"प्रत्यय प्रकरण" से परीक्षाओ में पूछे गए प्रश्न (Important questions for all Competitive exam) वृत्+शानच् का रूप बनेगा?---वर्तमान: क्री+शतृ का शुद्ध रूप क्या है?--क्रीणन् क्री+शानच् का शुद्घ रूप क्या है?-क्रीणान: शतृ प्रत्यय किस प्रकार की धातुओ में लगता है?--परस्मैपदी धातुओ में शानच् किस प्रकार की धातुओ में लगता है?--आत्मनेपदी धातुओ में ब्रू+शतृ का शुद्ध रूप क्या है?--ब्रुवण् ब्रू+शानच् का शुद्ध रूप क्या है?--ब्रुवाण: Tag नाट्यशास्त्र के अनुसार नायक के भेद क्तवतु प्रत्यय मे शेष रहता है?--तवत् क्त प्रत्यय में शेष रहता है?--त क्त और क्तवतु प्रत्यय किस काल में प्रयुक्त है?--भूतकाल में मन्+क्त का शुद्घ रूप क्या है?--मत: पूजित: में प्रकृति और प्रत्यय क्या है?--पूज्+क्त "बालकेन रुदितम्" में रुदितम् में कौनसा लिंग है?--नपुंसकलिंग लिख् धातु में क्त प्रत्यय करने पर भाववाच्य में रूप बनेगा--लिखितम् "तौ सत्" यह सूत्र किस प्रत्यय से सम्बन्धित है?--शतृ और शानच् दग्ध:में धातु है?--दह् धातु तृ+क्त का शुद्ध रूप होगा?--तीर्ण: ज्या+क्त का शुद्ध रूप होगा?--जीन: चिन्वान:में प्रकृति-प्रत्यय है?--चि प्रकृति,शानच् प्रत्यय है महाभारत का स्वरूप: साहित्य जगत को देन ण्वुल प्रत्यय में शेष रहता है?--वु " युवोरनाकौ "सूत्र से वु को आदेश होता है?--अक नी+ण्वुल का शुद्ध रूप होगा? --नायक इष्+ण्वुल से शुद्ध रूप होगा?--एषक: " प्रस्तावक:"पद में प्रत्यय है?--ण्वुल प्रत्यय वाचक:में प्रकृति-प्रत्यय है?--ब्रू +ण्वुल चुर्+शानच् से क्या रूप बनेगा?--चोरयमाण: दा+ण्वुल से रूप बनेगा?--दायक: please like this post &share it Thank for visiting this blog.
Shobha Srishti यह" संस्कृत विषय एवं प्रेरणासम्बंधित ब्लॉग है, Motivational and Education Category blog
मंगलवार, 7 मई 2019
शनिवार, 4 मई 2019
संज्ञा प्रकरण सम्बन्धित प्रश्नोत्तर Practice set 3
Practice set 3 संज्ञा प्रकरण सम्बन्धित प्रश्नोत्तर 1.हलोनन्तरा संयोग सूत्र से किस प्रकार के वर्णो की संयोग संज्ञा होती है?--स्वरो के व्यवधान से रहित व्यंजन वर्ण समुदाय कीअर्थात् दोया दो से अधिक व्यंजनो के मध्य कोई स्वर नही होता है उदाहरण --इन्द्र,हस्त, राष्ट्र आदि। 2.सुबन्त कितने होते है?--21 सु,औ,जस् आदि 3. तिड़्न्त कितने होते है?-18 जिसमे 9आत्मनेपदी,9परस्मैपदी में होते है। 4. सुप प्रत्ययान्त और तिड़् प्रत्ययान्तो की पद संज्ञा करने वाला सूत्र है?--सुप्तिड़्न्तं पदम् 5. वर्णो की अतिशय निकटता -----कहलाती है?--संहिता 6. संहितासंज्ञा विधायक सूत्र है?-- पर सन्निकर्ष: संहिता 7. अयोगवाह कितने है?--5 8. पाणिनीय व्याकरण के अनुसार यम वर्ण कौनसै है?- कुँ,खुँ,गुँ,घुँ 9. कु,चु,टु,तु,पु किस प्रकार के वर्ण है?--उदित वर्ण। क्योकि ये हस्व उकार इत्संज्ञक है ।ये सभी अपने अपने वर्ग के अन्तर्गत आने वाले सभी वर्णो के बोधक है। संज्ञा प्रकरण से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर 10. प्रक्रियाकौमुदी के लेखक है?--रामचन्द्र 11. सवर्ण संज्ञाविधायक सूत्र कौनसा है?--तुल्यास्यप्रयत्नं सावर्ण्यम् 12. वार्तिककार कौन है?--कात्यायन 13. पाणिनि न् संस्कृत वाड़्मय में कितने वर्ण बतलाए गए है?--63या64 14. ऐ,ओ के कितने भेद है?--12 15. माहेश्वर सूत्रो में कुल कितने स्वर है?--9
शनिवार, 27 अप्रैल 2019
संज्ञाप्रकरण से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर ,Practice set -2
| संस्कृत व्याकरण |
| प्रत्याहार विधायक सूत्र |
| पाणिनाय शिक्षा केअनुसार उच्चारण स्थान |
रविवार, 21 अप्रैल 2019
काव्य के कितने गुण है? ( आचार्य मम्मट के अनुसार)
काव्य आचार्यो ने काव्य के गुण ,काव्य के दोषो पर चर्चा की है। काव्य- गुण किसे कहते है, गुणो के प्रकार कितने है, इस विषय पर यह पोस्ट लिखी जा रही है।इसे पढ़कर आप सभी काव्य के गुणो के बारे में समझ पाएँगें आचार्य मम्मट ने काव्य गुणो को परिभाषित करते हुए कहा है कि
ये रसस्याड्गिनो धर्मो शौर्यादय:इवात्मन: उत्कर्षहेतवस्ते स्युरचलस्थितयो:गुण (काव्यप्रकाश) जिस प्रकार शूरता,वीरता आदि हमारी आत्मा के धर्म है हमारे शरीर के नही उसी प्रकार शब्द अर्थ काव्य के शरीररूप माने गए है और रस को सभी काव्यज्ञों के द्वारा आत्मा कहा गया है। रस काव्य में अंगी माना गया है जबकि गुण अलंकार आदि इसके अंग है अत:काव्य गुण काव्य की आत्मारूप रस को बढानेवाले हेतु (कारण) है ये रसो के साथ निश्चित रूप से उपस्थित होते है। अर्थात् सभी रसो में कोई न।कोई गुण निश्चित रूप से होता ही है। मम्मट के अनुसार गुणो के प्रकार -मम्मट ने अपने काव्यशास्त्रीय ग्रंथ "काव्य प्रकाश "के" अष्टम उल्लास" में काव्य के तीन गुण बताए है उन्होने आचार्य वामन द्वारा बताए 10 गुणो का खण्डन किया है काव्यप्रकाश में मम्मट लिखते है- "माधुर्यौज:प्रसादाख्यास्त्रयस्ते न पुनर्दश " माधुर्य,ओज,प्रसाद नामक ये तीन गुण है दस नही (जैसा कि वामन आदि आचार्यो ने माना है) अत:काव्यगुण तीन है।मम्मट का यह मत सर्वमान्य है।
| काव्य के गुण |
माधुर्य का लक्षण-- आह्लादकत्वं माधुर्यम् श्रृड़्गारे द्रुतिकारणम् करुणे विप्रलम्भे तच्छान्ते चातिशयान्वितं (काव्यप्रकाश)
चित्त की द्रुति का कारण जो आह्लादकता अर्थात् आनन्दस्वरूप है वही माधुर्य गुण है यह श्रृंगार रस में,
करुण रस में और शान्त रस मे होता है। यह
संभोग श्रृंगार से अधिक करुण रस में होता है
,करुण रस से अधिक विप्रलम्भ श्रृंगार रस मे होता है, विप्रलम्भ श्रृंगार से अधिक शान्त रस में होता है।
अत:सबसे अधिक माधुर्य गुण शान्त रस में होता है।
ओजगुण का लक्षण --
दीप्त्यात्मविस्तृतर्हेतुरोजो वीररसस्थिति ।
वीभत्सरौद्ररसयोस्तस्याधिक्यं क्रमेण च
चित्त के विस्तार का कारण ,जो वीर रस में स्थित
दीप्ति है वही ओजहै। दीप्ति या ओज से अभिप्राय
किसी कार्य या वस्तु के प्रतिकूल होने पर उसे दूर करने
या नष्टकरने के लिए प्रेरणा का जो भाव मन मे पैदा होता है। वह ओज गुण है। उपरोक्त लक्षण के अनुसार यह वीर, वीभत्स और रौद्र इन तीनो रसो मे विद्यमान होता है। वीर रस की अपेक्षा वीभत्स रस मे अधिक ओज होता है और वीभत्स रस सेभी अधिक रौद्र रस मे पाया जाता है।
नोट:-- ओज गुण रौद्र रस में सर्वाधिक होता है।
प्रसाद गुण का लक्षण **
शुष्केनाग्निवत् स्वच्छजलवत्सहसैव य:। व्यापनोत्यन्त प्रसादौ असौ सर्वत्र विहितास्थिति:।। प्रसाद गुण की उपमा करते हुए बताया गया है कि जिस प्रकार शुष्क ईंधन में अग्नि आसानी से व्याप्त हो जाती है स्वच्छ जल मे कपडा़ आसानी से घुल जाता है उसी प्रकार काव्य का जो भाव चित्त में आसानी से व्याप्त हो जाताहै। उसमे प्रसादगुण होता है। अर्थात काव्य को पढ़ते ही उसके अर्थ को आसानी से समझा जा सके वहाँ प्रसाद गुण होता है। यह गुण सभी रचनाओ मे होता है।
काव्य के लक्षण यह भी पढ़े
शनिवार, 13 अप्रैल 2019
संस्कृत व्याकरण Practice set 1
व्याकरणबोध वस्तुनिष्ठ प्रश्न यहाँ संस्कृत व्याकरण के संज्ञा प्रकरण से सम्बन्धित परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर प्रस्तुत है।जो आपकी परीक्षा की तैयारी को अधिक बेहतर करने मे सहायक होंगे ताकि आप परीक्षा में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके पाणिनी की अष्टाध्यायी > का आदि सूत्र है? वृद्धिरादैच् लघुसिद्धान्त कौमुदी,मध्य सिद्धान्त कौमुदी,सार सिद्धान्त कौमुदी के लेखक है?-- वरदराज वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी के रचयिता भट्टोजिदीक्षित अयोगवाह वर्ण कितने है?--4 1अनुस्वार 2.विसर्ग 3 जिह्वामूलीय वर्ण 4उपध्यमानीय वर्ण मूल स्वर कितने है?-- 5 दीर्घ स्वरो की संख्या -8 लृवर्ण के कितने भेद है?--12 क्योकि इसकादीर्घ नही होता है उष्म वर्ण कौन से है?--श,ष,स,ह (4 वर्ण) अन्तस्थ वर्ण कौन से है?--य,व,र,ल (4 वर्ण) पाणिनीय शिक्षा के अनुसार कितने उच्चारण स्थान है?--आठ मूलरूप में प्रयत्न कितने प्रकार के है?-- दो प्रकार के (1)आभ्यान्तर प्रयत्न( 2 )बाह्य प्रयत्न आभ्यन्तर प्रयत्न के कितने भेद है?--5( 1) स्पृष्ट--सभी स्पर्श वर्णो का होता है (2)ईषत्स्पृष्ट -- अन्त:स्थ वर्णो का होता है (य,व,र,ल) (3)विवृत--स्वरो का ( 4) ईषद्विवृत--उष्मवर्णो का होता है (श,ष,स,ह) (4) संवृत --हस्व अ वर्ण बाह्य प्रयत्नो के कितने भेद है?-- 11 1विवार 2.संवार 3श्वास 4नाद 5घोष 6अघोष 7.अल्पप्राण 8 महाप्राण 9उदात्त 10.अनुदात्त 11स्वरित
| बाह्य प्रयत्न |
शनिवार, 6 अप्रैल 2019
संस्कृत के महत्त्वपूर्ण प्रश्न (Important questions for exam)
भवभूति का समय निर्धारित है?--680-750 ई. सेतुबन्ध महाकाव्य के रचनाकार है?- प्रवरसेन छन्दोमञ्जरी के लेखकहै?-गंगादास छन्दसूत्र के प्रणेता है?--पिंगलाचार्य विष्णुशर्मा ने पञ्चतंत्र की कथा सुनाई?--राजा अमरशक्ति के पुत्रो को प्रसन्नराघवम् के रचयिता है?--जयदेव जयदेव का अपरनाम है?--पीयूषवर्ष जानकीहरण महाकाव्य के कर्ता है?--कुमारदास जानकीहरणमहाकाव्य में सर्गो की संख्या है?--25 हरविजय महाकाव्य के रचयिता है?--कवि रत्नाकर विष्णुपुराण में पुराण के कितने लक्षण बताएँ है?--5 श्रीमदभागवत के अनुसार पुराण के कितने लक्षण है?-10 मालविकाग्निमित्रम के विदूषक का क्या नाम है?--गौतम विक्रमोर्वशीयम् नाटक के विदूषक का क्या नाम है ?--माणवक निसर्गनिपुणा:स्त्रिय: यह उक्ति किस नाटक से ली गई है?--मालविकाग्निमित्रम् (अंक 3) अविश्वसनीया:पुरुषा: यह उक्ति किस नाटक की है?--मालविकाग्निमित्रम् ( अंक3 ) "विक्रमोर्वशीयम्" नाटक के नायक का नाम है?--पुरुरवा पुरुरवा के रथ का नाम है?-- सोमदत्त विक्रमोर्वशीयम् नाटक के नायक की ध्वजा का चिन्ह है?---हरिण " अनुत्सेक:खलु विक्रमालंकार" यह सूक्ति किस ग्रंथ से है?--विक्रमोर्वशीयम् विक्रमोर्वशीयम् में स्त्रियों के लिए वर्जित वन का क्या नाम है?---कुमारवन पुरुरवा ने किस मणि की सहायता से लता रूप में परिवर्तित उर्वशी को प्राप्त किया था?--संगमनीय मणि अविमारक नाटक के नाटककार है?--भास अविमारक नाटक की नायिका का नाम है?--कुरंगी अविमारक नाटक में कुरंगी के पिता का नाम है?--कुन्तिभोज नाटक में नायक अविमारक का दूसरा नाम है?--विष्णुशर्मा "लोककथाआश्रित" भास के नाटकों में किस रस की प्रधानता है?--श्रृंगार रस की भासकृत प्रतिमा नाटक का नामकरण किस अंक के आधार पर हुआ है?--अंक 3के आधार पर नीतिशतक काव्य काव्य की किस विधा के अंतर्गत आता है?--मुक्तक काव्य विधा हर्षवर्धन कृत रत्नावली में रत्नावली किस देश की राजकुमारी है?--सिंहलदेश की कालक्रमेण जगत:परिवर्तमाना यह पंक्ति किस नाटक में है?--स्वप्नवासवदत्ता अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक में इन्द्र के सारथि कानाम है?--मातलि काव्यादर्श के रचनाकार है?--महाकवि दण्डी नागानन्द नाटक के रचनाकार है?--हर्ष वर्धन मनुस्मृति के प्राचीनतम टीकाकार है?--मेघातिथि विदुरनीति महाभारत के किस पर्व मे है?-*उद्योग पर्व में उत्तररामचरितम् में प्रमुख रस है?--करुण रस read moreसंस्कृत की परीक्षा में पूछे गए महत्त्वपूर्ण प्रश्न संस्कृत साहित्य के 25 Important questions
गुरुवार, 4 अप्रैल 2019
महाभारत का स्वरूप - साहित्य जगत को देन
महाभारत का स्वरूप - साहित्य जगत को देन :-
h3 style="text-align: left;"> महाभारत एक विश्व कोषात्मक ग्रंथ है। जिसमे एक लाख श्लोक है।इसमे कुल 18 पर्व माने जाते है जिसमें कौरव पांडवो के इतिहास के साथ साथ प्रसिद्ध आख्यान वर्णित है जिसके आधार पर अनेक महाकाव्यो की रचना हुई है, संस्कृत में प्रसिद्ध नाटक लिखे गए ।महाभारत में सभी विषयो का समावेश होने के कारण यह महान ग्रंथ के रूप में प्रसिद्ध है।महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास है जो पराशर मुनि और सत्यवती के पुत्र है महाभारत के विकास के सोपान :--महाभारत महाकाव्य का विकास तीन चरणो में हुआ है-- 1 .जय 2. भारत 3. महाभारत| महाभारत का स्वरूप |
| महाभारत के विकास के सोपान |
शकुन्तलोपाख्यान महाभारत के आदिपर्व के अध्याय 68-74 में है। नलोपाख्यान महाभारत के वनपर्व के अध्याय 53 से 79 तक है। रामोपाख्यान महाभारत के वनपर्व के अध्याय 274-291में है रामोपाख्यान मार्कण्डेय मुनि द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया है सावित्री उपाख्यान महाभारत के वनपर्व के अध्याय 292-99तक है। महाभारत पर आश्रित काव्य- भारवि कृत किरातार्जुनीयम् , माघ कृत शिशुपालवध , क्षेमेन्द्र कृत भारत मञ्जरी, श्रीहर्ष कृत नैषधीयचरितम् , नलाभ्युदय कृत वामनभट्टबाण महाभारत पर आश्रित नाटक--महाभारत का कथानक लेकर भास ने छ: नाटक लिखे है--1.दूतघटोत्कच 2.दूतवाक्यम् 3.कर्णभार 4.मध्यमव्यायोग 5. पञ्चरात्रम् 6.उरूभंगम् कालिदास कृत अभिज्ञानशाकुन्कलम् (7अंक), भट्टनारायण कृत वेणीसंहार (6अंक), राजशेखर कृत बालभारत महाभारत पर आश्रित चम्पू काव्य--1.नलचम्पू--त्रिविक्रमभट्ट, 2.भारतचम्पू--अनन्तभट्ट 3.पांचालीस्वयंवरचम्पू--नारायणभट्ट 4.द्रौपदी परिणय चम्पू--चक्रकवि महाभारत पर लिखे गए टीकाग्रंथ ---ज्ञानदीपिका --देवबोध ने, विषम श्लोकी विमलबोध ने ,भरतार्थप्रकाश नारायण सर्वज्ञ ने , भारतभावदीप नीलकंठ ने ,लक्षाभरण वादिराज ने भारतोपायप्रकाश चतुर्भुजमिश्र ने महाभारत ग्रंथ की महत्ता--महाभारत एक महान विश्वकोष है।जिसमे धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष से सम्बन्धित सभी विषयो का समावेश है ,इसी कारण कहा गया है कि जो विषय इसमें प्राप्त है। जो यहाँ उपलब्ध नही है वे अन्यत्र भी प्राप्त नही होते है।
धर्मे चार्थे च कामे मोक्षे च भरतर्षभ । यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहस्ति न तत्क्वचित ।।
18 पुराणो से संबंधित तथ्य (puran) important post for net/set/collage lecturer examination
सदस्यता लें
संदेश (Atom)