कभी चंचल मेघ बन बंजर धरा पर बरस लेता हूँ।
कभी शीतल पवन बन फिजाओं को महका देता हूँ।
कभी अविरल सलिल बन रास्ता बना लेता हूँ।
कभी बन आकाश सा अनंत गंभीर मैं हर शब्द में सुनाई देता हूँ।
हूँ कुदरत का अभिन्न रूप मैं, करिश्में सा दिखाई देता हूँ।
Shobha Srishti यह" संस्कृत विषय एवं प्रेरणासम्बंधित ब्लॉग है, Motivational and Education Category blog
जहाँ से आपको ज्ञान मिले, जो आपको अपने सपनो के करीब ले जाये,जो आपको अपने आप से रुबरू करवाये,आपके जीवन में छाये अँधकार को छाँटकर जीवन में एक नई रोशनी भर दे........उसी का नाम है गुरु
जरुरी नही जिसने आपको कुछ किताबें पढा़कर स्कूल,काँलेज में आपको अच्छे अंक लाने में मदद की हो,या फिर जिसने गुरु मंत्र दिया हो जिसे आप सुबह शाम मनके से जाप करते हो उसे ही गुरु कहा जाये..
सृष्टि में व्याप्त चेतन-अचेतन कुछ भी जो आपके ह्रदय में उससे मिली किसी प्रेरणा के प्रति आस्थावान बना दे, उसके प्रति सच्चे सम्मान के भाव जाग्रत करे , भटके जीवन को एक राह दिखाये जिसकी तलाश में आप न जाने कब से थे, आपके अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर जानने में आपकी मदद करे......सच्चे अर्थो में वही गुरु है......यदि इन अर्थों में देखा जाये तो गुरु को किसी सीमा में नही बाँधा जा सकता है।
जिस प्रकार ज्ञान असीमित है उसी प्रकार गुरु की परिभाषा असीमित है ज्ञान अनन्त है उसी प्रकार गुरु की महिमा भी अनन्त है........
ये सिर्फ और सिर्फ आपकी आस्था पर निर्भर है कि आप किसे गुरु की श्रेणी में रखते है....एक शिशुसे लेकर वृद्ध तक, चेतन से लेकर अचेतन तक गुरु की परिभाषा में आ सकते है.......
जिस प्रकार एक पत्थर भी भगवान हो सकता है उसी तरह जहाँ श्रद्धा से शीश झुक जाये वही गुरु के दर्शन भी हो सकते है........
गुरु पूर्णिमा के इस पावन महोत्सव पर माता- पिता,भाई-बहिन,मित्र,सहपाठी, कागज कलम,पुस्तके जिससे भी मैने जीवन में कुछ न कुछ अच्छा सीखा है ...उन्हे सादर धन्यवाद✍️🙏🙏
सभी को गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ
1)किसी भी हाल में हालात आपके मनोबल से बडे़ नही है।
किसी को हक नही जो आपके मनोबल को गिराये
न ही आपको हक है कि आप किसी के मनोबल को गिराये
2)जो चाहता बाँटना मुस्कुराहटे जमाने को
उसका मुस्कुराहट रूपी तिजोरी कभी खाली नही होती
3)कभी कोई आपके लिए खुदा तो
कभी आप किसी के लिए खुदा होते हो
क्यूकि आसपास है खुदा
दुनिया की इस भीड़ में कौन किसे पहचानता है।
जो रखता है काबिलियत दिलो को जीतने की
जमानाउसे ही जानता है।
इस दुनिया में जाने कितनी तरह के लोग बसते है
कोई लगा हुआ है अपनी तिजोरियाँ भरने,
तो कोई दोनो हाथो से खुशियाँ लुटा रहा है।
किसी का दिल पत्थर है, तो किसी का दिल
इंसानियत के लिए धड़क रहा है।
इंसानों की इस बस्ती में सच्चा इंसान मिलना भी कठिन सा है....
अगर फरिश्ता मिल जाये तो क्या कहना...
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धन्यवाद......✍️🙏
#कुछ हिन्दी कवितानही किया आज#खालीपन
चाहे पुरा दिन किसी काम में बिजी रहे लेकिन जब तक हम अपनी आत्मसंतुष्टि का कोई भी काम या कहे हाँबी के लिए समय नही देते तब एक खालीपन का भाव रहता है। सब की चाँइसेज अलग है कोई जब तक योगा नही करे उसे लग सकता है आज का दिन तो बेकार ही गया, लेकिन हो सकता किसी को यह खुशी गिटार बजाने में मिले, कोई नृत्य के द्वारा और कोई लेखन के माध्यम से आत्मसंतुष्टि प्राप्त करे,कोई पक्षियों को दाना डालकर, तो कोई कुछ समय दोस्तो से बतियाकर,कोई एकांत में समय गुजार कर अपने दिन को उद्देश्यपूर्ण और अच्छा बनाना चाहता है ताकि दिन के खत्म होने पर रात्रि मे सुकून से सो जाये यह मलाल नही रहे यार आज का दिन अच्छा नही था आज कुछ नही किया मैने पूरा दिन ऐसे ही निकल गया। जब तक हम कुछ समय अपने लिए नही निकाले लगता है कुछ नही किया आज इस पश्चाताप से अच्छा है जितना भी समय हम निकाल पाये अपने लिए निकाले जिन्दगी की भागदौड़ तो चलती रहेगी।
धन्यवाद🙏 इस सम्बन्ध में मेरे विचारों को पढ़ने के लिए बहुत
बहुत आभार
वसुधैव=वसुधा+एव = वृद्धि संधि
यत्रैकता=यत्र +एकता =वृद्धि संधि
देशः=दिश् धातु+घञ् प्रत्यय
देवता= देव+तल्+टाप्
बलवान=बल+मतुप प्रत्यय
रक्षितुं=रक्ष् धातु+तुमुन प्रत्यय
प्रभवति=प्र उपसर्ग+भू धातु+लट् लकार प्रथमपुरुष,एकवचन
एकता=एक+तल् प्रत्यय+टाप् प्रत्यय
जायन्ते=जन् धातु ,
( आत्मनेपदी )लट्लकार प्रथम पुरूष,बहुवचन
भवेयुः=भू धातु, विधिलिड्ग लकार,प्रथम पुरुष,बहुवचन
गीतम्=गा धातु+क्त प्रत्यय
ऋग्वेदेऽपि=ऋग्वेद+अपि
=पूर्वरूपसंधि
तेषां=तत् शब्द षष्ठी विभक्ति,बहुवचन
विचारा: वि उपसर्ग+चर् धातु +घञ् प्रत्यय=विचार:
विचारः शब्द से प्र.विभक्ति का बहुवचन
युक्ता=युज् धातु+क्त प्रत्यय, प्रथमा वि का बहुवचन
शान्तिश्च =शान्तिः+च (विसर्ग संधि)
देशाग्रणी =देश+अग्रणी (वृद्धि संधि)
महिमा =महत् शब्द से इमनिच प्रत्यय करने पर, यह पुल्लिंग शब्द है।
भावनया=भावना शब्द से,तृतीया वि.का एकवचन,स्त्रीलिंग
उन्नति= उद उपसर्ग +नम् धातु +क्त्तिन प्रत्यय
जिघ्रेत=घ्रा धातु, लट् लकार,प्रथम पुरुष,एकवचन
अस्मरन्= स्मृ धातु, लड़ लकार,प्रथम पुरुष,बहुवचन
दोस्तों, मेरी द्वारा स्वरचित यह कविता दुनिया की प्रत्येक❤माँ❤के चरणों में समर्पित है।आप सबका आशीर्वाद हमारे जीवन को और महकाये ।
आप सभी को कोटि कोटि वन्दन✍️🙏🙏🙏🙏
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| कविता=माँ गागर में सागर |
❤🎁 "माँ गागर में सागर"🌹🎁
" माँ " एक छोटा सा शब्द है लेकिन जिसमे सभी महाकाव्य समाने का सामर्थ्य है....
माँ का प्यार पाने को भगवान भी बालरूप बनाते है.....
तीन लोको के स्वामी होकर भी उसकी ममता का मोल कहाँ चुका पाते है.......
माँ की अनमोल ममता पाने को भगवान भी तरस जाते है....
दुनिया को अपने इशारो पर नचाते होंगे .....
लेकिन खुद माँ की प्यार भरीडाँट खाते है.....
माँ " एक छोटा सा शब्द है लेकिन इसमे छिपा महान अर्थ है.....
माँ क्या है उसे कैसे बयाँ करु मै फिर भी भावना की कलम से माँ के लिए कुछ शब्द भेंट करती हूँ......
मां संस्कारों की बगिया है माँ रिश्तो को पिरोने वाली सुंदर माला है.....
मां श्रद्धा की रंगोली है।माँ आशीषो से भरी झोली है....
माँ ईश्वर की प्रतिनिधि है।माँ सौभाग्य और सिद्धि है....
माँ करुणा की खान है। माँ बच्चों के लिए भगवान है....
माँ ज्ञान रूपी ज्योति है। माँ इस संसार में दिव्य मोती है...
माँ महिमा भरा पुराण है माँ एक पवित्र कुरान है...
माँ मेरे लिए प्रख्यात हस्ती है जिसमें मेरी दुनिया बसती है...
जिंदगी एक समुद्र है तो उससे उबारने वाली कश्ती है....
माँ " एक छोटा सा शब्द है लेकिन जिसमे सभी महाकाव्य समाने का सामर्थ्य है......
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धन्यवाद
दोस्तों, आप सब के लिए कुछ बेहतरीन लाइने प्रस्तुत कररही हूँ जो मेरे विचार है और आप कहीं न कहींआपसबसे भी मिलते जुलते है। ये लाइने अवश्य ही आप सबको पसंद आएँगीं क्योकि इनमें सच्चाई और अनुभव दोनो है। यदि आपके दिल को छूए तोअपने दोस्तों के साथ शेयर करना नही भूले
1.अगर कोई आप आपके लिए दुआएँ करे तो समझिये आप कुछ तो अच्छा कर रहे है।
लेकिन जब आप के दिल से किसी और के लिए दुआएँ निकले तो समझिए आप बहुत बेहतर इंसान बन रहे है।
2.दोस्तों को अपनी दुनिया मानने वाले लोग बहुत कम होते है।लेकिन उन कम लोगों में ही मेरी गिनती है।
3.अक्सर उन लोगो के लिए दिल से दुआ निकलती है
जिनकी सीरत खु़द खुदा से मिलती है।
4.वे ही लोग फरिश्ते होते है।जो विना किसी रिश्ते के भी निस्वार्थ आपकी मदद करने जाने कहीं से आ जाते है।
5.आपका व्यवहार ही तो है, जो आपको किसी की नजरों में हीरो बना देता है।या जीरों
6.हमारे दुःखी होने की सबसे बडी़ वजह यह है कि हम खुशी के पलो को यूहीं जाने देते है और दुःखी करने वाले पलों की बहुत संभाल कर रखते है।
7.वो जिद, जो हमारे लिए नुकसानदेय उसे छोडकर देखिए बहुत कुछ पाने की खुशी का अनुभव करेंगे।
8.अतीत और भविष्य दोनो के जंजाल में फँसकर वर्तमान को भुला बैठना कहाँ कि समझदारी है। हमारा वर्तमान ही इन दोनो पर भारी है।क्योकि आपने अपना वर्तमान सही
में जीया तो फिक्र की जगह फक्र महसूस होगा। क्योंकि यहीं वर्तमान एक दिनअतीत बनेगा और यहीं वर्तमान भविष्य का निर्माण होगा।
धन्यवाद
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उम्मीद करती हूँ मेरा छोटा सा प्रयास सार्थक होगा
1.भाषा का मूलतम संघटक है?
✍️ध्वनि
2भाषाविज्ञान क्या है?
✍️जिस शास्त्र में भाषाओं की उत्पत्ति,संरचना,विकासक्रम,उनके हास का का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन किया जाता है। उसे भाषा विज्ञान कहते है।
3भाषाविज्ञानस्य अर्थोऽस्ति भाषायाः विज्ञानं ,विज्ञानञ्च विशिष्टं ज्ञानम्, इत्थं भाषाया:विशिष्टं ज्ञानं"भाषाविज्ञानम्''इत्युचते
यह परिभाषा किस भाषाविद् की है?
✍️देवेन्द्रनाथ शर्मा
5"जिस शास्त्र में भाषाओं की उत्पत्ति,संरचना,विकासक्रम,उनके हास का का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन किया जाता है। उसे भाषा विज्ञान कहते है।"यह परिभाषा किसने दी है?
✍️श्यामसुन्दरदास
6"ध्वन्यात्मकैः शब्दैः विचार-विचारप्रकटीकरणमेव भाषाऽस्ति?"इस परिभाषा का सम्बन्ध है?
✍️हेनरी स्वीट महोदय से।
7उच्चारणावयवेभ्यः निसृतः ध्वन्यात्मक विचारःएवभाषाऽस्ति?
✍️प्लेटो
8'व्यक्ता वाचि वर्णा येषां त इमे व्यक्त वाच:"उक्त परिभाषा है?
✍️महाभाष्यकार पतञ्जलि की
9"भाषा तु यादृच्छिकवाचिकध्वनिसंकेतस्य सा पद्धतिः अस्ति,यया मानवः पारस्परिकविचाराणां विनिमयं करोतीति"उक्त परिभाषा है?
✍️बी.ब्लाँक और ट्रेगर महोदय
10 संरचनात्मक भाषा विज्ञान के जनक कौन माने जाते है?
✍️"द सस्यूर" नामक भाषा वैज्ञानिक
11.भाषाविज्ञान के प्रकार कितने है?
वर्तमान में भाषा विज्ञान के पाँच प्रकार उपलब्ध होते है।
✍️1.ऐतिहासिक भाषा विज्ञान 2.प्रायोगिक भाषा विज्ञान
3.संरचनात्मक भाषाविज्ञान 4.वर्णात्मक भाषाविज्ञान
5.तुलनात्मक भाषाविज्ञान
12.भाषाविज्ञान के किस प्रकार के अन्तर्गत विविध क्षेत्रो में भाषा के प्रयोग की शिक्षा दी जातीहै?
✍️प्रायोगिक भाषाविज्ञान
13.किस भाषाविज्ञान में एकाधिक भाषाओं का तुलनात्मक अध्ययन विभिन्न कालो में किया जाता है?
✍️तुलनात्मक भाषाविज्ञान
14.भाषाविज्ञान के अंग कौन कौनसे है?
✍️ध्वनिविज्ञान
पदविज्ञान
वाक्य विज्ञान
अर्थविज्ञान
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भाषाविज्ञान के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#भाषा विज्ञान की उत्पत्ति के सिद्धान्त#Net#Set#JrfexaM
भाषाविज्ञानकी उत्पत्ति के सिद्धान्त
सांख्यदर्शन#सांख्यकारिका के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
1.किस यंत्र में कृत्रिम तालु का प्रयोग किया जाता है?
✍️पैलेटोग्राफ
2सहस्त्रभाषात्मक परिवार है?
✍️अमरीकी परिवार
3आस्ट्रेलियाई भाषा परिवार में कितनी भाषाएँ आती है?
✍️100
4पापुई भाषा परिवार में कितनी भाषाएँ आती है
✍️132
5पापुई भाषा परिवार किस खंड के अन्तर्गत आता है?
✍️प्रशान्तमहासागरीय
6प्रशान्त महासागरीय खंड के अन्तर्गत आने वाले भाषा परिवार
मलय पोलिनेशियाई परिवार
पापुई परिवार
आस्ट्रेलियन परिवार
द.पूर्वी एशियाई परिवार
भाषाओं के पारिवारिक वर्गीकरण के अंतर्गत 18 भाषा परिवार माने जाते है जिन्हें चार खंडों में बांटा गया है
1यूरेशिया खंड 2अफ्रीकी खंड 3प्रशांत महासागरीय खंड 4अमरीकी खंड
7भारोपीय भाषा परिवार किस खंड के अंतर्गत आता है?
✍️यूरेशिया खंड
यूरेशिया खंड के अन्तर्गत आन वाली भाषाएँ
1.भारोपीय भाषा परिवार
2.द्रविड भाषा परिवार
3.बरूशस्की भाषा परिवार
4.काकेशी भाषा परिवार
5.यूराल अल्टाई भाषा परिवार
6.चीनी भाषा परिवार
7.जापानी कोरियाई भाषा परिवार
8.अत्युत्तरी भाषा परिवार
9.बास्क भाषा परिवार
10.सामी हामी भाषा परिवार
8.बान्टू भाषा परिवार मे कितनी भाषाएँ आती है?
✍️150
नोटः बान्टू भाषा परिवार अफ्रीका खंड के अन्तर्गत आता है?
9.अफ्रीका खंड के अन्तर्गत कौन कौनसे भाषा परिवार आते है?
✍️1सूडानी 2बान्टू 3होतेन्तोत- बुशमैनी
10. देवेन्द्रनाथ शर्मा के अनुसार भाषाओं के पारिवारिक वर्गीकरण में कितनी भाषा परिवार है?
✍️18भाषा परिवार
भाषाविज्ञान की उत्पत्ति के सिद्धान्त (यह भी देखे)
10.भाषाओं के पारिवारिक वर्गीकरण का आधार क्या है?
✍️ध्वनि साम्य,शब्द साम्य,वाक्य रचना,अर्थ, शब्द सम्पत्ति,स्थान सान्निध्य
11.आकृतिमूलक वर्गीकरण के आधार पर भाषाओं को मुख्यरूप से कितने भागों में बाँटा गया है
✍️दो भागों में
1.अयोगात्मक 2.योगात्मक
12.चीनी भाषा किस प्रकार की है?
✍️अयोगात्मक
13.अयोगात्मक भाषाओ को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
✍️तीन भागों में
स्थान प्रधान=उदाहरण सूडानी भाषा
निपात प्रधान=बर्मी भाषा
स्वरप्रधान=अनामी भाषा
14.योगात्मक भाषाओं के कितने भेद है?
✍️तीन
1.अश्लिष्ट 2.श्लिष्ट 3.प्रश्लिष्ट
15.अश्लिष्ट भाषा के भेद कौनसे है?
✍️चार
पूर्वयोगात्मक =काफिर भाषा
मध्ययोगात्मक=संथाली भाषा
अन्तयोगात्मक=तुर्की भाषा
पूर्वान्त योगात्मक=मफोर भाषा
16.श्लिष्ट योगात्मक भाषा के भेद कौनसे है?
✍️अन्तर्मुखी, बहिर्मुखी
अन्तर्मुखी के पुनः दो भेद किये गये है
संयोगात्मक
वियोगात्मक
17.संयोगात्मक अन्तर्मुखी श्लिष्ट योगात्मक में कौनसी भाषा आती है?
✍️अरबी भाषा
18.अन्तर्मुखी वियोगात्मक श्लिष्ट योगात्मक में कौनसी भाषा आती है?
हिब्रू भाषा
19.आकृतिमूलक वर्गीकरण के अन्तर्गत संस्कृत भाषा किस वर्ग में आती है?
✍️बहिर्मुखी संयोगात्मक श्लिष्ट योगात्मक
20हिन्दी भाषा किसके अन्तर्गत आती है?
✍️बहिर्मुखी वियोगात्मक
21.प्रश्लिष्ट योगात्मक के दो भेद कौनसे है?
✍️पूर्ण, आंशिक
22.पूर्ण प्रश्लिष्ट का उदाहरण है?
✍️चेरोकी भाषा
23.आंशिक प्रश्लिष्ट का उदाहरण है?
✍️बास्क भाषा
सर्वाधिक भाषा किस परिवार में है?
✍️अमरीकी भाषा परिवार
नोट: 1000भाषाएँ अमरीकी भाषा परिवार के अन्तर्गत आती है।
मेरियो पाई के अनुसार विश्व में कितनी भाषाएँ है?
✍️2796भाषाएँ
मनुस्मृति के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#Net:Set:JRF Exam
केशवमिश्र की तर्कभाषा महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#Tarkbhasha
संस्कृत:चार्वाक दर्शन(charvak darshan)
संस्कृत महाकाव्यों से पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर
धन्यवाद✍️🙏
नमस्कार, दोस्तो आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मेरी यह कविता नारी शक्ति को समर्पित है जिसमें नारी के सच्चे स्वरूप की व्याख्या की गई है मैं जानती हूँ कि मेरे क्या किसी के भी शब्द कम है नारी के विराट व्यक्तित्व को समझने और समझाने के लिए
कविता=नारी का सच्चा स्वरूप
तू रूद्र रूप है, करुणा रूप, वात्सल्य रूप है तू ही।
तेरे पावन हृदय में भावों की सरिता बहती है।
अपनों के सुखों के खातिर तू इतने
कष्टों को सहती है।
तू सृष्टि की निर्मात्री है मानव की
जन्म दात्री है।
तू ममता है कमजोर नहीं
तू समता है कमजोर नहीं
तेरे इस रूप को बारंबार प्रणाम है।
तेरी इस महिमा को गाता धर्म पुराण है।
तूने ही इस धरा को संवारा है।
तूने ही निर्मल सौंदर्य तराशा है।
तू सुख ऐश्वर्य की विभूति है।
परम कल्याणमयी प्रतिमूर्ति है।
तू लक्ष्मी है, माँ विद्यादायिनी है।
काली है, कात्यायनी है।
तू दुर्गा है, माँ गौरा है।
ये तेरे ही अभिन्न स्वरूपा है।
हे चंडमुंड संहारिणी
हे महिषासुर वधकारिणी
तुझे इस शक्ति स्वरूप को फिर से धारण
करना होगा।
दानव रूपी मानव का सृष्टि से
मर्दन करना होगा।
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1.धर्म के दस लक्षण किसने बताये है?
✍️मनु ने
2. स्मृति के अनुसार चूड़ाकर्म संस्कार किस वर्ष में होता है?
✍️तृतीय वर्ष में
3.ब्राह्मण का उपनयन संस्कार किस वर्ष में किया जाना चाहिए?
✍️8वे वर्ष में
नोट:क्षत्रिय का 11वे वर्षमें, वैश्य का 12वे वर्ष में
4.मनुस्मृति के अनुसार अभिवादनशील व्यक्ति क्या प्राप्त करता है
✍️आयु,विद्या,यश,बल
5.गुरु की निन्दा से ब्रह्मचारी कौनसी योनि प्राप्त करता है?
✍️कुत्ता की
6व्रात्य किसे कहते है?
✍️निर्धारित समय पर उपनयन संस्कार नही कराने वाले को
7.पूर्वाभिमुख होकर भोजन करने वाले क्या प्राप्त करते है?
✍️आयु
8.किस युग में दान की प्रधानता है?
✍️कलियुग मे
9.विप्र ब्रह्मचारी की मेखला कैसी होनी चाहिए?
✍️मौञ्जी की
10.मनुस्मृति के अनुसार पाक यज्ञ कितने है?
✍️चार
11.मनुस्मृति के अनुसार कुल व्यसन है?
✍️18
मनुस्मृति के अनुसार राजा के अधिकार और कर्तव्य#काम और क्रोध से उत्पन्न व्यसन
12. काम से उत्पन्न व्यसनो की संख्या कितनी है?
✍️10
13.लोभ से उत्पन्न व्यसनों की संख्या कितनी है?
✍️8
14.मनुस्मृति के अनुसार कौनसा दुर्ग उत्तम है?
✍️गिरि दुर्ग
15.मनु ने कितने प्रकार के दुर्ग कहे है?
✍️छः प्रकार के
16.व्यवहार पद के कितने प्रकार है?
✍️18
17.मनुस्मृति के अनुसार सचिवों की संख्या?
✍️सात या आठ
18.मनु के अनुसार ब्राह्मण का सर्वोत्तम तप कौनसा है?
✍️वेदाभ्यास
19.सुरापान सम पाप कौनसा है?
✍️वेदनिन्दा
20.अध्ययन -अध्यापन कौनसा यज्ञ कहलाता है?
✍️ब्रह्मयज्ञ
21.क्षत्रिय का धर्म विवाह कौनसा है?
गान्धर्व
22.आठ प्रकार के विवाहों का उचित क्रम कौनसा है?
✍️ब्रह्म विवाह,दैव विवाह,आर्ष विवाह,प्रजापत्य विवाह,आसुरविवाह,गान्धर्व विवाह,राक्षस विवाह,पैशाच विवाह।
23.पूर्व समुद्र से लेकर पश्चिमी समुद्र पर्यन्त क्षेत्र क्या कहलाता है?
✍️आर्यावर्त
24. धर्म:एव हतोहन्ति धर्मोरक्षति रक्षित:यह वाक्य उद्धृत है?
✍️मनुस्मृति से
25.दर्शयज्ञ किस तिथि को किया जाता है?
✍️अमावस्या को
26.अधिकभोजन करने वाले प्राप्त करते है?
✍️अनारोग्य और अस्वर्ग्य को
27.विवाहो में सर्वश्रेष्ठ विवाह है?
✍️ब्रह्म विवाह
28.विवाहों में अधम विवाह है?
✍️पैशाच विवाह
29.वेद की एक शाखा का अध्ययन करने वाले कहलाते है?
✍️उपाध्याय
30.किस युग में चतुष्पाद सकल धर्म था?
✍️कृतयुग में
31.राजा के शरीर में मनुस्मृति के अनुसार कितने देवताओं का अंश होता है?
✍️आठ
मनुस्मृति का सप्तम अध्याय#राजव्यवस्था,राजा के गुणों का वर्णन
32.ब्राह्मण का केशान्त संस्कार कब किया जाता है?
✍️16वे वर्ष में
नोट: क्षत्रिय का 22वे वर्ष में
शूद्र का 24वे वर्ष में
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धन्यवाद✍️🙏