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  मूकता की जंजींरें तोड़ जो कुछ समय पूर्व मै  मुखरता की सीढ़ी चढ़ने लगा। बुनने लगा स्वप्न सजीले जो बंद थे ह्रदय के किसी कोने में  इन सपनों की तस्वीर लिए सजाने कोई नया आशियाना  अपनी ही मस्ती में चलता रहा नयी उमंग लिए।  माना कि मेरे सामने मंजिल का हसीन मंजर था  लेकिन सफर में अभी जगह-जगह बहुत बंजर था  चेहर पर थी मुस्कान अमिट लेकिन चुनौतियों का खंजर था                                                      इकतरफा बढ़ने लगा लगाव अपनी ख्वाहिशों का  लेकिन सशक्त हुआ प्रभाव समय की साजिशो का    प्रतिकूलता की रस्साकशी मुझे खींचने लगी अपनी ओर  छूटने लगी मेरी बंद मुट्ठी से मेरे सजीले सपनों की डोर  घर करने लगा डर अब ह्रदय के उस कोने में  जहाँ से निकाली थी मैने सपनों की तस्वीर   लेकर चला था उसे मनचाहे रंगों से भरने  अपनी मूकता को जो मैने अभी मुखर किया था  क्या समय की विमुखता में बँध जायेंगे म...

Today thouths#आज का सुविचार#motivational

Quotes on life   Read more articles https://strugglealwaysshine.blogspot.com/2020/06/blog-post25.html?m=1 https://strugglealwaysshine.blogspot.com/2020/05/poem-on-conditions-in-lockdown.html?m=1 https://strugglealwaysshine.blogspot.com/2020/01/blog-post.html?m=1    मेरे ब्लॉग पर समय देने के लिए आप सभी का  बहुत-बहुत आभार

कविता -बारिश कीबूँदे या अनमोल मोतियो का हार

  ये आसमां आज इतना उदार लग रहा है इससे बरसती अनगिनत बूँदे बूँदे नही ,अनमोल मोतियो का हार लग रहा है यह असीम आसमां आज इन अनमोल मोतियो को  क्यो डुलका रहा है। लगता है किसी खुशी मे इन मोतियो को लुटा रहा है। कही ये मोती पेडो के पत्तो पर है,कही किसी की पलको पर कही किसी की मुट्ठी मे है, कही किसी के अलको पर सच मे ये मोती मानो सभी को धनवान कर रहे है क्यूँकि दिल का पूरा हर अरमान कर रहे है। आज आसमां से बरस रहे इन मोतियो ने  इस धरा का दुलहन सा श्रॄंगार किया है। जैसे मन ही मन कोई बडा आभार किया है। मस्तक पर  चिन्ता की लकीरे जो गहरी हो रही थी  वो देखो सिमटसी गई है । वर्तमान हालातो से बेरंग हुई आज जिन्दगी  इन्द्रधनुष सी बन गई है। धन्यवाद यह भी पढे़ कविता  लाँकडाउन और मजदूरजन कविता -कोरोनारूपी राक्षस से रण

Lockdown#कविता का शीर्षक:"वर्तमान परिस्थितियों में मजदूरो की व्यथा

कविता का शीर्षक :" वर्तमान परिस्थितियों में  मजदूरो की व्यथा अरे, मेरे मजदूर भाईयो की व्यथा आज बढ़ गई है।  कोरोना की भयावहता उनके ही घर कर गई है। जिनके हाथों में काम करते करते पड़ जाते थे छाले । आज  उन हाथों में न छाले रहे न ही काम रहा ।। छालों ने भी कभी नहीं दिया इतना दर्द जितना  आज बिन छालो के पा रहे हैं ।  देखो, आज उनकी आंखों में बिन छालों के भी  असहनीय दर्द के आंसू आ रहे हैं।  आज वह रोटी के लिए दूसरों के मुंह ताक रहे हैं  और बिन खाये पीये ही दिन काट रहे है।। सोते जागते वर्तमान की चिन्ता सता रही है। देखो, एक श्रमदाता की गर्भवती पत्नी प्रसव पीडा़ से  कराह रही है । हम तुम जैसै लोग आने वाले बच्चे के भविष्य के  सपनो से सने है।  जबकि उस धरती पुत्र का यही सपना है  कि उसका आने वाला लाल काल का ग्रास न बने ।। दूसरो के रहने के लिए ठिकाना बनाते है  पर आज अपना ठिकाना ढूंढ रहे है। जो आए थे गांव से शहरों की और बेहतर  जिंदगी का सपना सजाने के लिए।   वह लौट रहे हैं आज शहरों से गांव की ओर  अपनी जिंदगी...

संस्कृत में कारक प्रकरण #संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर#karak in sanskrit

  संस्कृत में कारक प्रकरण  #संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर #karak in sanskrit ○ मोक्षाय हरिं भजति ○मुक्तये हरिं भजति ○काव्यं यशसे भवति  उपरोक्त वाक्यों में कौन सी विभक्ति है? ○ चतुर्थी विभक्ति ○अगर किसी उद्देश्य, प्रयोजन से कोई कार्य किया जाता है  तो उसमें चतुर्थी विभक्ति होती है  " तादर्थ्ये चतुर्थी वाच्या" सूत्र के अनुसार   भक्ति ज्ञानाय कल्पते, सम्पद्यते वा   इस वाक्य में चतुर्थी  विभक्ति किस सूत्र से है?   क्लृपि सम्पद्यमाने च सूत्रानुसार   समर्थ अर्थ वाली धातुओं के प्रयोग  में चतुर्थी विभक्ति होती है।   वाताय कपिला विद्युत्।( पीली बिजली  आंधी की सूचक है।) तापाय अतिलोहिनी। (लाल बिजली अत्यंत धूप  कीसूचक है)  इन वाक्यों में चतुर्थी विभक्ति किस सूत्र से हुई है?   उत्पातेन ज्ञापिते वा सूत्रानुसार शुभ अशुभ को बताने में,  पृथ्वी आदि के उत्पादों को सूचित करने में  चतुर्थी विभक्ति होती है। दैत्येभ्यो हरि अलम्। इस वाक्य  में चतुर्थी विभक्ति  किस शब्द के का...

संस्कृत में कारक प्रकरण# संस्कृत व्याकरण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

संस्कृत में कारक प्रकरण# संस्कृत व्याकरण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर /> ○भुव प्रभव:इस सूत्र से कौनसी विभक्ति होती है? ○ पंचमी विभक्ति ○"प्रकृत्यादिभ्य उपसंख्यानम्" इस वार्तिक से कौनसी विभक्तिका विधानहै? ○ तृतीया विभक्ति ○वारणार्थानामीप्सित: सूत्र से किस विभक्ति का विधान है ○ पंचमी विभक्ति ○ माता गुरुतरा .........(भूमि) रिक्त स्थान मे सही विभक्ति है? ○ भूमेः ,पंचमी वि. ○..............सुरेश: श्रेष्ठतर:(रमेश) रिक्त स्थान मे सही विभक्ति है? रमेशात् ,पंचमी वि. ○ कारण ---तरप्, ईयसुन प्रत्ययान्त  शब्दो से दो वस्तुओ व्यक्तियो की तुलना होती है। जिससे श्रेष्ठता बताई जाती है उसमें पंचमी विभक्ति लगती इसलिए रमेश में पंचमी विभक्ति लगी है ○ समुद्रातपुरी क्रोशे क्रोशम् अस्ति ○वनात् ग्रामो योजनं योजने वा अस्ति ○ इन दोनो विभक्तियो मे मार्गवाची,और दूरी वाले शब्दो में प्रथमा और सप्तमी वि.किस सूत्र से हुई है? ○ तद्युक्ताध्वनः प्रथमासप्तम्यौ सूत्र से ○ वृक्षात् पत्राणि प्रभवन्ति (वृक्षो से पत्ते निकलते है) यहाँ पंचमी वि. किस सूत्र से है? ○ भुव प्रभवः सूत्र से ○ ...

#poem on conditions in lockdown#मजदूरो की स्थिति

  कविता- लाँकडाउन और मजदूर जन देखो, मेरे देश की इक तस्वीर जरा.. एक तरफ कोरोना की बडी जंग तो... दूसरी तरफ मजदूर भाईयो की बेबसी ,बदहाली है। जो गए थे शहरो की तरफ पैसा कमाने। आज उनके पैरो मे पड़ गए छाले  लेकिन हाथो मे न कमाई है।। बनाते है जो बडी बडी महलो सी इमारते  दूसरो के रहने को..  वो किराये के घर में रहने की भीजद्दोजहद कर रहे है  ऐसी किस्मत क्यो उन्होने लिखाई है।।    कविता- लाँकडाउन और मजदूर जन चल पडे है अपने  गाँवो की और अपने पैरो के भरोसे न ज्यादा शिकवा शिकायत किसी से  लडते अपने आप आत्मसम्मान की अथक लडा़ई है।। नही फिक्र अपने पथ के शूलो से,  शूलो को भी फूल समझ कर चल पडे है। इनके भीतर छिपे हिम्मत के जज्बे ने  सच्चे कर्मवीर की परिभाषा हमे समझाई  है।। विशेष  इस छोटी सी अपनी रचना के माध्यम से  हिन्दुस्तान के सभी कर्मवीर मजदूरो को,उनके हौसलो को सलाम करती हूँ आप ही हमारे हिन्दुस्तान की मजबूत नींव है।

Aaj ki quotes#प्रकृति की सता#poem on lockdown

प्रकृति की सता#poem on lockdown इस महामारी ने अहम से आसमान मे  उडने वालो को भी जमीन पर ला दिया। जो भूल गये थे घर का रास्ता  उसे घर का आंगन याद दिला दिया जो आज तक नियम कानूनो को  अपने हाथ की कटपुतली समझते रहे। आज कुदरत की मार ने उन्हे जंजीरो मे लिपटा दिया।  प्रकृति पर अत्याचार कर प्रभुत्व समझने वाले  दानवो को नही पता कि खुद उसका अस्तित्व कितना है। प्रकृति से अपने को ऊँचा समझा...  तो बेशक उसका अस्तित्व मिटना है।

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष#lockdown

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालू...
लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालूम...

कोरोना रूपी राक्षस से रण #कोरोना पर कविता #corona#lockdown

कविता का शीर्षक-"नही छोडेंगे इस रणको बीच मेंअधूरा   नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच मे अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।  यहाँ न किसी धर्म,जाति,संप्रदाय,  अमीर,गरीबी का कवच काम नहीं आएगा  यह रण तो हमारी एकता की मिसाल बन जाएगा । नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।   यहां काम नहीं आएगी कोई राजनीतिक घृणा  यह रण तो राजनीति के दलदल से दूर ले जाएगा। नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा  सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।   यहां काम नहीं आएगी आरोप-प्रत्यारोपो की झड़ी   यह रण तो भाईचारे और परोपकार से जीता जाएगा।  नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा   सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा   न हीं चलेगी यहां तलवारे,न ही धनुष बाण चलेंगे   न ही गिरने देंगे लहू की एक बूंद इस धरा पर  यह रण तो इंसानियत की कसौटी पर लड़ा जाएगा।  नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा   सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।  न हीं कर पाएगा अपनों को अपनों से दूर  यह रण तो...

सुविचार#शब्दो की ताकत#golden lines in hindi#motivation

दोस्तों में कोई दार्शनिक नहीं हूँ न ही कोई कवि और न ही महान लेखक हूं बस अपने दिल में उठ रही भावनाओं को कलम के माध्यम से कागज पर कभी कभार उतार देती हूं मुझे अपने अनुभवों को साझा करने में संतुष्टि का अहसास होता है यही मेरे लिए बहुत है। १. अगर भावो की गहराई समझ मे आ रही हो तो शब्दो कोष का गहरा होना  आवश्यक नही २. आपका एक एक अक्षर दिव्य हो जाता है यदि वह किसी के अंदर छाए तिमिर की परतो को खोलकर उसके सच्चे स्वभाव को सामने लाने में मदद करता है।  ३आपके शब्दों को किसी के लिए वेदना नही, प्रेरणा बनाइए  ४आपकी शब्दों में छुपे हुए भावनाओं की की कीमत ही है कि किसी के शब्द दवा बन जाते हैं क्यों किसी के शब्द केवल हवा बन जाते हैं।  दोस्तों यदि आपको ये विचार अच्छे लगे हो तो लाइक करें और अपने दोस्तों को शेयर करें। धन्यवाद

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लोकायत दर्शन#चार्वाक दर्शन#बार्हस्पति  दर्शन से सम्बन्धित तथ्य चार्वाक दर्शन के संस्थापक बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए इसे बार्हस्पति दर्शन भी कहते है। इसी का प्राचीन नाम लोकायत दर्शन है। चार्वाक दर्शन सुख को ही जीवन का परम उद्देश्य मानता है।  यह भौतिकता वादी दर्शन है जो वेदों की निंदा करता है। यह अग्निहोत्र और श्राद्ध का निषेध करता है चार्वाक दर्शन की दृष्टि में प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है। चार्वाक दर्शन  ईश्वर और आत्मा का निषेध मानता है। चार्वाक दर्शन काम को ही एकमात्र पुरुषार्थ मानता है  चार्वाक दर्शन की दृष्टि में मृत्यु ही मोक्ष है। चार्वाक दर्शन चार तत्वों को मानता है।👉 पृथ्वी जल तेज वायु यह आकाश को तत्व नहीं मानता है। चार्वाक दर्शन के सिद्धान्त   प्रत्यक्ष प्रमाणवाद - चार्वाक दर्शन प्रत्यक्ष दिखाई देने वाली वस्तुओं को ही अंतिम सत्य मानता है यह अनुमान शब्द आदि प्रमाणो को नहीं मानता है।   भौतिकतावा द    - यह सांसारिक वस्तुओं को अत्यधिक महत्व देता है भूत चैतन्य वाद  - पृथ्वी जल तेज...

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sanskrit exam 1⃣मनुस्मृति के अनुसार क्रोध से उत्पन्न होने वाले  दोषो  की संख्या कितनी है?  ✔️ 8 ✏️दूसरों की चुगली करना, दुस्साहस करना, द्रोह करना, ईर्ष्या करना,  दूसरों के गुणों में दोष निकालना दूसरे के धन का अपहरण करना, वाणी में कठोरता लाना, निरपराधी को मारना      2⃣ मनुस्मृति के अनुसार काम से उत्पन्न होने वाले दोषों की संख्या कितनी है? ✔️ 10 ✏️शिकार करना, जुआ खेलना ,दिन में सोना ,दूसरे की निंदा करना स्त्रियो मे आसक्ति,नशा करना, नाचना ,गाना ,बजाना ,व्यर्थ घूमना       3⃣ काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले दोषों का मूल कारण क्या है?  ✔️ लोभ 4⃣संकेत ग्रह के कितने साधन बताए गए हैं ✔️8 5⃣शूद्रक द्वारा रचित मृच्छकटिकम् प्रकरण मे संस्कृत बोलने वाले  पात्रों की संख्या है ? ✔️ ६ 6⃣स्वल्पोछिष्टस्तु तद्हेतु़....... विस्तार्यनेकधा: । रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए?   ✔️बीजं ✏️ दशरूपककार धनञ्जय ने अपनी रचना दशरूपक मे  पाँच अर्थप्रकतियाँ बताई है    बीजं,   बिंदु, पताका, प्रकरी और का...