रविवार, 19 अप्रैल 2020

Aaj ki quotes#प्रकृति की सता#poem on lockdown

प्रकृति की सता#poem on lockdown

इस महामारी ने अहम से आसमान मे
 उडने वालो को भी जमीन पर ला दिया।
जो भूल गये थे घर का रास्ता 
उसे घर का आंगन याद दिला दिया
जो आज तक नियम कानूनो को
 अपने हाथ की कटपुतली समझते रहे।
आज कुदरत की मार ने उन्हे जंजीरो मे लिपटा दिया।
 प्रकृति पर अत्याचार कर प्रभुत्व समझने वाले 
दानवो को नही पता कि खुद उसका अस्तित्व कितना है।
प्रकृति से अपने को ऊँचा समझा...
 तो बेशक उसका अस्तित्व मिटना है।

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष#lockdown

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष


स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालूम चल रहा है।वे अब तक अनजान बने बैठे थे कि घर में सभी कुछ अच्छा है किसी आवश्यक सुविधा का अभाव नही है।   लॉक डाउन का समय पूरा होगा तो अपने घर को पहले से बेहतर करने की कोशिश करेंगे। आज तक तो उन्होंने घर की महिलाओं की बातों पर शायद ध्यान नहीं दिया होगा कि उन्हें कितनी तकलीफ होती है सुविधाओं के अभाव में। जिस व्यक्ति नेआज तक किचन में चाय तक नहीं बनाई थी बस जब चाय पीने की इच्छा हुई अपनी पत्नी को आवाज लगा दी  चाहे वह किसी जरूरी काम में ही क्यो न लगी हुई हो। आज वह घर का खाना बनाने में अपनी पत्नी की मदद कर रहे है। अब जान पाएंगे कि एक महिला इतने लोगों की फरमाइशो को सालो से कैसे पूरा करती होगी और अभी तक कर रही है।  वो भी बिना किसी स्वार्थ के।अब तक उसकी थकान को कोई क्यू नही देख पाये जब कि एक महिला अपने घर के पुरुषो के काम से लौटते ही पानी का गिलास भी हाथ मे देती है,जल्दी से चाय बनाती है और पूछती है कि किसी तरह की परेशानी तो नही हुई आने जाने में ।आज का दिन कैसा रहा जब कि पुरुषो ने इतने सालो में कितने दिन पूछा होगा ? जरा सोच कर बताइए🤔🤔🤔। अब उम्मीद करते है कि बैठे बैठे अपनी पत्नी को आर्डर देना शायद बंद हो जाए और अपने छोटे-छोटे कामों को स्वयं करने की आदत का विकास हो। एक बडा परिवर्तन बच्चो के प्रति नजरिये को लेकर भी आने वाला है।  जो माता पिता बच्चों को नासमझ समझते हैं उन्हें बच्चों की समझदारी का एहसास होगा उन्हें भी पता चलेगा कि बच्चों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है  बच्चों की कीमत  उनकी उनकी क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर आंकना गलत है। वर्किंग पेरेन्ट्स को अपने बच्चो की योग्यताओं का, रुचियो़, उनकी उनकी आवश्यकताओं का पता चल पाएगा और जिससे भविष्य में वह अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से नहीं करेंगे और ना ही उनके क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर उनके भविष्य का निर्धारण करेंगे । माता पिता के साथ इस समय बिताए गए अच्छे पलो के परिणामस्वरूप  बच्चे अपने माता-पिता के और करीब आएंगे उनकी झिझक कम होगी जिससे भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी या तनाव होने पर वे वे बेझिझक अपनी बात उनसे कह पाएंगे । हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स की सुसाइड केसेज में कमी होगी। यह भी हमारे लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा।

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सारांश  यह थी 21 दिनों के लाँकडाउन के कुछ सकारात्मक पहलू शायद इन सभी से आप भी सहमत होंगे। अब हम सबको हर हर पल को डर-डर बिताने की बजाय अपने लिए ,अपने परिवार, अपने समाज ,देश और संपूर्ण विश्व के लिए बेहतर बनाने की सोच रखनी चाहिए ।


मिलकर जीत ही लेंगे हम यह जंग
 कोरोना को नहीं डालने देंगे अपने रंग में भंग ।
इतनी हिम्मत नहीं की है हमसे जीत पाएगा वो
 क्योंकि अपनों की सच्ची  दुआएं हैं हमारे संग।।

बुधवार, 1 अप्रैल 2020

लाँकडाउन:सकारात्मक पक्ष


स्कूलो की छुट्टियाँ चल रही हैबच्चे अपने दादी या नानी के यहाँ है।कई सालो के बाद इतनी छुट्टियाँ मिली है।अपने हम उम्र ताऊजी,चाचाजी के बच्चो के साथ खेल रहे है।बहुत दिनो के बाद उनके साथ लड़ने झगड़ने का मौका मिला है।मै यह नही कह रही कि जो समय चल रहा है बहुत अच्छा है। मै जानती हूँ आप सब जानते है कि सम्पूर्ण विश्व में विपरीत परिस्थितियाँ बनी हुई है।लेकिन इस समय को मिलकर बेहतर बनाया जा सकता है। तनाव के वातावरण की बजाय खुशहाली फैलायी जा सकती है।  घर पर रहने का समय मिला है तो उदास होकर समय निकालने की वजह समय को मूल्यवान बनाने की सोचे। केवल आप ही नहीं है, जो इस समय घर पर रह रहे हो। व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी आज अपने परिवार के साथ अपने घर पर हैं लेकिन लोगों की नजरिये का फर्क है कि कुछ लोग तो इस समय को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं तो कुछ लोग सोच सोच कर ही बीमार हो रहे है कि है यह समय कब निकलेगा। यह समय दुनिया में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला है सकारात्मक परिवर्तन ।बहुत से लोग जो अपने घर को प्रतिदिन ढंग से देख भी नहीं पाते उन्हें अपने घर के कोने कोने का मालूम चल रहा है।वे अब तक अनजान बने बैठे थे कि घर में सभी कुछ अच्छा है किसी आवश्यक सुविधा का अभाव नही है।   लॉक डाउन का समय पूरा होगा तो अपने घर को पहले से बेहतर करने की कोशिश करेंगे। आज तक तो उन्होंने घर की महिलाओं की बातों पर शायद ध्यान नहीं दिया होगा कि उन्हें कितनी तकलीफ होती है सुविधाओं के अभाव में। जिस व्यक्ति नेआज तक किचन में चाय तक नहीं बनाई थी बस जब चाय पीने की इच्छा हुई अपनी पत्नी को आवाज लगा दी  चाहे वह किसी जरूरी काम में ही क्यो न लगी हुई हो। आज वह घर का खाना बनाने में अपनी पत्नी की मदद कर रहे है। अब जान पाएंगे कि एक महिला इतने लोगों की फरमाइशो को सालो से कैसे पूरा करती होगी और अभी तक कर रही है।  वो भी बिना किसी स्वार्थ के।अब तक उसकी थकान को कोई क्यू नही देख पाये जब कि एक महिला अपने घर के पुरुषो के काम से लौटते ही पानी का गिलास भी हाथ मे देती है,जल्दी से चाय बनाती है और पूछती है कि किसी तरह की परेशानी तो नही हुई आने जाने में ।आज का दिन कैसा रहा जब कि पुरुषो ने इतने सालो में कितने दिन पूछा होगा ? जरा सोच कर बताइए🤔🤔🤔। अब उम्मीद करते है कि बैठे बैठे अपनी पत्नी को आर्डर देना शायद बंद हो जाए और अपने छोटे-छोटे कामों को स्वयं करने की आदत का विकास हो। एक बडा परिवर्तन बच्चो के प्रति नजरिये को लेकर भी आने वाला है।  जो माता पिता बच्चों को नासमझ समझते हैं उन्हें बच्चों की समझदारी का एहसास होगा उन्हें भी पता चलेगा कि बच्चों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है  बच्चों की कीमत  उनकी उनकी क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर आंकना गलत है। वर्किंग पेरेन्ट्स को अपने बच्चो की योग्यताओं का, रुचियो़, उनकी उनकी आवश्यकताओं का पता चल पाएगा और जिससे भविष्य में वह अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से नहीं करेंगे और ना ही उनके क्लास में प्राप्त मार्क्स के आधार पर उनके भविष्य का निर्धारण करेंगे । माता पिता के साथ इस समय बिताए गए अच्छे पलो के परिणामस्वरूप  बच्चे अपने माता-पिता के और करीब आएंगे उनकी झिझक कम होगी जिससे भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी या तनाव होने पर वे वे बेझिझक अपनी बात उनसे कह पाएंगे । हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स की सुसाइड केसेज में कमी होगी। यह भी हमारे लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा।
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सारांश  यह थी 21 दिनों के लाँकडाउन के कुछ सकारात्मक पहलू शायद इन सभी से आप भी सहमत होंगे। अब हम सबको हर हर पल को डर-डर बिताने की बजाय अपने लिए ,अपने परिवार, अपने समाज ,देश और संपूर्ण विश्व के लिए बेहतर बनाने की सोच रखनी चाहिए ।


मिलकर जीत ही लेंगे हम यह जंग
 कोरोना को नहीं डालने देंगे अपने रंग में भंग ।
इतनी हिम्मत नहीं की है हमसे जीत पाएगा वो
 क्योंकि अपनों की सच्ची  दुआएं हैं हमारे संग।।

रविवार, 29 मार्च 2020

कोरोना रूपी राक्षस से रण #कोरोना पर कविता #corona#lockdown

कविता का शीर्षक-"नही छोडेंगे इस रणको बीच मेंअधूरा
 
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच मे अधूरा
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा।
 यहाँ न किसी धर्म,जाति,संप्रदाय,
 अमीर,गरीबी का कवच काम नहीं आएगा
 यह रण तो हमारी एकता की मिसाल बन जाएगा ।
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा 
सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा। 
 यहां काम नहीं आएगी कोई राजनीतिक घृणा
 यह रण तो राजनीति के दलदल से दूर ले जाएगा।
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा । 
 यहां काम नहीं आएगी आरोप-प्रत्यारोपो की झड़ी 
 यह रण तो भाईचारे और परोपकार से जीता जाएगा।
 नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा 
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा 
 न हीं चलेगी यहां तलवारे,न ही धनुष बाण चलेंगे 
 न ही गिरने देंगे लहू की एक बूंद इस धरा पर
 यह रण तो इंसानियत की कसौटी पर लड़ा जाएगा। 
नहीं छोड़ेंगे इस रण को बीच में अधूरा 
 सब मिलकर जीत लेंगे इसे पूरा ।
 न हीं कर पाएगा अपनों को अपनों से दूर 
यह रण तो अपनेपन की पहचान कराएगा। 
 माना इतिहास में हुए थे रण अनेकों 
लेकिन यह रण सबसे अलग है देखो । 
यहाँ मानवता की जीत है, 
एक दूसरे से सच्ची प्रीत है
 भारतीयता की सुरीत है, 
जहां गा रहा हर कोई जागृति का गीत है।

 उम्मीद करती हूँ कोरोना रूपी राक्षस पर विजय की 
यह कविता आपको पसंद आएगी
 हमे पूर्ण विश्वास है हम इस भयावह परिस्थिति से जल्दी ही बाहर निकलेंगे 
बस तक हमे धैर्य के साथ २१दिन के 
लाँकडाउन के व्रत को पूरा करना है 
बहुत जल्द परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल होंगी।
 माँ हमारे सारे कष्टो का पूर्णत दमन करेंगी।

शनिवार, 28 मार्च 2020

सुविचार#शब्दो की ताकत#golden lines in hindi#motivation

दोस्तों में कोई दार्शनिक नहीं हूँ न ही कोई कवि और न ही महान लेखक हूं बस अपने दिल में उठ रही भावनाओं को कलम के माध्यम से कागज पर कभी कभार उतार देती हूं मुझे अपने अनुभवों को साझा करने में संतुष्टि का अहसास होता है यही मेरे लिए बहुत है।


१.अगर भावो की गहराई समझ मे आ रही हो तो शब्दो कोष का गहरा होना  आवश्यक नही

२.आपका एक एक अक्षर दिव्य हो जाता है यदि वह किसी के अंदर छाए तिमिर की परतो को खोलकर उसके सच्चे स्वभाव को सामने लाने में मदद करता है। 

३आपके शब्दों को किसी के लिए वेदना नही, प्रेरणा बनाइए 

४आपकी शब्दों में छुपे हुए भावनाओं की की कीमत ही है कि किसी के शब्द दवा बन जाते हैं क्यों किसी के शब्द केवल हवा बन जाते हैं। 

दोस्तों यदि आपको ये विचार अच्छे लगे हो तो लाइक करें और अपने दोस्तों को शेयर करें।

धन्यवाद

मंगलवार, 17 मार्च 2020

Net#set#jrf sanskrit exam#charvak darshan#चार्वाक दर्शन

लोकायत दर्शन#चार्वाक दर्शन#बार्हस्पति  दर्शन से सम्बन्धित तथ्य
चार्वाक दर्शन के संस्थापक बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए इसे बार्हस्पति दर्शन भी कहते है।

इसी का प्राचीन नाम लोकायत दर्शन है।

चार्वाक दर्शन सुख को ही जीवन का परम उद्देश्य मानता है।

 यह भौतिकता वादी दर्शन है जो वेदों की निंदा करता है।

यह अग्निहोत्र और श्राद्ध का निषेध करता है

चार्वाक दर्शन की दृष्टि में प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है।

चार्वाक दर्शन  ईश्वर और आत्मा का निषेध मानता है।

चार्वाक दर्शन काम को ही एकमात्र पुरुषार्थ मानता है

 चार्वाक दर्शन की दृष्टि में मृत्यु ही मोक्ष है।

चार्वाक दर्शन चार तत्वों को मानता है।👉 पृथ्वी जल तेज वायु

यह आकाश को तत्व नहीं मानता है।

चार्वाक दर्शन के सिद्धान्त
 प्रत्यक्ष प्रमाणवाद- चार्वाक दर्शन प्रत्यक्ष दिखाई देने वाली वस्तुओं को ही अंतिम सत्य मानता है यह अनुमान शब्द आदि प्रमाणो को नहीं मानता है।

 भौतिकतावा   - यह सांसारिक वस्तुओं को अत्यधिक महत्व देता है

भूत चैतन्य वाद  - पृथ्वी जल तेज वायु  इन 4 महा भूतों के सहयोग से ही शरीर में चेतनता उत्पन्न होती है यह कोई अलौकिक वस्तु नहीं है


ऐहिकसुखवाद- चार्वाक दर्शन  पृथ्वीलोक के सुख को ही महत्व देता है इसके अनुसार जो कुछ है वह इसी  पृथ्वी पर है इसलिए व्यक्ति को जब तक जीवित है  सुख पूर्वक रहना चाहिए इस संबंध में कहा भी गया है जब तक जियो सुख पूर्वक जियो   चाहे इसके लिए  किसी व्यक्ति से ऋण भी लेना पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए क्योंकि यह मानव जीवन फिर हमें नहीं मिलेगा। इसलिए जब तक रहो सुख पूर्वक रहो 

यावजीवेत् सुखम् जीवेत् ऋणम् कृत्वा घृतं पिबेद्
विशेष -
चार्वाक दर्शन,जैन दर्शन,बौद्धदर्शन ये तीनों नास्तिक दर्शन माने जाते हैं।

 चार्वाक दर्शन अवैदिक दर्शन में प्राचीनतम दर्शन है।

 यदि आप सभी को यह पोस्ट ज्ञानवर्धक लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले ताकि उन्हे भी परीक्षा की तैयारी में मदद मिले


शनिवार, 14 मार्च 2020

net #set#jrf exam sanskrit#sanskrit exam


Important questions for net#set#jrf exam sanskrit#sanskrit exam
sanskrit exam
1⃣मनुस्मृति के अनुसार क्रोध से उत्पन्न होने वाले  दोषो  की संख्या कितनी है?
 ✔️ 8

✏️दूसरों की चुगली करना, दुस्साहस करना, द्रोह करना, ईर्ष्या करना,  दूसरों के गुणों में दोष निकालना दूसरे के धन का अपहरण करना, वाणी में कठोरता लाना, निरपराधी को मारना     
2⃣ मनुस्मृति के अनुसार काम से उत्पन्न होने वाले दोषों की संख्या कितनी है?
✔️ 10

✏️शिकार करना, जुआ खेलना ,दिन में सोना ,दूसरे की निंदा करना स्त्रियो मे आसक्ति,नशा करना, नाचना ,गाना ,बजाना ,व्यर्थ घूमना     

3⃣ काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले दोषों का मूल कारण क्या है?
 ✔️ लोभ

4⃣संकेत ग्रह के कितने साधन बताए गए हैं
✔️8

5⃣शूद्रक द्वारा रचित मृच्छकटिकम् प्रकरण मे संस्कृत बोलने वाले  पात्रों की संख्या है ?
✔️ ६

6⃣स्वल्पोछिष्टस्तु तद्हेतु़....... विस्तार्यनेकधा: । रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए? 
 ✔️बीजं

✏️ दशरूपककार धनञ्जय ने अपनी रचना दशरूपक मे  पाँच अर्थप्रकतियाँ बताई है  

बीजं,  बिंदु, पताका, प्रकरी और कार्य  
    

7  वर्णस्वराद्युच्चारणप्रकारो यत्र शिक्ष्यते उपदिश्यते सा शिक्षा"  शिक्षा के संबंध में यह परिभाषा किसने दी है ? 

✔️सायणाचार्य ने 

 

8.शिक्षा के कितने अंग है

✔️? 6 

✏️वर्ण,स्वर,मात्रा,बल,साम,सन्तान

 

9.रामायण पर वैद्यनाथ  दीक्षित ने कौन सी टीका लिखी?

  ✔️दीपिका

 

10. गोविंद राज ने रामायण पर कौन सी टीका लिखी ✔️रामायण भूषण 

 

नोट रामायण पर 15वी,16वी,17वी शताब्दियो मे कई टीकाएँ लिखी गई थी ।अत: इनकी भी जानकारी हमें होनी चाहिए क्योंकि परीक्षाओं में टीकाओ से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं इसलिए आप इनका अध्ययन करें 👇
Net#set#jrfexam sanskrit#sanskrit important question#रामायण कीटीकाएँ
रामायण ग्रन्थ की टीकाएँ

11.गंगाअवतरण "की कथा रामायण के किस कांड में है? 

✔️बालकांड  35 वे सर्ग से 44 वे सर्ग तक 

12.ऋषि श्रॄंग आख्यान बालकांड के किस 

 सर्ग में वर्णित है?

✔️ 10वे सर्ग  से 15 वे सर्ग तक


 ✏️ मरुतोत्पति आख्यान बालकांड के 46 वे सर्ग से 47 
वे सर्ग तक

 ✏️ अहिल्या आख्यान बालकांड के  49 में

 सर्ग में है

 ✏️   शुनशेपाख्यान  बालकांड के 62 वे सर्ग में         
  read more👇रामायण महाकाव्य से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य#महषिवाल्मीकि की रामायण 
धन्यवाद
 उम्मीद करते है आप फिर  यहाँ से कुछ जानकारी पायेंगे



 Sanskrit jeeva#sanskrit blog#educational blog


मंगलवार, 3 मार्च 2020

मृच्छकटिकम् (प्रकरण) # संस्कृत साहित्य में शूद्रक की रचना#mrichchhakatikam

मच्छकटिकम् प्रकरण के सम्बन्ध में सामान्य तथ्य 

रचयिता---शूद्रक,
 अंक-10,
 रस-श्रृंगार,
नायक-चारुदत्त(एक निर्धन ब्राह्मण)  , नायिका --वसन्तसेना (एक गणिका)  चारुदत्त की पत्नी-धूता,  चारुदत्त का पुत्र- रोहसेन,  प्रतिनायक--शकार

,प्रकरण के नामकरण का आधार----** षष्ठ अंक **********                                             
प्रकरण के प्रत्येक अंक का शीर्षक इस प्रकार है----------
प्रथम अंक--अलंकार न्यास, द्वितीय अंक---धूतकर -संवाहक , तृतीय अंक----सन्धिच्छेद, चतुर्थ अंक---मदनिका-शर्विलक     पंचम अंक----दुर्दिन,  षष्ठ अंक---प्रवहण-विपर्यय,   सप्तम अंक--- आर्यकापहरण   अष्टम अंक---वसन्तसेना मोचन ,नवम अंक---व्यवहार, दशम अंक---संहार(उपसंहार)

 मच्छकटिकम् (mrichchhakatikam) से संबंधित अन्य पोस्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें  

मृच्छकटिकम् प्रकरण#mrichchhkatikam# संस्कृत साहित्य


/>                                                       धन्यवाद        

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

Motivational lines/प्रेरणास्पद वाक्य


Motivational lines/प्रेरणास्पद वाक्य

एक अवसर कब आपको अफसर बना दे आपको पता भी नही चलेगा इसलिए जीवन में जब भी कोई अवसर मिले उसे खाली हाथ नही जाने दे  


हर दिन उस काम  को अवश्य करे जो दुनियादारी से दूर ले जाकर आपको अपने में खोने का अवसर देता है।

 ईश्वर ने आप सभी को अज्ञ नही किसी न किसी चीज का विशेषज्ञ बनाया है।

 गलती करना  कोई बडी गलती नही है उससे बडी गलती है जानते हुए सुधार नही करना। 

आप चारदीवारी में बैचेन बैठे है और  बाहर दुनिया आपके टैलेंट को देखने के लिए  बेताव है

  Golden quotes

 Read more

Happy teachers day
शिक्षक दिवस


motivational words# Golden words #courage

संस्कृत जीवा  इस blog पर  संस्कृत विषय से संबंधित पोस्ट्स लिखी गई है। आप इनका अध्ययन करअपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं

उम्मीद करती हूं हमारा छोटा सा प्रयास आपको सार्थक लगे कृपया लाइक शेयर और कमेंट करना ना भूले

धन्यवाद

बुधवार, 8 जनवरी 2020

सांख्यदर्शन#सांख्यकारिका के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#सत्कार्यवाद क्या है

  सांख्यदर्शन#सांख्यकारिका के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर      


1.सांख्य दर्शन के प्रवर्तक है ?
महर्षि कपिल


/> 2.सांख्यकारिका पर सांख्यकौमुदी टीका किसने लिखी वाचस्पति मिश्र ने

सांख्य दर्शन के अनुसार दुख कितने प्रकार का है?
 तीन प्रकार
आदिदैविक, आदिभौतिक और आध्यात्मिक

3.सांख्य दर्शन में अशक्ति के कितने भेद  बताए हैं?
 28
सांख्य दर्शन द्वैतवादी है।

4.सांख्य दर्शन के अनुसार अपवर्ग (मोक्ष) का कारण क्या है?   विवेक

5.सांख्य दर्शन के अनुसार बंधन का कारण है?
अविवेक
/> 6.सांख्य दर्शन के अनुसार कितने प्रमाण हैं?
3
1.प्रत्यक्ष प्रमाण 2. अनुमान प्रमाण 3. शब्द प्रमाण
  सांख्य दर्शन उपमान  प्रमाण को नहीं मानता है

7.पंचमहाभूतो की प्रकृति है ?
 अहंकार

8.अहंकार की प्रकृति है?
 महत्त् (बद्धि)


प्रकृतेर्महांस्ततो अहंकारतस्माद् गणश्च षोड़शक: ।  

तस्मादपि षोड़शकात्पञ्चभ्य:पञ्च भूतानि ।

उपर्युक्त श्लोक के अनुसार मूल प्रकृति से  महत् ,महत् से अहंकार ,अहंकार से सोलह तत्वों का समूह है( एकादश इंद्रियां और पांच तन्मात्राएं ) पांच तन्मात्राओ से पंचमहाभूत उत्पन्न हुए है।

 9.सांख्य दर्शन के अनुसार सत्व रज और तम गुणों की साम्यवस्था कहलाती है?
मूल प्रकृति

10.सांख्य दर्शन के अनुसार त्रिगुणात्मक, अविवेकी, विषय ,सामान्य  प्रसवधर्मिता  किसके गुण है?
मूल प्रकृति के
प्रसवधर्मिता का अर्थ  =उत्पन्न करने की क्षमता 

11.प्रकृति आत्मा को कितने रूपों के द्वारा बांधती है
7 रूपों के द्वारा
   
12.आप्तवाक्यं वाक्यम किम् ? शब्द:

13.लघुऔर प्रकाशक यह किस गुण की विशेषता है?
 सत्व गुण  की

सत्व गुण  रजोगुण और तमोगुण के संबंध में निम्न श्लोक द्ष्टव्य है?
/>

सत्वं लघु प्रकाशकमिष्टमुपष्टम्भकं चलञ्च रज: ।    

गुरु वरणकमेव तम,प्रदीपवच्चार्थतो वृति:।।उपर्युक्त श्लोक के अनुसार सत्व गुण लघु और प्रकाशित करने वाला है, रजोगुण उपस्टम्भक और  अस्थिर स्वभाव वाला होता है, तमोगुण भारी और सत्य और असत्य पर आवरण डालने वाला होता है 

निष्कर्ष= सांख्यकारिका सांख्य दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसके रचयिता ईश्वर कृष्ण है।सांख्य दर्शन में कुल 25 तत्व कुल माने गए हैं जो इस सृष्टि की उत्पत्ति में सहायक है।


 दोस्तों सांख्य दर्शन टॉपिक बहुत महत्वपूर्ण है संस्कृत की प्रतियोगी परीक्षाओंं जैसेFirst grade#Net#Set मे इससे एक से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दिए गए links पर क्लिक करके भी आप इसके संबंध में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

शनिवार, 4 जनवरी 2020

भाषाविज्ञान के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर# भाषा विज्ञान की उत्पत्ति के सिद्धांत

भाषाविज्ञान के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर


भाषा विज्ञान, भाषा की उत्पत्ति ,उसकी बनावट, उसके विकास तथा उसके हास की वैज्ञानिक व्याख्या करता है यह परिभाषा भाषा विज्ञान के संबंध में किसने दी है?
 श्यामसुंदर दास ने

भाषा विज्ञान का कौन सा सिद्धांत  धार्मिक आस्था पर अवलंबित है?
 दैवीय सिद्धांत

दैवीय सिद्धांत के अनुसार भाषा की उत्पत्ति किसके द्वारा हुई है? ईश्वर के द्वारा

 संकेत सिद्धांत का दूसरा नाम कौनसा है?
 निर्णय सिद्धान्त

किस सिद्धांत के अनुसार प्राचीन मानव के विभिन्न संकेतों से ही व्यवहार की भाषा की उत्पत्ति हुई है?
 संकेत सिद्धांत
नोट यह संकेत आंगिक होते थे

संकेत सिद्धांत के प्रतिपादक कौन माने जाते हैं?
 फ्रांसीसी विद्वान रूसो

इंगित सिद्धांत के प्रतिपादक कौन है ?
 रिचर्ड, रोव तथा जोहान्सन

किस सिद्धांत के अनुसार धातु से निर्मित वस्तुओं पर चोट करने से अलग-अलग प्रकार की ध्वनि उत्पन्न हुई है?
धातु सिद्धान्त

 धातु सिद्धांत को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
 अनुरणन सिद्धांत

किस सिद्धांत के अनुसार मानव के विभिन्न आवेग जैसे हर्ष,क्रोध, उत्साह आदि भावों की अवस्था में उत्पन्न ध्वनि से भाषा का निर्माण हुआ है?
 आवेग सिद्धांत

नोट अन्य नाम मनोरागाभिव्यंजक शब्दमूलकतावाद, इंटर्जेक्शन थ्योरी

अनुरणन सिद्धांत के मूल प्रवर्तक है
प्लेटो

लेटिन भाषा में लिंगुआ शब्द का अर्थ है?
जिह्वा

प्रतिभा सिद्धांत के प्रवर्तक है?
 भर्तृहरि

 केन्टुम का शाब्दिक अर्थ है?
 सौ 

भाषा उत्पत्ति का सर्व प्राचीन सिद्धांत कौन सा है
 दिव्य उत्पत्ति सिद्धांत

ग्रिम नियम मे कितनी ध्वनिया आती है?
9
/> सन्ध्यक्षर कितने है?
4
ए,ओ,ऐ,औ

भाषा की उत्पत्ति का संपर्क सिद्धांत किसने दिया?  जी रेवेज

पाणिनीय शिक्षा में ब्राह्म वर्णसमाम्नाय की संख्या है?-63या64

पाणिनीय शिक्षा के अनुसार कुल स्वर ध्वनियाँ है?21

दु:स्पृष्ट ध्वनि है?ळ कु,खु,गु,घु

प्रथम वर्ण परिवर्तन अथवा ग्रिम नियमके अनुसार मूल भारोपीय भाषा की ध्वनियाँ घ,ध, भ किस मे परिवर्तित होती है? ग,द,ब में

नोट :ग्रिम के प्रथम नियम के अनुसार मूल भारोपीय भाषा की ध्वनियाँ भारोपीय जर्मनिक भाषा में भाषा में बदलती है।
ग्रिम के प्रथम नियम के अनुसार से घोष महाप्राण स्पर्श ध्वनियाँ सघोष  अल्पप्राण ध्वनियो में परिवर्तित हो जाती है;

/>

भाषा विज्ञान की उत्पत्ति से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न अगली पोस्ट में देख सकते हैं  मैं उम्मीद करती हूं कि इस पोस्ट में दिए गए महत्वपूर्ण प्रश्न आप सभी के लिए की First grade#Net#Set की परीक्षाओं में तैयारी की दृष्टि से मददगार रहेंगे

 प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद 

बुधवार, 1 जनवरी 2020

Golden quotes/सुविचार motivational thoughts



संतुष्टि अंदर होती है संतुष्टि  बहुत कीमती है
 इसकी कीमत बाहर वाले से नहीं खुद से तय होती हैसंतुष्टि केवल  हीरे जवाहरात में नहीं पत्थर और मिट्टी में भी हो सकती है।जो चीज आप को संतुष्ट करती है वह दुनिया की सबसे कीमती चीज है।




 मंजिल पर बढ़ते कदमो की रफ्तार धीमी ही सही
 लेकिन ऐसी हो कि निशान बन जाए


 जो मेहनत दिल से हो वह कभी खाली नही जाती
 मेहनत की कीमत एक दिन जरूर झोली मे होती है।
Motivational thoughts and Golden quotes  #happiness image                                                                                               

मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

संस्कृत में कारक प्रकरण/Karak in sanskrit practice set 2 /sanskrit grammar

संस्कृत में कारक प्रकरण  karak in sanskrit)practice set 2 /sanskrit grammar

संस्कृत में कारक प्रकरण / संस्कृत व्याकरण
karak/कारक प्रकरण

1."क्तस्य च वर्तमाने" सूत्र से वाक्य मे कौनसी  विभक्ति प्रयुक्त होती है 
           षष्ठी विभक्ति।   
2.अहम् राज्ञ:पूजित: वाक्य मे क्त प्रत्यय का प्रयोग किस काल मे है?
 वर्तमान काल 
( क्तस्य च वर्तमाने  सूत्र से)
3.कृष्णस्य कृति: वाक्य मे किस सूत्र से षष्ठी विभक्ति प्रयुक्त हुई है
 कर्तॄ कर्मणोः कृति      
4."षष्ठी चानादरे" सूत्रानुसार अनादर या तिरस्कार करके कोई क्रिया की जाए तो उसमें कौन सी विभक्ति होती है?
 षष्ठी विभक्ति या सप्तमी विभक्ति                            
5.रुदति परिवारे वनं प्राव्राजीत्  में कौन सी विभक्ति है?                                                              
  सप्तमी और षष्ठी( षष्ठी चानादरे सूत्र से )
6."निमित्तात कर्मयोगे"  सूत्र से  फल प्राप्ति मे कौन सी विभक्ति प्रयुक्त होती है 
सप्तमी विभक्ति 
7."मातु: स्मरणम् "इस वाक्य में विधायक सूत्र कौनसा है।  
अधीगर्थदयेशां कर्मणि 
8.गुरु शिष्याय क्रुध्यति यहां सम्प्रदान संज्ञा कौन से सूत्र से होगी
 क्रुध्यद्रुहेर्ष्यासूयार्थानां यं प्रति कोप: सूत्र से
9."विप्राय गां ददाति " यहाँ सम्प्रदान संज्ञा किस सूत्र से है? "कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदान:

10. "बालक:पुष्पेभ्य: स्पृह्यति यहाँ पुष्पेभ्य मे सम्प्रदान संज्ञा किस सूत्र से होगी? 
स्पृहेरीप्सित: सूत्र से
11. क्रुध,द्रुह,ईर्ष्य,असूय आदि धातुओं के योग मे विभक्ति होगी? 
चतुर्थी विभक्ति
12." क्रुधद्रुहोरपसृष्टयो: कर्म" सूत्र से कौनसी संज्ञा का विधान है? 
कर्म संज्ञा 
13.ऊपर लिखित सूत्र के अनुसार  क्रुध्,द्रुह धातुओ से पहले यदि उपसर्ग होगा तो वाक्य में कौन सी विभक्ति लगेगी?
 दितीया


विशेष--
  पोस्ट से पहले भी कारक प्रकरण से संबंधित अभ्यासार्थ  जो प्रश्न कराए गए उन्हें नीचे दिए गए लिंक पर clickकरदेख सकते है 




धन्यवाद<