Meghdoot (khandkavya) ,Mahakavi kalidas मेघदूत का सामान्य परिचय--"मेघदूत" नामक खंडकाव्य महाकवि कालीदास की रचना है।जो दो भागो मे विभाजित है(1)पूर्वमेघ (2)उत्तरमेघ ।मेघ को दूत बनाकर रचा गया यह खंडकाव्य रामायण में हनुमान को दूत बनाकर भेजने की कल्पना से प्रेरित है। नलोपाख्यान में भी राजा नल हंस को दूत बनाकर दम्यन्ती के पास भेजता है। मेघदूत में विरही यक्ष का वर्णन है धनपति कुबेर का सेवक यक्ष अपने स्वामी के कार्य में प्रमाद के कारण अभिक्षप्त होकर अपनी पत्नी से वियुक्त रामगिरि पर्वत पर निवास करता है। वह एक वर्ष के लिए अपनी नगरी अलकापुरी से निर्वासित है शाप के 8महीने बीत जाने पर आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर उसे उत्तर दिशा में मेघ के दर्शन होते है।अपनी प्रिया के वियोग में अत्यंत व्याकुल यक्ष अचेतन मेघ के द्वारा अपनी कुशलता के समाचार यक्षिणी के पास भेजना चाहता है।इसी प्रसंग में वह रामगिरी से अल्कापुरी तक के मार्ग का वर्णन करता हैइस मार्ग वर्णन में वह विशेष स्थानों जैसे मालवा प्रदेश आम्रकूट पर्वत ,नर्मदा नदी, विदिशा नगरी,नीचैगिरि, विंध्याचल,निर्विन्ध्या नदी, रेवा नदी, उज्जैन के महाकाल मंदिर, क्षिप्रा नदी, गंभीरा नदी दशपुर,ब्रह्मावर्त, देवगिरि, चर्मवती नदी, कुरूक्षेत्र, सरस्वती नदी, कनखल, गंगानदी, कोच्ञरन्ध्र, कैलाश पर्वत,अल्कानगरी का स्वाभाविक का वर्णन करता है।फिर अल्कानगरी के आकाशचुम्बी प्रासाद, कुबेर के प्रसाद ,यक्ष के प्रासाद तथा वहां निवास करने वाली यक्षिणी की वियोग दशा का वर्णन है जो एक-एक दिन यक्ष की प्रतिक्षा में बडी कठिनता से व्यतीत कर रही है।अंत मे यक्षिणी के लिए यक्ष का संदेश कि शाप की अवधि के शेष चार माह धैर्यपूर्वक बिताना ।शीघ्र ही हमारा मिलन होगा, तब ये दु:ख के दिन नही रहेंगे।
| मेघदूतम् |
टिप्पणियाँ