मंगलवार, 21 जनवरी 2020

Motivational lines/प्रेरणास्पद वाक्य


Motivational lines/प्रेरणास्पद वाक्य

एक अवसर कब आपको अफसर बना दे आपको पता भी नही चलेगा इसलिए जीवन में जब भी कोई अवसर मिले उसे खाली हाथ नही जाने दे  


हर दिन उस काम  को अवश्य करे जो दुनियादारी से दूर ले जाकर आपको अपने में खोने का अवसर देता है।

 ईश्वर ने आप सभी को अज्ञ नही किसी न किसी चीज का विशेषज्ञ बनाया है।

 गलती करना  कोई बडी गलती नही है उससे बडी गलती है जानते हुए सुधार नही करना। 

आप चारदीवारी में बैचेन बैठे है और  बाहर दुनिया आपके टैलेंट को देखने के लिए  बेताव है

  Golden quotes

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Happy teachers day
शिक्षक दिवस


motivational words# Golden words #courage

संस्कृत जीवा  इस blog पर  संस्कृत विषय से संबंधित पोस्ट्स लिखी गई है। आप इनका अध्ययन करअपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं

उम्मीद करती हूं हमारा छोटा सा प्रयास आपको सार्थक लगे कृपया लाइक शेयर और कमेंट करना ना भूले

धन्यवाद

बुधवार, 8 जनवरी 2020

सांख्यदर्शन#सांख्यकारिका के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#सत्कार्यवाद क्या है

  सांख्यदर्शन#सांख्यकारिका के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर      


1.सांख्य दर्शन के प्रवर्तक है ?
महर्षि कपिल


/> 2.सांख्यकारिका पर सांख्यकौमुदी टीका किसने लिखी वाचस्पति मिश्र ने

सांख्य दर्शन के अनुसार दुख कितने प्रकार का है?
 तीन प्रकार
आदिदैविक, आदिभौतिक और आध्यात्मिक

3.सांख्य दर्शन में अशक्ति के कितने भेद  बताए हैं?
 28
सांख्य दर्शन द्वैतवादी है।

4.सांख्य दर्शन के अनुसार अपवर्ग (मोक्ष) का कारण क्या है?   विवेक

5.सांख्य दर्शन के अनुसार बंधन का कारण है?
अविवेक
/> 6.सांख्य दर्शन के अनुसार कितने प्रमाण हैं?
3
1.प्रत्यक्ष प्रमाण 2. अनुमान प्रमाण 3. शब्द प्रमाण
  सांख्य दर्शन उपमान  प्रमाण को नहीं मानता है

7.पंचमहाभूतो की प्रकृति है ?
 अहंकार

8.अहंकार की प्रकृति है?
 महत्त् (बद्धि)


प्रकृतेर्महांस्ततो अहंकारतस्माद् गणश्च षोड़शक: ।  

तस्मादपि षोड़शकात्पञ्चभ्य:पञ्च भूतानि ।

उपर्युक्त श्लोक के अनुसार मूल प्रकृति से  महत् ,महत् से अहंकार ,अहंकार से सोलह तत्वों का समूह है( एकादश इंद्रियां और पांच तन्मात्राएं ) पांच तन्मात्राओ से पंचमहाभूत उत्पन्न हुए है।

 9.सांख्य दर्शन के अनुसार सत्व रज और तम गुणों की साम्यवस्था कहलाती है?
मूल प्रकृति

10.सांख्य दर्शन के अनुसार त्रिगुणात्मक, अविवेकी, विषय ,सामान्य  प्रसवधर्मिता  किसके गुण है?
मूल प्रकृति के
प्रसवधर्मिता का अर्थ  =उत्पन्न करने की क्षमता 

11.प्रकृति आत्मा को कितने रूपों के द्वारा बांधती है
7 रूपों के द्वारा
   
12.आप्तवाक्यं वाक्यम किम् ? शब्द:

13.लघुऔर प्रकाशक यह किस गुण की विशेषता है?
 सत्व गुण  की

सत्व गुण  रजोगुण और तमोगुण के संबंध में निम्न श्लोक द्ष्टव्य है?
/>

सत्वं लघु प्रकाशकमिष्टमुपष्टम्भकं चलञ्च रज: ।    

गुरु वरणकमेव तम,प्रदीपवच्चार्थतो वृति:।।उपर्युक्त श्लोक के अनुसार सत्व गुण लघु और प्रकाशित करने वाला है, रजोगुण उपस्टम्भक और  अस्थिर स्वभाव वाला होता है, तमोगुण भारी और सत्य और असत्य पर आवरण डालने वाला होता है 

निष्कर्ष= सांख्यकारिका सांख्य दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसके रचयिता ईश्वर कृष्ण है।सांख्य दर्शन में कुल 25 तत्व कुल माने गए हैं जो इस सृष्टि की उत्पत्ति में सहायक है।


 दोस्तों सांख्य दर्शन टॉपिक बहुत महत्वपूर्ण है संस्कृत की प्रतियोगी परीक्षाओंं जैसेFirst grade#Net#Set मे इससे एक से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दिए गए links पर क्लिक करके भी आप इसके संबंध में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

शनिवार, 4 जनवरी 2020

भाषाविज्ञान के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर# भाषा विज्ञान की उत्पत्ति के सिद्धांत

भाषाविज्ञान के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर


भाषा विज्ञान, भाषा की उत्पत्ति ,उसकी बनावट, उसके विकास तथा उसके हास की वैज्ञानिक व्याख्या करता है यह परिभाषा भाषा विज्ञान के संबंध में किसने दी है?
 श्यामसुंदर दास ने

भाषा विज्ञान का कौन सा सिद्धांत  धार्मिक आस्था पर अवलंबित है?
 दैवीय सिद्धांत

दैवीय सिद्धांत के अनुसार भाषा की उत्पत्ति किसके द्वारा हुई है? ईश्वर के द्वारा

 संकेत सिद्धांत का दूसरा नाम कौनसा है?
 निर्णय सिद्धान्त

किस सिद्धांत के अनुसार प्राचीन मानव के विभिन्न संकेतों से ही व्यवहार की भाषा की उत्पत्ति हुई है?
 संकेत सिद्धांत
नोट यह संकेत आंगिक होते थे

संकेत सिद्धांत के प्रतिपादक कौन माने जाते हैं?
 फ्रांसीसी विद्वान रूसो

इंगित सिद्धांत के प्रतिपादक कौन है ?
 रिचर्ड, रोव तथा जोहान्सन

किस सिद्धांत के अनुसार धातु से निर्मित वस्तुओं पर चोट करने से अलग-अलग प्रकार की ध्वनि उत्पन्न हुई है?
धातु सिद्धान्त

 धातु सिद्धांत को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
 अनुरणन सिद्धांत

किस सिद्धांत के अनुसार मानव के विभिन्न आवेग जैसे हर्ष,क्रोध, उत्साह आदि भावों की अवस्था में उत्पन्न ध्वनि से भाषा का निर्माण हुआ है?
 आवेग सिद्धांत

नोट अन्य नाम मनोरागाभिव्यंजक शब्दमूलकतावाद, इंटर्जेक्शन थ्योरी

अनुरणन सिद्धांत के मूल प्रवर्तक है
प्लेटो

लेटिन भाषा में लिंगुआ शब्द का अर्थ है?
जिह्वा

प्रतिभा सिद्धांत के प्रवर्तक है?
 भर्तृहरि

 केन्टुम का शाब्दिक अर्थ है?
 सौ 

भाषा उत्पत्ति का सर्व प्राचीन सिद्धांत कौन सा है
 दिव्य उत्पत्ति सिद्धांत

ग्रिम नियम मे कितनी ध्वनिया आती है?
9
/> सन्ध्यक्षर कितने है?
4
ए,ओ,ऐ,औ

भाषा की उत्पत्ति का संपर्क सिद्धांत किसने दिया?  जी रेवेज

पाणिनीय शिक्षा में ब्राह्म वर्णसमाम्नाय की संख्या है?-63या64

पाणिनीय शिक्षा के अनुसार कुल स्वर ध्वनियाँ है?21

दु:स्पृष्ट ध्वनि है?ळ कु,खु,गु,घु

प्रथम वर्ण परिवर्तन अथवा ग्रिम नियमके अनुसार मूल भारोपीय भाषा की ध्वनियाँ घ,ध, भ किस मे परिवर्तित होती है? ग,द,ब में

नोट :ग्रिम के प्रथम नियम के अनुसार मूल भारोपीय भाषा की ध्वनियाँ भारोपीय जर्मनिक भाषा में भाषा में बदलती है।
ग्रिम के प्रथम नियम के अनुसार से घोष महाप्राण स्पर्श ध्वनियाँ सघोष  अल्पप्राण ध्वनियो में परिवर्तित हो जाती है;

/>

भाषा विज्ञान की उत्पत्ति से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न अगली पोस्ट में देख सकते हैं  मैं उम्मीद करती हूं कि इस पोस्ट में दिए गए महत्वपूर्ण प्रश्न आप सभी के लिए की First grade#Net#Set की परीक्षाओं में तैयारी की दृष्टि से मददगार रहेंगे

 प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद 

बुधवार, 1 जनवरी 2020

Golden quotes/सुविचार motivational thoughts



संतुष्टि अंदर होती है संतुष्टि  बहुत कीमती है
 इसकी कीमत बाहर वाले से नहीं खुद से तय होती हैसंतुष्टि केवल  हीरे जवाहरात में नहीं पत्थर और मिट्टी में भी हो सकती है।जो चीज आप को संतुष्ट करती है वह दुनिया की सबसे कीमती चीज है।




 मंजिल पर बढ़ते कदमो की रफ्तार धीमी ही सही
 लेकिन ऐसी हो कि निशान बन जाए


 जो मेहनत दिल से हो वह कभी खाली नही जाती
 मेहनत की कीमत एक दिन जरूर झोली मे होती है।
Motivational thoughts and Golden quotes  #happiness image                                                                                               

मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

संस्कृत में कारक प्रकरण/Karak in sanskrit practice set 2 /sanskrit grammar

संस्कृत में कारक प्रकरण  karak in sanskrit)practice set 2 /sanskrit grammar

संस्कृत में कारक प्रकरण / संस्कृत व्याकरण
karak/कारक प्रकरण

1."क्तस्य च वर्तमाने" सूत्र से वाक्य मे कौनसी  विभक्ति प्रयुक्त होती है 
           षष्ठी विभक्ति।   
2.अहम् राज्ञ:पूजित: वाक्य मे क्त प्रत्यय का प्रयोग किस काल मे है?
 वर्तमान काल 
( क्तस्य च वर्तमाने  सूत्र से)
3.कृष्णस्य कृति: वाक्य मे किस सूत्र से षष्ठी विभक्ति प्रयुक्त हुई है
 कर्तॄ कर्मणोः कृति      
4."षष्ठी चानादरे" सूत्रानुसार अनादर या तिरस्कार करके कोई क्रिया की जाए तो उसमें कौन सी विभक्ति होती है?
 षष्ठी विभक्ति या सप्तमी विभक्ति                            
5.रुदति परिवारे वनं प्राव्राजीत्  में कौन सी विभक्ति है?                                                              
  सप्तमी और षष्ठी( षष्ठी चानादरे सूत्र से )
6."निमित्तात कर्मयोगे"  सूत्र से  फल प्राप्ति मे कौन सी विभक्ति प्रयुक्त होती है 
सप्तमी विभक्ति 
7."मातु: स्मरणम् "इस वाक्य में विधायक सूत्र कौनसा है।  
अधीगर्थदयेशां कर्मणि 
8.गुरु शिष्याय क्रुध्यति यहां सम्प्रदान संज्ञा कौन से सूत्र से होगी
 क्रुध्यद्रुहेर्ष्यासूयार्थानां यं प्रति कोप: सूत्र से
9."विप्राय गां ददाति " यहाँ सम्प्रदान संज्ञा किस सूत्र से है? "कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदान:

10. "बालक:पुष्पेभ्य: स्पृह्यति यहाँ पुष्पेभ्य मे सम्प्रदान संज्ञा किस सूत्र से होगी? 
स्पृहेरीप्सित: सूत्र से
11. क्रुध,द्रुह,ईर्ष्य,असूय आदि धातुओं के योग मे विभक्ति होगी? 
चतुर्थी विभक्ति
12." क्रुधद्रुहोरपसृष्टयो: कर्म" सूत्र से कौनसी संज्ञा का विधान है? 
कर्म संज्ञा 
13.ऊपर लिखित सूत्र के अनुसार  क्रुध्,द्रुह धातुओ से पहले यदि उपसर्ग होगा तो वाक्य में कौन सी विभक्ति लगेगी?
 दितीया


विशेष--
  पोस्ट से पहले भी कारक प्रकरण से संबंधित अभ्यासार्थ  जो प्रश्न कराए गए उन्हें नीचे दिए गए लिंक पर clickकरदेख सकते है 




धन्यवाद<

सोमवार, 25 नवंबर 2019

तर्कसंग्रह (Tarksangrah) के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर# तर्कसंग्रह के अनुसार पदार्थ के 24 गुण


तर्कसंग्रह (Tarksangrah) के महत्वपूर्ण प्रश्न -उत्तर #rpsc#net#set exams                                                    

   1.अतीतादि व्यवहार हेतु : ?  
काल:

2.ज्ञानाऽधिकरण .....?
आत्मा 

3.आत्मा के कितने भेद है?
 दो ,1.जीवात्मा2. परमात्मा ।

4.मन का लक्षण क्या है?
 सखाद्युपलब्धिसाधनमिन्द्रियं मनः (सुख और दुख की ज्ञान कराने वाली इंद्रिय मन है) 

 5.तर्कसंग्रह के अनुसार गुण पदार्थ के कितने भेद हैं? 
span style="font-size: large;"> 24   

6. " गुण "का वह भेद जिसका ज्ञान केवल चक्षु से होता है?
रूप



7."रूप " नामक गुण के कितने प्रकार होते हैं?
सात 
शुक्ल ,नील, पीत ,रक्त, हरित, कपीश, चित्र 

8. शुक्ल रूप के कितने भेद हैं?
 दो ,अभास्वर शुक्ल और भास्वर शुक्ल 
Note: रूप रूप की सत्ता पृथ्वी, जल, तेज में रहती है वायु में नहीं

9. रस के कितने भेद है?
 6 
 मधुर, अम्ल,लवण, कटु, कषाय, तिक्त 

10.एकत्वादिव्यवहारहेतु:...?
संख्या 
नोट: यह सभी नौ प्रकार के द्रव्यों में पाई जाती है 

11.मानवव्यवहाराऽसाधारण कारणं.....?
परिमाण

12. परत्व के कितने भेद है? 
दो पहला दिक्कॄत परत्व, दूसरा कालकृत परत्व  



13.द्रव्य के कितने भेद हैं 
दो  1. सांसिद्धकं  2. नैमितिकं

14.श्रोत्रग्राह्य गुण:....?
शब्द:

15. "शब्द "नामक गुण के कितने भेद हैं?
 दो 
1.ध्वन्यात्मक  2.वर्णनात्मक 
/> वह ध्वनि जो किसी धातु से बने पदार्थ पर चोट करने या रगड़से उत्पन्न होती है वह "ध्वन्यातमक" तथा कंठ से उचारित वर्णादि "वर्णात्मक "होती है। 

tarksngrah से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए आप** दर्शनशास्त्र **लेबल पर क्लिक कर उन्हें पढ़ सकते हैंं

रविवार, 24 नवंबर 2019

तर्कसंग्रह से महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर#वैशेषिक दर्शन

1. वैशेषिक दर्शन में कितने पदार्थ माने गए हैं
7
तर्कसंग्रह के अनुसार 7पदार्थ

/> तर्कसंग्रह केअनुसार नौ(9)द्रव्य और उसके गुण क्या है?

गुरुवार, 14 नवंबर 2019

Golden word#motivational word#courage

किस्मत के बंद दरवाजे को निहारना बंद कर चुके हूँ, अपने हौसले इस कदर बुलंद कर चुके है


Courage

नीचे लिंक पर क्लिक कर अन्य motivational articles पढ़ सकते है


गुरुवार, 7 नवंबर 2019

तर्कसंग्रह के अनुसार नौ(9)द्रव्य कौनसे है?-उनके गुण क्या है?

/>  नमस्कार आप सभी का स्वागत है Sanskrit jeeva पर आज हम  न्याय वैशेषिक दर्शन पर आधारित ग्रंथ तर्कसंग्रह से सम्बन्धित चर्चा कर रहे है
दोस्तो जैसा कि आप सभी को विदित है कि तर्कसंग्रह के रचनाकार अन्नमभट्ट है इसी ग्रंथ से सम्बन्धित कुछ पोस्टे पूर्व में लिखी जा चुकी है जिन्हे आपनीचे दिए जा रहे लिंक पर Click कर के पढ़ सकते हैं

तर्कसंग्रह -अन्नमभट्ट प्रणीत ग्रंथ/न्याय वैशेषिक दर्शन         
  न्याय वैशेषिक दर्शन में सात(7)  पदार्थ माने गए हैं। 1द्रव्य,2 गुण 3कर्म, 4 सामान्य, 5 विशेष, 6समवाय 7अभाव
 आइये हम  इस पोस्ट के अंदर नौ द्रव्यो के बारे में जान लेते है 
तर्कसंग्रह (न्याय वैशेषिक दर्शन) के अनुसार सात पदार्थ
तर्कसंग्रह (न्याय वैशेषिक दर्शन) के अनुसार सात पदार्थ


तर्कसंग्रह के अनुसार नौ द्रव्य और उनके लक्षण
(गुण)
पृथिवी-- गन्धवती पृथिवी तर्कसंग्रह के अनुसार नौ द्रव्यों में पृथिवी की गणना होती हैपृथिवी में गंध का गुण होता है। गंधत्व  पृथ्वी का सामान्य लक्षण है
 पृथ्वी के दो भेद होते हैं 1.नित्य पृथिवी 2.अनित्य पृथिवी
नित्य पृथिवी परमाणुरुप में होती है क्योंकि परमाणु का कभी विनाश नही होता है अनित्य पृथ्वी कार्यरूप है  क्योकि कार्य हमेशा नही रहता है।
अनित्य पृथ्वी के पुनः तीन भेद किए गए  ।
> 1शरीररूप,2 इंद्रिय रूप और 3विषय रूप 
हमारा शरीर  शरीर रूप पृथ्वी है इसी तरह नाक केअग्र भाग में रहने वाला घ्राणेन्द्रिय इन्द्रिय रूप पृथ्वी है और मिट्टी पत्थर आदि विषयरूप पृथ्वी है अर्थात अनित्य पृथ्वी शरीर ,इन्द्रिय और विषय के रूप में रहती है।

जल तर्कसंग्रह में जो नौ द्रव्य बताए गए हैं उनमें जल नामक पदार्थ की भी गणना की गई है।जिसमें "शीतलता स्पर्श "नामक गुण समवाय संबंध से रहता है वह जल है 
प्रथम तो जल के भी दो भेद किये गये हैं 1नित्य,2अनित्य 
अनित्य जल को पुनः तीन भागों में विभक्त किया गया है।1. शरीर रूप 2 इन्द्रिय  रूप 3 विषय रूप शरीर रूप में यह वरूण लोक में रहता है ऐसा पुराणो में वर्णित है।  जीभ के अग्रभाग में विद्यमान रसनेन्द्रिय इन्द्रिय के रूप में पाये जाने वाला जल का भेद  है ,नदी नाले समुद्र में रहने वाला जल विषय रूप है 

तेज(अग्नि)-तर्क संग्रह के अनुसार नौ द्रव्यो में तेज की गणना होती है इसका सामान्य लक्षण है "उष्णस्पर्शवत्तेज" जिसका स्पर्श उष्ण(गर्म) होता है। जैसे अग्नि,चन्द्र,सूर्य आदि क्योकि इनमे तेज समवाय सम्बन्ध से रहता है। यह नित्य और अनित्य दो प्रकार का है नित्य तेज परमाणुरूप और अनित्य तेज कार्यरूप होता है। यह भी अनित्य रूप में शरीर, इन्द्रिय,और विषय केभेद से पुन:तीन प्रकार का होता है।
तर्कसंग्रह के अनुसार तेज के लक्षण और भेद
विषयरूप तेज के चार प्रकार

span style="background-color: lime; font-size: large;">विषय रूप अग्नि के भी चार प्रकार बताए गए है।1भौम तेज2 दिव्य तेज3औदर्य तेज 4 आकरज तेज


वायु - रूप रहित,और स्पर्शवान होती है  इसका कोईरूप नही है,लेकिन इसे त्वचा इन्द्रिय से महसूस कर सकते है

 वायु के दो भेद है नित्य और अनित्य है।नित्य  वायु परमाणु रूप होती है  अनित्य वायु  

 अनित्य वायु के पुन:तीन भेद है शरीर रूप में वायु वरूणलोक में रहता है जैसा कि पुराणादि में वर्णित है  इंद्रिय रूप में हमारी चमडी (त्वचा) के रूप में,विषय रूप में आंधी तूफान चक्रवात तथा हमारे शरीर में रहने वाले प्राणवायु है  हमारे विभिन्न प्रकार की क्रिया को करने के कारण एवं विभिन्न स्थानों में रहने के कारण यह प्राणवायु पांच प्रकार की होती है प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान


आकाश-तर्क संग्रह में बताए गए नौ द्रव्यों में आकाश भी सम्मिलित हैइसमें "शब्द गुण" समवाय संबंध से रहता हैआकाश एक और व्यापक है जबकि पृथ्वी आदि महाभूतों में अनेकत्व और अव्यापकत्व दिखाई देता है। आकाश नित्य है, अनित्य नहीं है

काल-  नौ द्रव्यो में छठवां तत्व काल हैंजो किसी वस्तु के अतीत,वर्तमान,भविष्य के ज्ञान  का कारण है  आकाश के सामान सर्वत्र रहने से एवं सभी पदार्थों में व्यवहार का कारण होने से व्यापक एवम् नित्य है।लौकिक व्यवहार में हम क्षण, घड़ी, दिन, रात, पक्ष ,मास, बर्ष आदि काल के अनेक भेदो का प्रयोग करते हैं परन्तु व्यवहार हेतु का एक मात्र आधार होने से कारण एक ही माना गया है,और नित्य हैं 

दिक्(दिशा)- प्राची, प्रतीची, वाची, उदीची आदि को जानने का जो एक मात्र कारण हैजिसके बिनाका प्राच्यादि का बोध नहीं हो सकता ऐसे असाधारण कारक को दिशा कहते हैं यह व्यापक और नित्य हैंदिशा आदि की जो दस भेद बताए जाते हैं वह केवल  औपाधिक  हैवस्तुत दिशा एक ही है एक होने के कारण वह व्यापक है।


   आत्मा- आत्मा भी नौ द्रव्यो में गिना जाने वाला एक द्रव्य है   जो ज्ञान का अधिकरण है अर्थात जो ज्ञान का आश्रय तत्व है,जिसमें चेतना विद्यमान हो वही आत्मा है न्याय शास्त्रियों के अनुसार आत्मा के दो भेद बताई गई है1 परमात्मा 2 जीवात्मा 
परमात्मा वह है जो सब कुछ जानता है  
 जीवात्मा - जीवात्मा भी परमात्मा का ही अंश है, जो सब कुछ नहीं जानता परंतु बहुत कुछ अवश्य जानता है प्रत्येक शरीर में विद्यमान होने से यह अनंत माना गया है जीवात्मा और प्राणी पर्यायवाची हैं।यह प्रत्येक शरीर में विद्यमान होने के कारण व्यापक हैऔर व्यापक होने के कारण नित्य भी हैं।

मन सुख और दु:ख की प्राप्ति का जो इन्द्रिय के रूप में साधन /माध्यम है।वह इन्द्रिय ही मन है। मन प्रत्येक शरीर में स्थित होने से अलग अलग अनन्त है वह परमाणुरूप और नित्य है।

शनिवार, 2 नवंबर 2019

तर्कसंग्रह के अनुसार कारण और उसके भेद#Tarksangrah- net/set/collage lecturer/first grade exams#rpsc sanskrit exams

तर्क संग्रह के अनुसार कारण और उसके भेद 
तर्क संग्रह के अनुसार कारण और उसके भेद/Tarksangrah-net/set/collage lecturer all sanskrit examsurer
तर्कसंग्रह के अनुसार कारण और उसके भेद

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019

my blogging journey/blogging journey of sanskrit jeeva

my blogging journey/blogging journey of sanskrit jeeva



my blogging journey/blogging journey of sanskrit jeeva
My blogging journey

.दोस्तों आप सभी के आशीर्वाद और साथ की वजह से आज मेरे कई आर्टिकल्स गूगल में फर्स्ट पेज पर रैंक कर रहे हैं मेरे लिए यह काफी बड़ी उपलब्धि है दोस्तों हर चीज की शुरुआत हम पैसे कमाने के लिए करें यह उचित नहीं self-satisfication भी अगर मिल रही है तो यह भी कामयाबी ही है जब आप काबिल बन जाएंगे तो पैसा तो खुद-ब-खुद आपके पास आएगा ही अगर पैसे की बात करें तो 1 वर्ष बीतने पर भी मैं अभी कुछ gain नहीं कर पाई हूं लेकिन पूरे धैर्य के साथ आगे बढ़ रही हूं

 my blog "sanskrit jeeva"

my blog" sanskrit jeeva"



/>  दोस्तों जो मैंने ऊपर Poins बताएंँ है वह मेरी ब्लॉगिंग Journey से सम्बन्धित है इनके आधार पर अगर मुझसे कोई पूछे कि आप ब्लॉगिंग में कितने कामयाब है, तो मेरा उत्तर होगा कि मैं अपने को नाकामयाब नहीं मान सकती मेरी काबिल बनने की कोशिश लगातार जारी है
3 Idiots movie ka dialogue hai काबिल बनने की कोशिश करो कामयाबी तो झक मार कर आपके पीछे आएगी
 
मेरे शब्दों मे ✏️

पकने से से पहले ही ही मीठा फल🍎 चखना चाहते हैं।

हम काबिल बनने से पहले कामयाब बनना चाहते है  
  

दोस्तों अपने माता-पिता के आशीर्वाद, ईश्वर की कृपा और आप सभी के प्रोत्साहन स्वरूप आगे बढ़ती रहूँ इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूँ। 

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

महर्षि वाल्मीकि की रामायण #ramayan questions #rpsc 1 grade & all sanskrit exams #रामायण में कितने कांड है?

चतुर्विंशति साहस्त्री संहिता रामायण ,शत साहस्त्री संहिता महाभारत है।
 रामायण मे सात कांड है, महाभारत मे 18पर्व है।
रामायण का सबसे बडा कांड युद्धकांड/लंकाकांड है। 128सर्ग
रामायण का सबसे छोटा कांड किष्किन्धा कांड है 67 सर्ग रामायण मे प्रधान/अंगीरस करुण रस, महाभारत मे प्रधान रस शान्त है।

  तुलसीदास रचित श्री रामचरितमानस का चित्र# ramcharitmanas image
तुलसीदास कृत रामायण


महाभारत की रीति पांचाली
महाभारत का स्वरूप:संस्कृत साहित्य को देन
 वेद और वैदिक साहित्य# संहिता, ब्रह्मण,आरण्यक,उपनिषद
श्रीमदभागवतगीता # Shrimad Bhagwat Geeta #श्रीमद्भागवत गीता में कितने अध्याय हैं?                         
Q महर्षि बाल्मीकि किस नदी के तट पर  स्नान करने जाते हैं?
 A.तमसा नदी के तट पर

Q पंचवटी किस नदी के तट पर स्थित है?
 Aगोदावरी नदी

Q लंका नगरी किस पर्वत पर स्थित थी?
A त्रिकूट पर्वत

Qराजा- सगर आख्यान रामायण के किस कांड में है?
A बालकांड में

Q राजा सगर के 60,000पुत्रों को किसने श्राप दिया था?
A कपिल मुनि ने

Q श्री राम और सुग्रीव की मित्रता का वर्णन किस कांड में है A.किष्किंधा कांड

राम और सुग्रीव की मित्रता किसने करवाई थी?
A. श्री हनुमान ने

Qश्री राम और हनुमान का मिलन किस पर्वत पर हुआ था? A.ऋषिमूक पर्वत

QRam aur Lakshman ko Bala atibala Vidya kisne pradan ki राम और लक्ष्मण को बला अतिबला विद्या किसने प्रदान की?
A.विश्वामित्र ने

Q.महर्षि बाल्मीकि का बाल्यकाल में नाम था ?
A.रत्नाकर

Qअहिल्या का उद्धार, राम द्वारा धनुष भंग, राम और सीता का विवाह ,परशुराम का क्रोध आदि का वर्णन किस कांड में हुआ है ?
A.बालकांड में

Q अहिल्या के पति का नाम?
A. ऋषि गौतम

Q समुद्र मंथन की कथा रामायण के किस कांड में है ?
A.बालकांड में

Q समुद्र मंथन से जो अश्व निकला उसका नाम था?
A. उच्चै:श्रवा

Q.महर्षि वशिष्ठ की पत्नी का नाम?
A.अरुंधति

Q.राजा जनक का मूल नाम क्या था?
A. शिरोध्वज

Q श्रीराम ने स्वयं का दूत बनाकर किसे लंका भेजा था?
A.अंगद को

Q. परशुराम के पिता का नाम था?
A. जमदग्नि

Q. महर्षि बाल्मीकि राम लक्ष्मण को किस प्रयोजन के लिए अपने साथ ले गए?
A. आश्रम की रक्षा के लिए

Q.बाली की पत्नी का नाम था?
A. तारा

Q.विश्वकर्मा के अवतार थे?
 A.नल नील

Q"राम और लक्ष्मण के शबरी के आश्रम मे जाने का वर्णन है " किस कांड में है?
A. अरण्यकांड मे

Q.शबरी के गुरु का नाम था?
 A.महर्षि मतंग

Q.जटायु -संपाती किसके पुत्र थे ?
A.अरुण के
Q. कौसल देश की राजधानी का नाम था?
A. अयोध्या Ram ka rajyabhishek Ram Bharat ka Milan
/> नल नील द्वारा समुद्र पर सेतु बंध , मेघनाथ, रावण का वध सीता की अग्नि परीक्षा, ब्रह्मा द्वारा राम की स्तुति,इन्द्र और दशरथ के उपदेश किस कांड में है
युद्ध कांड/लंकाकाण्ड में

बालकांड के समान अनेक इतिहास और पौराणिक आख्यानो का वर्णन किस कांड में है? Q.राम भरत का मिलन ,राम का राज्याभिषेक की घटनाएं रामायण के किस कांड में है?
A. लंका कांड
याद रखिए राम के राज्याभिषेक की तैयारी का प्रसंग अयोध्या कांड में है जबकि राम का राज्याभिषेक लंकाकांड में हुआ है 

Q.सीता संबंधित जन अपवाद, सीता परित्याग, लव कुश के जन्म ,लवणासुर का वध आदि घटनाओं का वर्णन किस कांड में है?A. उत्तरकांड में

Q. उत्तरकांड में सर्गो की संख्या है?
A. 111

Q.लवणासुर का वध किसने किया?
A.शत्रुघ्न ने
रामायण के कांड और उनमें सर्गो की संख्या/Ramayan questions रामायण के कांड और सर्गो की संख्या 

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019

रामायण महाकाव्य से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य # महर्षि वाल्मीकि की रामायण

 रामायण महाकाव्य से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य 

रामायण/ramayan
रामायण/ramayan



रामायण का समय 500ईसा पूर्व
 सगो की संख्या--645
कुल कांड --7,24000 श्लोक
रचयिता -महर्षि वाल्मीकि (आदि कवि की उपाधि)
रामायण महाकाव्य में मुख्य रस -- करुण रस
 रामायण में  सबसे अधिक बार प्रयुक्त छंद कौन सा है ?-अनुष्टुप छंद

Note आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के मुख से सर्वप्रथम जो श्लोक निकला था वह अनुष्टुप छंद मे ही था

रामायण के सात कांडों के नाम तथा उनमे  सर्गो की संख्या

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जैसा की आप सभी जानते है कि रामायण में कुल 7कांड है जिनमें क्रमबद्ध रूप से रामायण की कथा को आगे बढ़ाया गया है।इन सभी कांडों का  इस महाकाव्य में बहुत ही महत्व है आइए हम रामायण के सभी कांडों में वर्णित महत्वपूर्ण  घटनाओं के बारे में  कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं

1.बालकांड (Bal Kand)--- यह रामायण का प्रथम कांड इसमें कुल77सर्ग है रामायण  के बालकांड में प्रारंभिक चार सर्गो में रामायण रचना की पूर्वपीठिका दी गई है जिसमें नारद महर्षि वाल्मीकि को राम का जीवन चरित बताते है इसके पश्चात  कौच युगल करुण क्रन्दन सुनकर को सुनकर  बाल्मीकि के हृदय में करुणा उत्पन्न होती है अत्यंत क्रोधित हो कर शिकारी को शाप देते हैं यह श्लोक करुण रस से भरा हुआ था इसके पश्चात ही बाल्मिकी राम कथा लिखने में संलग्न हुए।
  बालकांड में राजा दशरथ की नीति और उनका शासन , संपादित पुत्रेष्टि यज्ञ ,राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न का जन्म ,विश्वामित्र द्वारा राम लक्ष्मण को अपने साथ ले जाना, विश्वामित्र द्वारा दोनों भाइयों को अनेक विद्याओं  की शिक्षा देना, विश्वामित्र द्वारा सुनाई गई गंगा पार्वती के जन्म ,कार्तिकेय का जन्म वृतांत ,राजा सागर और उनके साथ हजार पुत्रों का जीवन ,भागीरथ का जीवन,  गंगा का पृथ्वी पर अवतरण, दीति और अदीति , समुद्र मंथन,गौतम अहिल्या, वशिष्ठ और विश्वामित्र का पारस्परिक संघर्ष, त्रिशंकु की महत्वाकांक्षा, राजा अम्बरीष, विश्वामित्रका तपोवन, सीता स्वयंवर के प्रसंग वर्णित है। 

अयोध्या कांड-अयोध्या कांड में एक 119सर्ग है इसमें राम के राज्याभिषेक की तैयारी, मंत्रा के बहकाने पर कैकेई द्वारा राजा दशरथ से  दो वर माँगना,  जिनमें राम के लिए 14 वर्ष का वनवास,और अपने पुत्र भरत का राज्याभिषेक,राम का लक्ष्मण और सीता सहित वन को गमन, दशरथ का राम के वियोग में प्राणत्याग देना ,भारत द्वारा राज्य को ठुकराना, अपने भाई राम को मनाने के लिए चित्रकूट  गमन, राम की अयोध्या आने के लिए अस्वीकृति भारत द्वारा राम की पादुकाओं को अयोध्या लाना , भरत का शपथ ग्रहण,राम भारत को राजधर्म का उपदेश देते है जाबालि का नास्तिक मत, राम द्वारा उसका खंडन,राम का चित्रकूट छोड़कर दंडकारण्य में प्रवेश का वर्णन इसी कांड में है 

अरण्यकांड --इसमें  75सर्ग है इसमें राम लक्ष्मण सीता का दण्डकारण्य में निवास करना,बिराध जैसे राक्षसों का वध करना, पंचवटी में प्रवेश, शूर्पनखा का आगमन , उसका राम लक्ष्मण से विवाह के लिए याचना ,लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक काटना ,खरदूषण आदि  चौदह हजार राक्षसों का वधकरना ,रावण द्वारा सीता का हरण ,जटायु द्वारा सीता की रक्षा के लिए प्रयास करना, जटायु का रावण द्वारा वध ,  राम लक्ष्मण सीता की खोज करते है ,  राम की कबंध राक्षस से भेंट ,शबरी प्रसंग ,शबरी द्वारा सुग्रीव सेेे मित्रता का  परामर्श देना ,पंपा सरोवर के दर्शन आदि घटनाएं यहाँ वर्णित है। 

b>किष्किंधा कांड --इसमेंं 67सर्ग है इस कांड की प्रमुख घटनाएं है --हनुमान द्वारा राम और सुग्रीव की मित्रता कराना, राम द्वारा  सुग्रीव के भाई बाली का वध करना ,सुग्रीव और अंगद का राज्याभिषेक ,सुग्रीव का राम को सीता माता की खोज के लिए वचन देना, राम का प्रस्त्रवणगिरी पर 4 माह तक  जीवन यापन,  सुग्रीव द्वारा वानर सेना को सीता माता की खोज करने का आदेश, हनुमान की  संपाति से भेंट, संपाति द्वारा सीता केेेे रावण की अशोक वाटिका में होने की सूचना , जामवंत  हनुमान को उनकी स्वयं की शक्ति को जगाने के लिए उद्बोधन करते हैं। 

सुंदरकांड -- इसमें68 सर्ग है हनुमान का लंका में अशोक वाटिका में पहुंचना सीता मां के दर्शन करना सीता मां को श्रीराम की अंगूठी देना, श्रीराम का संदेश सुनाना अशोक वाटिका का हनुमान द्वारा उजाड़ना, लंकापति रावण के आदेश पर हनुमान की पूंछ में आग लगाना ,हनुमान का समुद्र में पहुँचकर  आग बुझाना  पुन: सीता का संदेश लेकर  अपने स्वामी श्री राम तक पहुंचने का वर्णन है

युद्ध कांड या लंका कांड रामायण के 7 कांडों में यह का सबसे बड़ा है इसमें  128 सर्ग है।इस कांड के अंतर्गत राम रावण के युद्ध का वर्णन है राम रावन को मारकर किस प्रकारअयोध्या आते हैं ,का वर्णन  है  विभीषण का राज्यभिषेक, सीता की अग्नि परीक्षा, ब्रह्मा द्वारा भगवान राम की स्तुति, दशरथ और इन्द्र के उपदेश ,भारद्वाज आश्रम से हनुमान को भारत के पास अयोध्याआगमन की सूचनार्थ भेजना, रामभरत का मिलन, राम का राज्याभिषेक राम द्वारा प्रजा पालन आदि के वृतांत इसमें है
उत्तर कांड इसमें कुल एक सौ ग्यारह सर्ग है कुछ विद्वान इस काण्ड को प्रक्षिप्त मानते हैइस कांड में भी बाल कांड के समान अनेक इतिहास और पौराणिक  आख्यानो कीभरमार हैसीता का जनअपवाद, सीता का परित्याग राजा नृग उर्वशी,ययाति महर्षि वशिष्ठ के आख्यान , शत्रुघ्न द्वारा लवणासुर का वध, लव कुश का जन्म, राम का अश्वमेध यज्ञ करना लव कुश का रामायण,सीता का पृथ्वी में समाना कौशल्या आदि माताओ  का परलोक गमन , लव कुश का राज्य अभिषेक महत्व स्थान श्री राम महाप्रस्थान जैसे सभी वृतांत यहाँ वर्णित है।  

Nishkarsh इस प्रकार समग्र रूप में देखा जाए तो रामायण में कुल 645 सर्ग है और 24000 Shlok है बालकांड के प्रारंभ में 500 सर्गो उल्लेख है अत:145 सर्ग प्रक्षप्तांश प्रतीत होते है।


रामायण महाकाव्य केकथानक को आधार बनाकर रची गई रचनाए   

b>भास प्रणीत अभिषेक नाटक, प्रतिमा नाटक 
मुरारी प्रणीत  अनर्घराघव महाकाव्य  
जयदेव प्रणीत प्रसन्न राघवम्
 भवभूति प्रणीत उत्तररामचरितम् महावीरचरितम् नाटक  
कालिदास प्रणीत रघुवंशम् महाकाव्य  
 कुमार दास प्रणीत जानकी हरण महाकाव्य

 रामायण और महाभारत दोनों आर्ष महाकाव्य माने जाते हैं