" नायक के भेद" संस्कृत साहित्य में दस रूपक माने गये है धनञ्जय ने अपने दशरूपकम् में रूपक के दस भेद माने है नाटक,प्रकरण,भाण,व्यायोग समवकार,डिम ईहामृगअंक, वीथी,प्रहसन ये रूपक के दस भेद है। रूपक के 10 प्रकारो में प्रत्येक की अपनी विशिष्टता है। जिसका करण कथानक (वस्तु), नायक (नेता), रस में भिन्नता है नाट्यशास्त्रीय दृष्टि से ये तीनों रूपकों के महत्त्वपूर्ण तत्व है। इस Post में हम नाट्यशास्त्र के महत्त्वपूर्ण तत्व नेता अथवा नायक की कोटि (प्रकार) के बारे में जानेंगे। नेता अथवा नायक किसे कहते है सभी रूपकों का एक नायक होता है जिसे अंत में धर्म, अर्थ,कामरूपी फलों में से कोई न कोई फल अवश्य मिलता है। फल ...
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