जा रही लिंक पर क्लिक कर उन्हें पढ़ सकते हैं 


सोमवार, 8 जून 2020

संस्कृत में कारक प्रकरण# संस्कृत व्याकरण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

संस्कृत में कारक प्रकरण# संस्कृत व्याकरण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

/> ○भुव प्रभव:इस सूत्र से कौनसी विभक्ति होती है?
पंचमी विभक्ति

○"प्रकृत्यादिभ्य उपसंख्यानम्" इस वार्तिक से कौनसी विभक्तिका विधानहै?
तृतीया विभक्ति

○वारणार्थानामीप्सित: सूत्र से किस विभक्ति का विधान है
पंचमी विभक्ति

○ माता गुरुतरा .........(भूमि) रिक्त स्थान मे सही विभक्ति है?
भूमेः ,पंचमी वि.

○..............सुरेश: श्रेष्ठतर:(रमेश) रिक्त स्थान मे सही विभक्ति है?
रमेशात् ,पंचमी वि.
कारण---तरप्, ईयसुन प्रत्ययान्त  शब्दो से दो वस्तुओ व्यक्तियो की तुलना होती है। जिससे श्रेष्ठता बताई जाती है उसमें पंचमी विभक्ति लगती इसलिए रमेश में पंचमी विभक्ति लगी है

समुद्रातपुरी क्रोशे क्रोशम् अस्ति
○वनात् ग्रामो योजनं योजने वा अस्ति
○ इन दोनो विभक्तियो मे मार्गवाची,और दूरी वाले शब्दो में प्रथमा और सप्तमी वि.किस सूत्र से हुई है?
तद्युक्ताध्वनः प्रथमासप्तम्यौ सूत्र से

○ वृक्षात् पत्राणि प्रभवन्ति (वृक्षो से पत्ते निकलते है) यहाँ पंचमी वि. किस सूत्र से है?
भुव प्रभवः सूत्र से

शिक्षकात् व्याकरणं पठति  यहाँ शिक्षक कीअपादान संज्ञा किस सूत्रसे हुई है?
आख्यातोपयोगे सूत्रसे

○......निर्लीयते कृष्ण: (मातृ: )? रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
मातुः

○भीत्रार्थानां भयहेतुः सूत्र से किस संज्ञा का विधान है?
अपादान संज्ञा का

मूषक: मार्जारात् विभेति
○आरक्षकाः चौरात् त्रायन्ते
○ दोनों विभक्तिओं में अपादान संञा होकर पंचमी किस सूत्र से हुई है?
भीत्रार्थानां भयहेतुः

○   जुगुप्सा, विराम ,प्रमादअर्थ वाली धातुओ से वाक्य में कौन सी विभक्ति होती है?
पंचमी विभक्ति

○कृष्णात् भिन्न इतरो वा,वनात् आरात्,  चैत्रात् पूर्वः फाल्गुन , ग्रामात् दक्षिणा, दक्षिणाहि ग्रामात्   इन सभी वायो में पंचमी विभक्ति विधायक सूत्र कौन सा है?
अन्यारादितरर्ते दिक्शब्दाचूत्तरपदाजाहियुक्ते सूत्र से  पंचमी विभक्ति है।

○"तिलेभ्य: प्रतियच्छति माषान् "वाक्य मे पंचमी विभक्ति किस सूत्र से है?

○"प्रतिनिधिप्रतिदाने च यस्मात्" सूत्र से प्रतिनिधि और प्रतिदान अर्थ में प्रति कर्मप्रवचनीय संज्ञक है अतः प्रति के योग में पंचमी विभक्ति होती है

कारक प्रकरण पर पूर्व मे भी जानकरी दी जा चुकी है इससे संबंधित अन्य अभ्यास हेतु  नीचे दी जा रही लिंक पर क्लिक करें

संस्कृत में कारक प्रकरण #karak in sanskrit#sanskrit grammar
संस्कृत में कारक प्रकरणkarak in sanskrit#sanskrit grammar
/>
धन्यवाद

शुक्रवार, 15 मई 2020

#poem on conditions in lockdown#मजदूरो की स्थिति


  कविता- लाँकडाउन और मजदूर जन

देखो, मेरे देश की इक तस्वीर जरा..
एक तरफ कोरोना की बडी जंग तो...
दूसरी तरफ मजदूर भाईयो की बेबसी ,बदहाली है।
जो गए थे शहरो की तरफ पैसा कमाने।
आज उनके पैरो मे पड़ गए छाले
 लेकिन हाथो मे न कमाई है।।

बनाते है जो बडी बडी महलो सी इमारते 
दूसरो के रहने को.. 
वो किराये के घर में रहने की भीजद्दोजहद कर रहे है
 ऐसी किस्मत क्यो उन्होने लिखाई है।।   

कविता- लाँकडाउन और मजदूर जन

चल पडे है अपने  गाँवो की और अपने पैरो के भरोसे
न ज्यादा शिकवा शिकायत किसी से
 लडते अपने आप आत्मसम्मान की अथक लडा़ई है।।

नही फिक्र अपने पथ के शूलो से, 
शूलो को भी फूल समझ कर चल पडे है।
इनके भीतर छिपे हिम्मत के जज्बे ने 
सच्चे कर्मवीर की परिभाषा हमे समझाई  है।।




विशेष  इस छोटी सी अपनी रचना के माध्यम से  हिन्दुस्तान के सभी कर्मवीर मजदूरो को,उनके हौसलो को सलाम करती हूँ आप ही हमारे हिन्दुस्तान की मजबूत नींव है।

रविवार, 19 अप्रैल 2020

Aaj ki quotes#प्रकृति की सता#poem on lockdown

प्रकृति की सता#poem on lockdown

इस महामारी ने अहम से आसमान मे
 उडने वालो को भी जमीन पर ला दिया।
जो भूल गये थे घर का रास्ता 
उसे घर का आंगन याद दिला दिया
जो आज तक नियम कानूनो को
 अपने हाथ की कटपुतली समझते रहे।
आज कुदरत की मार ने उन्हे जंजीरो मे लिपटा दिया।
 प्रकृति पर अत्याचार कर प्रभुत्व समझने वाले 
दानवो को नही पता कि खुद उसका अस्तित्व कितना है।
प्रकृति से अपने को ऊँचा समझा...
 तो बेशक उसका अस्तित्व मिटना है।

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष#lockdown

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष


स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालूम चल रहा है।वे अब तक अनजान बने बैठे थे कि घर में सभी कुछ अच्छा है किसी आवश्यक सुविधा का अभाव नही है।   लॉक डाउन का समय पूरा होगा तो अपने घर को पहले से बेहतर करने की कोशिश करेंगे। आज तक तो उन्होंने घर की महिलाओं की बातों पर शायद ध्यान नहीं दिया होगा कि उन्हें कितनी तकलीफ होती है सुविधाओं के अभाव में। जिस व्यक्ति नेआज तक किचन में चाय तक नहीं बनाई थी बस जब चाय पीने की इच्छा हुई अपनी पत्नी को आवाज लगा दी  चाहे वह किसी जरूरी काम में ही क्यो न लगी हुई हो। आज वह घर का खाना बनाने में अपनी पत्नी की मदद कर रहे है। अब जान पाएंगे कि एक महिला इतने लोगों की फरमाइशो को सालो से कैसे पूरा करती होगी और अभी तक कर रही है।  वो भी बिना किसी स्वार्थ के।अब तक उसकी थकान को कोई क्यू नही देख पाये जब कि एक महिला अपने घर के पुरुषो के काम से लौटते ही पानी का गिलास भी हाथ मे देती है,जल्दी से चाय बनाती है और पूछती है कि किसी तरह की परेशानी तो नही हुई आने जाने में ।आज का दिन कैसा रहा जब कि पुरुषो ने इतने सालो में कितने दिन पूछा होगा ? जरा सोच कर बताइए🤔🤔🤔। अब उम्मीद करते है कि बैठे बैठे अपनी पत्नी को आर्डर देना शायद बंद हो जाए और अपने छोटे-छोटे कामों को स्वयं करने की आदत का विकास हो। एक बडा परिवर्तन बच्चो के प्रति नजरिये को लेकर भी आने वाला है।  जो माता पिता बच्चों को नासमझ समझते हैं उन्हें बच्चों की समझदारी का एहसास होगा उन्हें भी पता चलेगा कि बच्चों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है  बच्चों की कीमत  उनकी उनकी क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर आंकना गलत है। वर्किंग पेरेन्ट्स को अपने बच्चो की योग्यताओं का, रुचियो़, उनकी उनकी आवश्यकताओं का पता चल पाएगा और जिससे भविष्य में वह अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से नहीं करेंगे और ना ही उनके क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर उनके भविष्य का निर्धारण करेंगे । माता पिता के साथ इस समय बिताए गए अच्छे पलो के परिणामस्वरूप  बच्चे अपने माता-पिता के और करीब आएंगे उनकी झिझक कम होगी जिससे भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी या तनाव होने पर वे वे बेझिझक अपनी बात उनसे कह पाएंगे । हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स की सुसाइड केसेज में कमी होगी। यह भी हमारे लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा।

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सारांश  यह थी 21 दिनों के लाँकडाउन के कुछ सकारात्मक पहलू शायद इन सभी से आप भी सहमत होंगे। अब हम सबको हर हर पल को डर-डर बिताने की बजाय अपने लिए ,अपने परिवार, अपने समाज ,देश और संपूर्ण विश्व के लिए बेहतर बनाने की सोच रखनी चाहिए ।


मिलकर जीत ही लेंगे हम यह जंग
 कोरोना को नहीं डालने देंगे अपने रंग में भंग ।
इतनी हिम्मत नहीं की है हमसे जीत पाएगा वो
 क्योंकि अपनों की सच्ची  दुआएं हैं हमारे संग।।

बुधवार, 1 अप्रैल 2020

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष


स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालूम चल रहा है।वे अब तक अनजान बने बैठे थे कि घर में सभी कुछ अच्छा है किसी आवश्यक सुविधा का अभाव नही है।   लॉक डाउन का समय पूरा होगा तो अपने घर को पहले से बेहतर करने की कोशिश करेंगे। आज तक तो उन्होंने घर की महिलाओं की बातों पर शायद ध्यान नहीं दिया होगा कि उन्हें कितनी तकलीफ होती है सुविधाओं के अभाव में। जिस व्यक्ति नेआज तक किचन में चाय तक नहीं बनाई थी बस जब चाय पीने की इच्छा हुई अपनी पत्नी को आवाज लगा दी  चाहे वह किसी जरूरी काम में ही क्यो न लगी हुई हो। आज वह घर का खाना बनाने में अपनी पत्नी की मदद कर रहे है। अब जान पाएंगे कि एक महिला इतने लोगों की फरमाइशो को सालो से कैसे पूरा करती होगी और अभी तक कर रही है।  वो भी बिना किसी स्वार्थ के।अब तक उसकी थकान को कोई क्यू नही देख पाये जब कि एक महिला अपने घर के पुरुषो के काम से लौटते ही पानी का गिलास भी हाथ मे देती है,जल्दी से चाय बनाती है और पूछती है कि किसी तरह की परेशानी तो नही हुई आने जाने में ।आज का दिन कैसा रहा जब कि पुरुषो ने इतने सालो में कितने दिन पूछा होगा ? जरा सोच कर बताइए🤔🤔🤔। अब उम्मीद करते है कि बैठे बैठे अपनी पत्नी को आर्डर देना शायद बंद हो जाए और अपने छोटे-छोटे कामों को स्वयं करने की आदत का विकास हो। एक बडा परिवर्तन बच्चो के प्रति नजरिये को लेकर भी आने वाला है।  जो माता पिता बच्चों को नासमझ समझते हैं उन्हें बच्चों की समझदारी का एहसास होगा उन्हें भी पता चलेगा कि बच्चों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है  बच्चों की कीमत  उनकी उनकी क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर आंकना गलत है। वर्किंग पेरेन्ट्स को अपने बच्चो की योग्यताओं का, रुचियो़, उनकी उनकी आवश्यकताओं का पता चल पाएगा और जिससे भविष्य में वह अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से नहीं करेंगे और ना ही उनके क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर उनके भविष्य का निर्धारण करेंगे । माता पिता के साथ इस समय बिताए गए अच्छे पलो के परिणामस्वरूप  बच्चे अपने माता-पिता के और करीब आएंगे उनकी झिझक कम होगी जिससे भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी या तनाव होने पर वे वे बेझिझक अपनी बात उनसे कह पाएंगे । हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स की सुसाइड केसेज में कमी होगी। यह भी हमारे लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा।
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सारांश  यह थी 21 दिनों के लाँकडाउन के कुछ सकारात्मक पहलू शायद इन सभी से आप भी सहमत होंगे। अब हम सबको हर हर पल को डर-डर बिताने की बजाय अपने लिए ,अपने परिवार, अपने समाज ,देश और संपूर्ण विश्व के लिए बेहतर बनाने की सोच रखनी चाहिए ।


मिलकर जीत ही लेंगे हम यह जंग
 कोरोना को नहीं डालने देंगे अपने रंग में भंग ।
इतनी हिम्मत नहीं की है हमसे जीत पाएगा वो
 क्योंकि अपनों की सच्ची  दुआएं हैं हमारे संग।।

रविवार, 29 मार्च 2020

कोरोना रूपी राक्षस से रण #कोरोना पर कविता #corona#lockdown

कविता का शीर्षक-"नही छोडेंगे इस रणको बीच मेंअधूरा
 
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच मे अधूरा
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।
 यहाँ न किसी धर्म,जाति,संप्रदाय,
 अमीर,गरीबी का कवच काम नहीं आएगा
 यह रण तो हमारी एकता की मिसाल बन जाएगा ।
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा 
सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा। 
 यहां काम नहीं आएगी कोई राजनीतिक घृणा
 यह रण तो राजनीति के दलदल से दूर ले जाएगा।
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा । 
 यहां काम नहीं आएगी आरोप-प्रत्यारोपो की झड़ी 
 यह रण तो भाईचारे और परोपकार से जीता जाएगा।
 नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा 
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा 
 न हीं चलेगी यहां तलवारे,न ही धनुष बाण चलेंगे 
 न ही गिरने देंगे लहू की एक बूंद इस धरा पर
 यह रण तो इंसानियत की कसौटी पर लड़ा जाएगा। 
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा 
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।
 न हीं कर पाएगा अपनों को अपनों से दूर 
यह रण तो अपनेपन की पहचान कराएगा। 
 माना इतिहास में हुए थे रण अनेकों 
लेकिन यह रण सबसे अलग है देखो । 
यहाँ मानवता की जीत है, 
एक दूसरे से सच्ची प्रीत है
 भारतीयता की सुरीत है, 
जहां गा रहा हर कोई जागृति का गीत है।

 उम्मीद करती हूँ कोरोना रूपी राक्षस पर विजय की 
यह कविता आपको पसंद आएगी
 हमे पूर्ण विश्वास है हम इस भयावह परिस्थिति से जल्दी ही बाहर निकलेंगे 
बस तक हमे धैर्य के साथ २१दिन के 
लाँकडाउन के व्रत को पूरा करना है 
बहुत जल्द परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल होंगी।
 माँ हमारे सारे कष्टो का पूर्णत दमन करेंगी।

शनिवार, 28 मार्च 2020

सुविचार#शब्दो की ताकत#golden lines in hindi#motivation

दोस्तों में कोई दार्शनिक नहीं हूँ न ही कोई कवि और न ही महान लेखक हूं बस अपने दिल में उठ रही भावनाओं को कलम के माध्यम से कागज पर कभी कभार उतार देती हूं मुझे अपने अनुभवों को साझा करने में संतुष्टि का अहसास होता है यही मेरे लिए बहुत है।


१.अगर भावो की गहराई समझ मे आ रही हो तो शब्दो कोष का गहरा होना  आवश्यक नही

२.आपका एक एक अक्षर दिव्य हो जाता है यदि वह किसी के अंदर छाए तिमिर की परतो को खोलकर उसके सच्चे स्वभाव को सामने लाने में मदद करता है। 

३आपके शब्दों को किसी के लिए वेदना नही, प्रेरणा बनाइए 

४आपकी शब्दों में छुपे हुए भावनाओं की की कीमत ही है कि किसी के शब्द दवा बन जाते हैं क्यों किसी के शब्द केवल हवा बन जाते हैं। 

दोस्तों यदि आपको ये विचार अच्छे लगे हो तो लाइक करें और अपने दोस्तों को शेयर करें।

धन्यवाद

मंगलवार, 17 मार्च 2020

Net#set#jrf sanskrit exam#charvak darshan#चार्वाक दर्शन

लोकायत दर्शन#चार्वाक दर्शन#बार्हस्पति  दर्शन से सम्बन्धित तथ्य
चार्वाक दर्शन के संस्थापक बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए इसे बार्हस्पति दर्शन भी कहते है।

इसी का प्राचीन नाम लोकायत दर्शन है।

चार्वाक दर्शन सुख को ही जीवन का परम उद्देश्य मानता है।

 यह भौतिकता वादी दर्शन है जो वेदों की निंदा करता है।

यह अग्निहोत्र और श्राद्ध का निषेध करता है

चार्वाक दर्शन की दृष्टि में प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है।

चार्वाक दर्शन  ईश्वर और आत्मा का निषेध मानता है।

चार्वाक दर्शन काम को ही एकमात्र पुरुषार्थ मानता है

 चार्वाक दर्शन की दृष्टि में मृत्यु ही मोक्ष है।

चार्वाक दर्शन चार तत्वों को मानता है।👉 पृथ्वी जल तेज वायु

यह आकाश को तत्व नहीं मानता है।

चार्वाक दर्शन के सिद्धान्त
 प्रत्यक्ष प्रमाणवाद- चार्वाक दर्शन प्रत्यक्ष दिखाई देने वाली वस्तुओं को ही अंतिम सत्य मानता है यह अनुमान शब्द आदि प्रमाणो को नहीं मानता है।

 भौतिकतावा   - यह सांसारिक वस्तुओं को अत्यधिक महत्व देता है

भूत चैतन्य वाद  - पृथ्वी जल तेज वायु  इन 4 महा भूतों के सहयोग से ही शरीर में चेतनता उत्पन्न होती है यह कोई अलौकिक वस्तु नहीं है


ऐहिकसुखवाद- चार्वाक दर्शन  पृथ्वीलोक के सुख को ही महत्व देता है इसके अनुसार जो कुछ है वह इसी  पृथ्वी पर है इसलिए व्यक्ति को जब तक जीवित है  सुख पूर्वक रहना चाहिए इस संबंध में कहा भी गया है जब तक जियो सुख पूर्वक जियो   चाहे इसके लिए  किसी व्यक्ति से ऋण भी लेना पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए क्योंकि यह मानव जीवन फिर हमें नहीं मिलेगा। इसलिए जब तक रहो सुख पूर्वक रहो 

यावजीवेत् सुखम् जीवेत् ऋणम् कृत्वा घृतं पिबेद्
विशेष -
चार्वाक दर्शन,जैन दर्शन,बौद्धदर्शन ये तीनों नास्तिक दर्शन माने जाते हैं।

 चार्वाक दर्शन अवैदिक दर्शन में प्राचीनतम दर्शन है।

 यदि आप सभी को यह पोस्ट ज्ञानवर्धक लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले ताकि उन्हे भी परीक्षा की तैयारी में मदद मिले


शनिवार, 14 मार्च 2020

net #set#jrf exam sanskrit#sanskrit exam


Important questions for net#set#jrf exam sanskrit#sanskrit exam
sanskrit exam
1⃣मनुस्मृति के अनुसार क्रोध से उत्पन्न होने वाले  दोषो  की संख्या कितनी है?
 ✔️ 8

✏️दूसरों की चुगली करना, दुस्साहस करना, द्रोह करना, ईर्ष्या करना,  दूसरों के गुणों में दोष निकालना दूसरे के धन का अपहरण करना, वाणी में कठोरता लाना, निरपराधी को मारना     
2⃣ मनुस्मृति के अनुसार काम से उत्पन्न होने वाले दोषों की संख्या कितनी है?
✔️ 10

✏️शिकार करना, जुआ खेलना ,दिन में सोना ,दूसरे की निंदा करना स्त्रियो मे आसक्ति,नशा करना, नाचना ,गाना ,बजाना ,व्यर्थ घूमना     

3⃣ काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले दोषों का मूल कारण क्या है?
 ✔️ लोभ

4⃣संकेत ग्रह के कितने साधन बताए गए हैं
✔️8

5⃣शूद्रक द्वारा रचित मृच्छकटिकम् प्रकरण मे संस्कृत बोलने वाले  पात्रों की संख्या है ?
✔️ ६

6⃣स्वल्पोछिष्टस्तु तद्हेतु़....... विस्तार्यनेकधा: । रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए? 
 ✔️बीजं

✏️ दशरूपककार धनञ्जय ने अपनी रचना दशरूपक मे  पाँच अर्थप्रकतियाँ बताई है  

बीजं,  बिंदु, पताका, प्रकरी और कार्य  
    

7  वर्णस्वराद्युच्चारणप्रकारो यत्र शिक्ष्यते उपदिश्यते सा शिक्षा"  शिक्षा के संबंध में यह परिभाषा किसने दी है ? 

✔️सायणाचार्य ने 

 

8.शिक्षा के कितने अंग है

✔️? 6 

✏️वर्ण,स्वर,मात्रा,बल,साम,सन्तान

 

9.रामायण पर वैद्यनाथ  दीक्षित ने कौन सी टीका लिखी?

  ✔️दीपिका

 

10. गोविंद राज ने रामायण पर कौन सी टीका लिखी ✔️रामायण भूषण 

 

नोट रामायण पर 15वी,16वी,17वी शताब्दियो मे कई टीकाएँ लिखी गई थी ।अत: इनकी भी जानकारी हमें होनी चाहिए क्योंकि परीक्षाओं में टीकाओ से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं इसलिए आप इनका अध्ययन करें 👇
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रामायण ग्रन्थ की टीकाएँ

11.गंगाअवतरण "की कथा रामायण के किस कांड में है? 

✔️बालकांड  35 वे सर्ग से 44 वे सर्ग तक 

12.ऋषि श्रॄंग आख्यान बालकांड के किस 

 सर्ग में वर्णित है?

✔️ 10वे सर्ग  से 15 वे सर्ग तक


 ✏️ मरुतोत्पति आख्यान बालकांड के 46 वे सर्ग से 47 
वे सर्ग तक

 ✏️ अहिल्या आख्यान बालकांड के  49 में

 सर्ग में है

 ✏️   शुनशेपाख्यान  बालकांड के 62 वे सर्ग में         
  read more👇रामायण महाकाव्य से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य#महषिवाल्मीकि की रामायण 
धन्यवाद
 उम्मीद करते है आप फिर  यहाँ से कुछ जानकारी पायेंगे



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मंगलवार, 3 मार्च 2020

मृच्छकटिकम् (प्रकरण) # संस्कृत साहित्य में शूद्रक की रचना#mrichchhakatikam

मच्छकटिकम् प्रकरण के सम्बन्ध में सामान्य तथ्य 

रचयिता---शूद्रक,
 अंक-10,
 रस-श्रृंगार,
नायक-चारुदत्त(एक निर्धन ब्राह्मण)  , नायिका --वसन्तसेना (एक गणिका)  चारुदत्त की पत्नी-धूता,  चारुदत्त का पुत्र- रोहसेन,  प्रतिनायक--शकार

,प्रकरण के नामकरण का आधार----** षष्ठ अंक **********                                             
प्रकरण के प्रत्येक अंक का शीर्षक इस प्रकार है----------
प्रथम अंक--अलंकार न्यास, द्वितीय अंक---धूतकर -संवाहक , तृतीय अंक----सन्धिच्छेद, चतुर्थ अंक---मदनिका-शर्विलक     पंचम अंक----दुर्दिन,  षष्ठ अंक---प्रवहण-विपर्यय,   सप्तम अंक--- आर्यकापहरण   अष्टम अंक---वसन्तसेना मोचन ,नवम अंक---व्यवहार, दशम अंक---संहार(उपसंहार)

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मृच्छकटिकम् प्रकरण#mrichchhkatikam# संस्कृत साहित्य


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