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  मूकता की जंजींरें तोड़ जो कुछ समय पूर्व मै  मुखरता की सीढ़ी चढ़ने लगा। बुनने लगा स्वप्न सजीले जो बंद थे ह्रदय के किसी कोने में  इन सपनों की तस्वीर लिए सजाने कोई नया आशियाना  अपनी ही मस्ती में चलता रहा नयी उमंग लिए।  माना कि मेरे सामने मंजिल का हसीन मंजर था  लेकिन सफर में अभी जगह-जगह बहुत बंजर था  चेहर पर थी मुस्कान अमिट लेकिन चुनौतियों का खंजर था                                                      इकतरफा बढ़ने लगा लगाव अपनी ख्वाहिशों का  लेकिन सशक्त हुआ प्रभाव समय की साजिशो का    प्रतिकूलता की रस्साकशी मुझे खींचने लगी अपनी ओर  छूटने लगी मेरी बंद मुट्ठी से मेरे सजीले सपनों की डोर  घर करने लगा डर अब ह्रदय के उस कोने में  जहाँ से निकाली थी मैने सपनों की तस्वीर   लेकर चला था उसे मनचाहे रंगों से भरने  अपनी मूकता को जो मैने अभी मुखर किया था  क्या समय की विमुखता में बँध जायेंगे म...

वेदांग का अर्थ,वेदांग कौन कौन से है,महत्त्व क्या है?

वेदांग का अर्थ क्या है वेदांग कौन कौन से है,वेदांगो का क्या महत्त्व क्या है इस विषय में हम इस Post में जानेंगे वेदांग यह Topic Exam की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है अतः यह पोस्ट स्टूडेंट्स के लिए भी बहुत उपयोगी है                                                                                                                                                    वेदांग क्या है? वेदांग दो शब्दो से मिलकर बना है वेद+अंग अर्थात् जो वेद के अंग के रूप में जो ग्रंथ उपयोगी है,जो वेदो के सम्यक और पूर्ण अर्थ को आसानी से समझने के लिए सहायक व उपयोगी है।जिस प्रकार अंगो के बिना शरीर की पूर्णता असम्भव है उसी प्रकार वेदो के पूर्णज्ञान के लिए वेदांगो के महत्त्व को कम नही आँका जा सकता है।                                                                                                                                  वेदांग कौन कौन से है?वेदांगो के विषय मे निम्न श्लोक द्रष्टव्य है----                                                                                              शिक्षा व्याकरणं छन्दो,निरुक्त ज्योतिष तथा।                                                                            कल्पश्चेति षड़ांगि,वेदस्याहुर्मनीषिण:।।                                                                                            शिक्षा ,व्याकरण, छन्द,निरुक्त,ज्योतिष,कल्प के भेद से छ: वेदांग माने जाते है।

Vedang with image
वेदांग

                                                                                     हम उपरोक्त वेदांगो के बारे में Details में जान लेते है                                                                                शिक्षा--शिक्षा को वेद रूपी पुरुष की नासिका माना जाता है।शिक्षा घ्राणं तु वेदस्य ।जिस प्रकार नासिका शब्दो के उच्चारण में सहायक है उसी प्रकार शिक्षा नामक वेदांग के बिना हमे वर्णो,स्वरो के उच्चारण की शिक्षा मिलना मुश्किल है।                                                                                                      सायणाचार्य के अनुसार शिक्षा की परिभाषा                  "वर्णस्वराद्युच्चारणप्रकारो यत्र शिक्ष्यते उपदिश्यते सा शिक्षा"                                                                                  शिक्षा के अंग-- शिक्षा के छ:अंग माने गये है वर्ण,स्वर,मात्रा,बल,साम और सन्तान                    
 
                                                                        शिक्षा के उपरोक्त छ: अंगो में से किसी एक में भी दोष उत्पन्न हो जाता है तो वेदमंत्रो का अनिष्ट कारी फल प्राप्त होता हैअतः शिक्षा वेदांग का अध्ययन आवश्यक है।                                                                                                                                              जैसे कि आप सभी जानते हैं वेदों की संख्या चार है और सभी वेदों के पृथक-पृथक  शिक्षाग्रंथ उपलब्ध है                                                                                                  कल्प:-कल्प नामक वेदांग वेदपुरुष हाथ माना गया है हस्तौ कल्पो अथपठ्यते। कल्प का अर्थ विधि,नियम,न्याय,आदेश है इस प्रकार अनेक विधि विधानो,कर्मानुष्ठानो,नियमो का संक्षिप्त सरल रूप में प्रतिपादन करना ही कल्पसूत्रोकी रचना का उद्देश्य है।                                                                                      कल्प सूत्रो के प्रकार - कल्प सूत्रो के चार भाग है श्रौतसूत्र,गृह्यसूत्र,धर्मसूत्र, शुल्वसूत्र                                                                                                                श्रौतसूत्र में महत्त्वपूर्ण दशपौर्णमास,पिण्डपितृ,आग्रीयणेष्टि,चातुर्मास,सोमयाग,वाजपेय,अश्वमेघ ,पुरुष मेध आदि का वर्णन है। सभी वेदो के श्रौतसूत्र भिन्न भिन्न है।                                                                                                                      धर्मसूत्रो मॆं वेदो द्वारा बताई  गई आचरण पद्धति को ही मानना धर्म बताया गया है। धर्मसूत्रो में  वर्ण,आश्रम व्यवस्था के नियम,राजा,प्रजा,पति-पत्नी,पुत्रो के कर्तव्यो पर प्रकाशडाला गया है।अनेक प्रकार के पापो और प्रायश्चितो का भी विधान है इनमें सदाचार और नैतिकता पर बल दिया गया हैआचार संहिता की दृष्टि से धर्मसूत्रों का विशेष स्थान है                                                                                                                          विशेष तथ्य**   अथर्व वेद का कोई भी धर्म सूत्र नहीं मिलता है                                                                    ग्रह्यसूत्र  इसमें ग्रह्यस्थो  द्वारा प्रति किये जाने वाले प्रात :कालीन एवं सायंकालीन यज्ञो ,पंच महायज्ञो,गर्भाधान  से लेकर मृत्युपर्यन्त किए जाने वाले सभी संस्कारों, घर में होने वाले विभिन्न उत्सवों  का वर्णन मिलता है।गृहनिर्माण,गृहप्रवेश  पशुपालन रोगनाशकविधियो जादू-टोना  पुनर्जन्म  स्वर्गादि संबंधी विविध मान्यताओं पर प्रकाश डाला गया है।                                                                                                                             शुल्व सूत्र:--शुल्क का अर्थ है रज्जु(रस्सी) पहले यज्ञ वेदी निर्माण करते समय रस्सी से नाप लेकर ही वेदी का निर्माण होता था। निश्चित।नाप की वेदी से ही यज्ञ की सफलता मानी जाती थी ।किस अवसर पर कितनी नाप की वेदी बनाई जाए यह निर्देश कार्य ही शुल्व सूत्रो का है।                                                                                                                           विशेष  तथ्य** केबल  यजुर्वेद के ही शुल्बसूत्र मिलते हैं                                                                               हमने इस Post के अन्तर्गत  वेदांगो का अर्थ ,वेदांग केछ:भेदो के बारे में जाना  जिसमें से शिक्षा और कल्प वेदांग के बारें मेंकुछ Detailsमें जाना शेष वेदांगो के बारे में हम अपनी पोस्ट में चर्चा करेंगे।   I hope you like this valueable post                                  Read more    उपनिषद  (Upnishad)  https://strugglealwaysshine.blogspot.com/2019/01/happy-new-year-to-all-sanskrit-jeeva.html?m=1        

टिप्पणियाँ

Dr. Intaj Malek ने कहा…
आपने शिक्षा के प्रमुख अंग बताए उसमे बल, साम और संतान के बारे मे कुछ ज्यादा बताइये। इसके बारे मे ज्यादा साहित्य कहा मिलेगा ? और इसको संक्षिप्त मे आप संजने की कृपा करे।

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